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छह साल से चार कक्षों पर जड़े हैं ताले
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छह साल से चार कक्षों पर जड़े हैं ताले
सहारनपुर। एक तरफ ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर्याप्त संख्या में कक्ष नहीं होने से छात्राओं को पढ़ने में परेशानी होती है। वहीं दूसरी ओर पुल जोगियान स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज है, जिसमें चार कक्षों के छह साल से ताले नहीं खुले हैं। इसकी वजह कक्षों को शिक्षा विभाग को हस्तांतरित नहीं करना है। कक्ष बिना इस्तेमाल के ही जर्जर हो रहे हैं।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज पुल जोगियान परिसर में वर्ष 2015 में पैकफेड द्वारा चार कक्षों का निर्माण कराया गया था, जिससे विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को पर्याप्त संख्या में कक्ष उपलब्ध हो सकें। छह साल बीत गए हैं, मगर अभी तक कक्षों को विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इसकी वजह से कक्ष बंद पड़े हैं। इस कारण अब कक्षों का भवन जर्जर हो रहा है। जगह-जगह से पलस्तर उखड़ गया है। सीढ़ियां भी जर्जर हो रही हैं। खिड़की और दरवाजे बुरी हालत में हैं। एक दरवाजा टूटकर अलग हो चुका है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं। भवन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहते हैं। प्रधानाचार्य शोभा चौधरी ने कक्षों के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। उनका कहना है कि यह दो विभागों के बीच का मामला है। अधिकारियों को कक्षों की जानकारी है।
कक्षों के हस्तांतरण को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी, मगर कोरोना और लॉकडाउन की वजह से प्रक्रिया लटक गई। हम फिर से प्रयास में हैं। जल्द ही कक्षों को विभाग को हस्तांतरित कराकर इस्तेमाल में लाया जाएगा। - अजय श्रीवास्तव, सहायक लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा)
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कक्षों को हस्तांतरित नहीं किया गया है, जिसकी वजह से वे बंद ही पड़े हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। चूंकि सहायक लेखा अधिकारी से भी इस संबंध में चर्चा की जाएगी। प्रयास यही रहेगा कि कक्ष हस्तांतरित होकर इस्तेमाल में लाए जाएं।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक
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सहारनपुर। एक तरफ ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर्याप्त संख्या में कक्ष नहीं होने से छात्राओं को पढ़ने में परेशानी होती है। वहीं दूसरी ओर पुल जोगियान स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज है, जिसमें चार कक्षों के छह साल से ताले नहीं खुले हैं। इसकी वजह कक्षों को शिक्षा विभाग को हस्तांतरित नहीं करना है। कक्ष बिना इस्तेमाल के ही जर्जर हो रहे हैं।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज पुल जोगियान परिसर में वर्ष 2015 में पैकफेड द्वारा चार कक्षों का निर्माण कराया गया था, जिससे विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को पर्याप्त संख्या में कक्ष उपलब्ध हो सकें। छह साल बीत गए हैं, मगर अभी तक कक्षों को विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इसकी वजह से कक्ष बंद पड़े हैं। इस कारण अब कक्षों का भवन जर्जर हो रहा है। जगह-जगह से पलस्तर उखड़ गया है। सीढ़ियां भी जर्जर हो रही हैं। खिड़की और दरवाजे बुरी हालत में हैं। एक दरवाजा टूटकर अलग हो चुका है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं। भवन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहते हैं। प्रधानाचार्य शोभा चौधरी ने कक्षों के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। उनका कहना है कि यह दो विभागों के बीच का मामला है। अधिकारियों को कक्षों की जानकारी है।
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कक्षों के हस्तांतरण को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी, मगर कोरोना और लॉकडाउन की वजह से प्रक्रिया लटक गई। हम फिर से प्रयास में हैं। जल्द ही कक्षों को विभाग को हस्तांतरित कराकर इस्तेमाल में लाया जाएगा। - अजय श्रीवास्तव, सहायक लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा)
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कक्षों को हस्तांतरित नहीं किया गया है, जिसकी वजह से वे बंद ही पड़े हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। चूंकि सहायक लेखा अधिकारी से भी इस संबंध में चर्चा की जाएगी। प्रयास यही रहेगा कि कक्ष हस्तांतरित होकर इस्तेमाल में लाए जाएं।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में बने कक्ष- फोटो : SAHARANPUR