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दल तो मिले, मगर दिलों में रह गई दूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 26 Jan 2017 01:04 AM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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सहारनपुर के देवबंद में सपा और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता अलग-थलग दिख रहे हैं। चुनावी जंग में कूदने के लिए दोनों दल मिल गए है, मगर इनके कार्यकर्ताओं के दिलों में अभी भी दूरी नजर आ रही है।
सपा से माविया अली का टिकट कटने के बाद उनके समर्थक वर्तमान में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चौधरी के लिए तैयार नहीं है। जबकि, माविया यदि सपा से टिकट पाने में कामयाब हो जाते हैं तो कांग्रेसियों का एक गुट उनके साथ आता नहीं दिख रहा है।
देवबंद सीट पर टिकट को लेकर खींचतान जारी है। माविया अली के समर्थक चाहते हैं कि सपा से उनको टिकट हो। इस कारण वह वर्तमान में घोषित कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चौधरी के लिए कतई तैयार नहीं है। कुछ ऐसे ही हालात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भी बनते दिख रहे हैं।
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यदि माविया अली सपा से प्रत्याशी घोषित होते हैं तो कांग्रेसियों का एक गुट अलग राह पकड़ने का मन बनाए हुए हैं। जबकि, सपा का एक बड़ा धड़ा माविया अली का समर्थन न करने का पहले ही एलान कर चुका है। हालांकि इस सीट पर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण दोनों ही दलों के कार्यकर्ता बेचैन हैं।
सबसे अधिक माविया समर्थक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कब उन्हें माविया अली के टिकट होने की खबर मिले और वह चुनाव प्रचार के लिए मैदान में कूदे।
इस बीच चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। माविया अली का टिकट होने की सबसे अधिक चर्चाएं चल रही हैं। इसे लेकर समर्थक खुशी मनाते हैं, लेकिन टिकट पक्का न होने पर मायूस दिखाई देते हैं।
सपा और कांग्रेस में गठबंधन होने के बावजूद दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं की यह आपसी फूट चुनाव के लिहाज से नुकसान दायक साबित हो सकती है।
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सपा से माविया अली का टिकट कटने के बाद उनके समर्थक वर्तमान में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चौधरी के लिए तैयार नहीं है। जबकि, माविया यदि सपा से टिकट पाने में कामयाब हो जाते हैं तो कांग्रेसियों का एक गुट उनके साथ आता नहीं दिख रहा है।
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देवबंद सीट पर टिकट को लेकर खींचतान जारी है। माविया अली के समर्थक चाहते हैं कि सपा से उनको टिकट हो। इस कारण वह वर्तमान में घोषित कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चौधरी के लिए कतई तैयार नहीं है। कुछ ऐसे ही हालात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भी बनते दिख रहे हैं।
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यदि माविया अली सपा से प्रत्याशी घोषित होते हैं तो कांग्रेसियों का एक गुट अलग राह पकड़ने का मन बनाए हुए हैं। जबकि, सपा का एक बड़ा धड़ा माविया अली का समर्थन न करने का पहले ही एलान कर चुका है। हालांकि इस सीट पर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण दोनों ही दलों के कार्यकर्ता बेचैन हैं।
सबसे अधिक माविया समर्थक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कब उन्हें माविया अली के टिकट होने की खबर मिले और वह चुनाव प्रचार के लिए मैदान में कूदे।
इस बीच चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। माविया अली का टिकट होने की सबसे अधिक चर्चाएं चल रही हैं। इसे लेकर समर्थक खुशी मनाते हैं, लेकिन टिकट पक्का न होने पर मायूस दिखाई देते हैं।
सपा और कांग्रेस में गठबंधन होने के बावजूद दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं की यह आपसी फूट चुनाव के लिहाज से नुकसान दायक साबित हो सकती है।