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मुस्लिम समाज में झूठी और गलत कसमों का चलन खतरनाक : गोरा
Sun, 07 Dec 2025 12:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:21 AM IST
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मौलाना कारी इस्हाक गोरा।
- फोटो : डायग्नोस्टिक सेंटर से बैग चोरी करता हुआ चोर। स्रोत पीड़ित
देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने मुस्लिम समाज में फैल रहे उस रुझान पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें लोग अल्लाह के अलावा किसी ओर के नाम की कसम खाने लगे हैं।
शनिवार को जारी बयान में मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि कसम खाने की आदत को एक खतरनाक सामाजिक और दीनी गिरावट बताते हुए कहा कि इससे हमारी नई पीढ़ी के ईमान और चरित्र पर गहरा असर पड़ेगा। अफसोस जताते हुए कहा कि आज मुसलमानों की जुबान पर कसम खाना एक खेल बन गया है।
छोटी से छोटी बात, मामूली झगड़ा हो या रोजमर्रा की बातचीत इसमें अल्लाह के अलावा तरह-तरह की कसमे खाते हैं। कहा कि यह न सिर्फ शरई तौर पर गलत है बल्कि पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के भी खिलाफ है। कसम असल में सम्मान का इजहार है और सम्मान केवल अल्लाह का है।
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जब कोई इंसान किसी रिश्ते, नाम, दरगाह या किसी बुज़ुर्ग की कसम खाता है तो वह अनजाने में उस हस्ती को अल्लाह के बराबर ठहराने जैसा काम कर बैठता है, जो सीधे-सीधे शिर्क की ओर ले जाता है। उन्होंने मुुस्लिम समाज से कसमें खाने की आदत को छोड़ने का आह्वान किया।
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शनिवार को जारी बयान में मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि कसम खाने की आदत को एक खतरनाक सामाजिक और दीनी गिरावट बताते हुए कहा कि इससे हमारी नई पीढ़ी के ईमान और चरित्र पर गहरा असर पड़ेगा। अफसोस जताते हुए कहा कि आज मुसलमानों की जुबान पर कसम खाना एक खेल बन गया है।
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छोटी से छोटी बात, मामूली झगड़ा हो या रोजमर्रा की बातचीत इसमें अल्लाह के अलावा तरह-तरह की कसमे खाते हैं। कहा कि यह न सिर्फ शरई तौर पर गलत है बल्कि पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के भी खिलाफ है। कसम असल में सम्मान का इजहार है और सम्मान केवल अल्लाह का है।
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जब कोई इंसान किसी रिश्ते, नाम, दरगाह या किसी बुज़ुर्ग की कसम खाता है तो वह अनजाने में उस हस्ती को अल्लाह के बराबर ठहराने जैसा काम कर बैठता है, जो सीधे-सीधे शिर्क की ओर ले जाता है। उन्होंने मुुस्लिम समाज से कसमें खाने की आदत को छोड़ने का आह्वान किया।