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Saharanpur News: पिता की चिता से जलाई इंसानियत की मशाल

Fri, 18 Apr 2025 12:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Apr 2025 12:35 AM IST
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The torch of humanity was lit from the funeral pyre of the father
जियाउर्रहमान का फाइल फोटो।
सहारनपुर। जब अपनों का साथ छूट जाए और दुनिया साथ छोड़ दे...तब भी कोई ऐसा होता है, जो अजनबियों को भी अपनों की तरह विदा करता है। नुमाइश कैंप निवासी एसी मैकेनिक राहुल बीमार पिता को तो नहीं बचा सके, लेकिन इंसानियत की ऐसी मिसाल कायम की है, जो समाज के लिए सीख है।
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राहुल उन लावारिस शवों के वारिस बनते हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं। बिना कोई रुपये लिए, बिना किसी स्वार्थ के, बस इंसानियत के नाम पर।
मूलरूप से गोपाल नगर नुमाइश कैंप के रहने वाले राहुल झांब एसी मैकेनिक हैं, जो संयुक्त परिवार में रहते हैं। बकौल, राहुल कोरोना काल के दौरान उनके पिता अशोक कुमार अस्पताल में भर्ती थे, उनकी किडनी खराब थी।
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उस दौरान तीन-चार माह तक पिता के साथ अस्पताल में रहना पड़ा। तब वहां के हालात देखे। कोई एक-दूसरे की मदद करने वाला नहीं था। इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया।
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वह जब पिता का शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो देखा कि वहां कई सारे शव ऐसे हैं, जिनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं है। इसके बाद उन्होंने लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने की ठान ली। इसके लिए शुरुआत में अपने परिचितों और दोस्तों आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर दिया। इंसानियत के इस काम को देखकर उनके साथ अमित गुप्ता, संचित अरोड़ा, पार्षद अमित त्यागी और गौरव कक्कड़ समेत कई अन्य लोग जुड़ गए। कोरोना में 189 शवों का अंतिम संस्कार किया।
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