फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   There is no card, there is a circle of poverty, so how to treat

कार्ड है नहीं, गरीबी का है घेरा, तो कैसे हो इलाज

Thu, 19 Sep 2019 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 12:18 AM IST
विज्ञापन
There is no card, there is a circle of poverty, so how to treat
सहारनपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की पात्रता सूची से वंचित लोग बहुत हैं, जो तंगहाली में अपनी बीमारी का इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं। वह चाहते हैं गोल्डन कार्ड बन जाए और बीमारी का इलाज हो जाए, लेकिन पात्रता सूची में नाम न होने की वजह से कार्ड नहीं बन पा रहा है। इन हालात में किसी ने बीमारी के लिए अपना घर बेच दिया है, तो कोई पैसा न होने की वजह से इलाज नहीं करा पा रहा और बेचारगी में जीने को मजबूर है।
विज्ञापन

जिले में ऐसे कई पात्र हैं जिनका नाम सूची में नहीं दर्ज हैं। जिससे वह अपना और परिजनों का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। अमर उजाला ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर पड़ताल शुरू की, तो ऐसे लोग कॉल करके यही पूछ रहे हैं कि गोल्डन कार्ड कैसे बनेगा, हम पात्रता की सूची में क्यों नहीं हैं, जबकि हमारी आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है।
विज्ञापन

केस एक -- शहर के शारदानगर निवासी ब्रजमोहन बताते हैं कि पूर्व में उनके पास बीपीएल कार्ड था। वह ठेली पर सब्जी और फल बेचने का कार्य करते थे। शरीर में बीमारी लगी और कूल्हे की एक बॉल खराब हो गई। हरियाणा के बराड़ा में उपचार कराने गया, तो वहां ऑपरेशन पर करीब दो लाख रुपये का खर्च बता दिया। क्षेत्रीय पार्षद से कई बार आयुष्मान भारत योजना का कार्ड बनवाने की मांग की, लेकिन कार्ड नहीं बन सका। पैसे ना होने की वजह से बीमारी का इलाज नहीं करा पा रहा है और कामकाज भी छूट गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस दो -- गंगोह निवासी मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि उनकी बेटी का कूल्हा खराब हो गया। प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इलाज कराकर थक गया, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई। इस्माइल ने बताया कि बीमारी पर करीब 11 लाख रुपये लगा चुके हैं, जिस कारण मकान भी बिक गया है। जनप्रतिनिधि के सिफारिशी पत्र के साथ बेटी को लेकर दिल्ली के एम्स भी गए, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं हो पाया है। यदि गोल्डन कार्ड बन जाता, तो बेटी का इलाज आसान हो जाता।
केस तीन-- बड़गांव निवासी मोहम्मद सलीम ने बताया कि उनके पास आयुष्मान भारत योजना का पत्र आया था, जिसमें बच्चों के नाम गलत दर्ज कर दिए गए। बेटी का नाम आसमीन है, जबकि पत्र में आरमीन लिखा है और बेटे का नाम आरिफ है, जबकि पत्र में आसिफ लिखकर आ गया। आधार कार्ड और योजना के पत्र में नाम अलग अलग होने की वजह से कार्ड नहीं बन पाया है और परिवार के किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने पर योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

योजना में पात्रों का चयन 2011 की जनगणना के आधार पर हुआ है। केंद्र सरकार की तरफ से पात्रों के पास सीधे ही पत्र भेजे गए, उसी पत्र के आधार पर गोल्डन कार्ड बनता है। गोल्डन कार्ड बनवाने में जनसेवा केंद्र पर 30 रुपये का शुल्क निर्धारित है, जबकि अस्पताल में बगैर शुल्क के कार्ड बनता है। जिनके नाम त्रुटिवश गलत दर्ज हो गए हैं, वह आधार कार्ड साथ लाकर उनसे संपर्क कर सकते हैं, नाम ठीक करा दिए जाएंगे। -- डाक्टर धर्मवीर, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed