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सुप्रीम कोर्ट पर देशवासियों का भरोसा बरकरार : उलमा
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देवबंद(सहारनपुर)। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट-2004 को सांवैधानिक घोषित किया है। इस पर उलमा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए उसका स्वागत किया। साथ ही कहा कि देशवासियों का आज भी सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा बरकरार है।
मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने मदरसा एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कभी-कभी छोटी अदालतें हकों को समझ नहीं पातीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। कहा कि हिंदुस्तान लोकतांत्रिक देश है। जिसके डीएनए में सभी धर्म की अहमियत और उसकी इज्जत को स्वीकार किया गया है। हमें हिंदुस्तान की अदालतों पर गर्व है।
इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी मुस्तफा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी के लिए खुशी लेकर आया है। इससे न सिर्फ मदरसों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा हमेशा के लिए छट गया, बल्कि इससे मदरसा छात्रों का भविष्य भी तय हुआ है। सुप्रीम कोर्ट बधाई का पात्र है।
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फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा से यह साबित किया है कि जो सही है उसको हर हाल में इंसाफ मिलेगा। कभी-कभी निचली अदालतें गलती कर देती हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट उन गलतियों को दुरुस्त कर लोगों को इंसाफ देने का काम कर रहा है, जो सराहनीय है।
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मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने मदरसा एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कभी-कभी छोटी अदालतें हकों को समझ नहीं पातीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। कहा कि हिंदुस्तान लोकतांत्रिक देश है। जिसके डीएनए में सभी धर्म की अहमियत और उसकी इज्जत को स्वीकार किया गया है। हमें हिंदुस्तान की अदालतों पर गर्व है।
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इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी मुस्तफा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी के लिए खुशी लेकर आया है। इससे न सिर्फ मदरसों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा हमेशा के लिए छट गया, बल्कि इससे मदरसा छात्रों का भविष्य भी तय हुआ है। सुप्रीम कोर्ट बधाई का पात्र है।
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फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा से यह साबित किया है कि जो सही है उसको हर हाल में इंसाफ मिलेगा। कभी-कभी निचली अदालतें गलती कर देती हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट उन गलतियों को दुरुस्त कर लोगों को इंसाफ देने का काम कर रहा है, जो सराहनीय है।