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तिरंगा भारत की शान है, वीरों की जान है
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मोक्षायतन में विभावरी द्वारा आयोजित गोष्ठी में विचार रखते वक्ता
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को साहित्यकारों ने अपने ही अंदाज में मनाया। उन्होंने रचना के माध्यम से नेताजी के बलिदान और संघर्ष को बयां किया तो, वर्तमान परिवेश में युवाओं से हिंदुस्तान का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
अमर उजाला के अनूठे अभियान हिंदी हैं हम के तहत साहित्यिक संस्था विभावरी और मोक्षायतन योग संस्थान की ओर से बेरी बाग स्थित मोक्षायतन योग संस्थान केंद्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता कर रहे योग गुरू पद्मश्री भारत भूषण सहित मौजूद साहित्यकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप जलाकर किया। इसका आरंभ गीतकार विनोद भृंग की सरस्वती वंदना से हुआ।
इस दौरान गीतकार राजेंद्र राजन ने कहा, जिंदगी को खूबसूरत छांव तक ले जाएगी, ये समय की धूप ही तो छांव तक ले जाएगी। पीएन मधुकर ने कहा, तिरंगा भारत की शान है, वीरों की जान है। हरिराम पथिक ने कहा, कलम न माने हार लड़ाई जारी है, कसम सत्य लिखते रहने की धारी है। आशीष कुमार ने कहा, कोई स्वर हो किसी का, एक सभी का गीत हो। विनोद भृंग ने कहा, रहा समर्पित जीवन जिनका सदा देश के नाम, ऐसे नेताजी सुभाष को शत शत बार प्रणाम। डॉ. वीरेंद्र आजम ने कहा, कर लें उसकी बात बात सारी आज करेंगे, जय हिंद बोलने वाले देश पर राज करेंगे।
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मोहित संगम ने कहा, कतरा कतरा सदा लहू का भारत का जय गान कहेगा, हम चाहे मिट भी जाएंगे लेकिन हिंदुस्तान रहेगा। डॉ. हर्षवर्धन शर्मा ने कहा, शेष जिनकी आज भी तपन, रे मन कर सुभाष बाबू को नमन। शायर एवं कवि हाजी गालिब रसूल दानिश ने कहा, वोह अपनी तंग दस्ती का बयां खुद हाल करते हैं, जो अपनी बात कहने को मुझे मिस कॉल करते हैं। राजीव उपाध्याय यायावर ने कहा, कभी पांवों में छाले थे कभी सूखे निवाले थे, गर्म पत्थर पर मैंने बैठकर कई कांटे निकाले थे। जग पाल आर्य ने कहा, यार तुम भी दरवाजा खटखटाने की बात करते हो, अंदर हो और अंदर आने की बात करते हो। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने कहा, कुछ छंद उन्हें अर्पित मेरे, जिनके पांवों में छाले हैं। डॉ. अजय शर्मा ने ए मेरे प्यारे वतन गीत सुनाया। पद्मश्री भारत भूषण ने कहा, बात देश की, हम हो जाएं मौन, तो बोले कौन। इनके अलावा पूनम शर्मा ने भी काव्य पाठ किया। विद्यार्णव शर्मा ने नेताजी सुभाष चंद के जीवन आदर्श के बारे में विचार व्यक्त किए।
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अमर उजाला के अनूठे अभियान हिंदी हैं हम के तहत साहित्यिक संस्था विभावरी और मोक्षायतन योग संस्थान की ओर से बेरी बाग स्थित मोक्षायतन योग संस्थान केंद्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता कर रहे योग गुरू पद्मश्री भारत भूषण सहित मौजूद साहित्यकारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप जलाकर किया। इसका आरंभ गीतकार विनोद भृंग की सरस्वती वंदना से हुआ।
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इस दौरान गीतकार राजेंद्र राजन ने कहा, जिंदगी को खूबसूरत छांव तक ले जाएगी, ये समय की धूप ही तो छांव तक ले जाएगी। पीएन मधुकर ने कहा, तिरंगा भारत की शान है, वीरों की जान है। हरिराम पथिक ने कहा, कलम न माने हार लड़ाई जारी है, कसम सत्य लिखते रहने की धारी है। आशीष कुमार ने कहा, कोई स्वर हो किसी का, एक सभी का गीत हो। विनोद भृंग ने कहा, रहा समर्पित जीवन जिनका सदा देश के नाम, ऐसे नेताजी सुभाष को शत शत बार प्रणाम। डॉ. वीरेंद्र आजम ने कहा, कर लें उसकी बात बात सारी आज करेंगे, जय हिंद बोलने वाले देश पर राज करेंगे।
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मोहित संगम ने कहा, कतरा कतरा सदा लहू का भारत का जय गान कहेगा, हम चाहे मिट भी जाएंगे लेकिन हिंदुस्तान रहेगा। डॉ. हर्षवर्धन शर्मा ने कहा, शेष जिनकी आज भी तपन, रे मन कर सुभाष बाबू को नमन। शायर एवं कवि हाजी गालिब रसूल दानिश ने कहा, वोह अपनी तंग दस्ती का बयां खुद हाल करते हैं, जो अपनी बात कहने को मुझे मिस कॉल करते हैं। राजीव उपाध्याय यायावर ने कहा, कभी पांवों में छाले थे कभी सूखे निवाले थे, गर्म पत्थर पर मैंने बैठकर कई कांटे निकाले थे। जग पाल आर्य ने कहा, यार तुम भी दरवाजा खटखटाने की बात करते हो, अंदर हो और अंदर आने की बात करते हो। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने कहा, कुछ छंद उन्हें अर्पित मेरे, जिनके पांवों में छाले हैं। डॉ. अजय शर्मा ने ए मेरे प्यारे वतन गीत सुनाया। पद्मश्री भारत भूषण ने कहा, बात देश की, हम हो जाएं मौन, तो बोले कौन। इनके अलावा पूनम शर्मा ने भी काव्य पाठ किया। विद्यार्णव शर्मा ने नेताजी सुभाष चंद के जीवन आदर्श के बारे में विचार व्यक्त किए।