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483 करोड रुपये दबाए बैठी जिले की चीनी मिलें
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सहारनपुर। किसानों को बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने के तमाम प्रयास कदमताल साबित हो रहे हैं। पेराई सत्र समाप्त होने के ढ़ाई महीने बाद भी जनपद की छह चीनी मिलें किसानों के करीब 483 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। बकाया भुगतान में सबसे आगे देवबंद चीनी मिल और सबसे पीछे गांगनौली शुगर मिल है।
जिले की छह चीनी मिलों पर अब भी करीब 483.06 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। देवबंद चीनी मिल 93.95 प्रतिशत भुगतान करके जिले में सबसे आगे है। जबकि सबसे पीछे रहने वाली गांगनौली चीनी मिल ने अभी तक मात्र 27.27 फीसदी ही भुगतान किया है। अन्य मिलों ने भी 58 से लेकर 78 प्रतिशत तक ही गन्ना मूल्य का भुगतान किया है। ग्राम नंदी के किसान प्रदीप नंबरदार, चौरा खुर्द के महक सिंह आदि किसानों का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसान आर्थिक संकट में है। उन्होंने कहा कि जब किसान अपने बैंक ऋण पर ब्याज देता है तो उसे भी निर्धारित समय पर गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने पर चीनी मिल से बकाया पर ब्याज मिलना चाहिए। इसका प्रावधान गन्ना क्रय अधिनियम में होने पर भी किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान मिल रहा है और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज ही प्राप्त हो रहा है।
-- वर्जन --
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए गन्ना विभाग से लेकर शासन प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में जिलाधिकारी ने चीनी मिलों के प्रबंधकों की बैठक कर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। बकाया भुगतान में सबसे पीछे रहने वाली गांगनौली चीनी मिल को भी जल्द भुगतान करने के लिए कहा गया है। बकाया भुगतान में कोताही बरतने वाली मिलों के विरुद्घ कडी कार्रवाई की जाएगी। ---- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
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जनपद की मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य
मिल ------------ बकाया
देवबंद ----------- 31.07 करोड़
गांगनौली ------- 212.35 करोड़
शेरमऊ ---------- 60.15 करोड़
गागलहेडी ------- 42.00 करोड़
नानौता ---------- 72.95 करोड़
सरसावा ---------- 64.54 करोड़
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नोट: गन्ना विभाग के 24 जुलाई के आंकडों के अनुसार।
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जिले की छह चीनी मिलों पर अब भी करीब 483.06 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। देवबंद चीनी मिल 93.95 प्रतिशत भुगतान करके जिले में सबसे आगे है। जबकि सबसे पीछे रहने वाली गांगनौली चीनी मिल ने अभी तक मात्र 27.27 फीसदी ही भुगतान किया है। अन्य मिलों ने भी 58 से लेकर 78 प्रतिशत तक ही गन्ना मूल्य का भुगतान किया है। ग्राम नंदी के किसान प्रदीप नंबरदार, चौरा खुर्द के महक सिंह आदि किसानों का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसान आर्थिक संकट में है। उन्होंने कहा कि जब किसान अपने बैंक ऋण पर ब्याज देता है तो उसे भी निर्धारित समय पर गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने पर चीनी मिल से बकाया पर ब्याज मिलना चाहिए। इसका प्रावधान गन्ना क्रय अधिनियम में होने पर भी किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान मिल रहा है और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज ही प्राप्त हो रहा है।
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-- वर्जन --
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए गन्ना विभाग से लेकर शासन प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में जिलाधिकारी ने चीनी मिलों के प्रबंधकों की बैठक कर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। बकाया भुगतान में सबसे पीछे रहने वाली गांगनौली चीनी मिल को भी जल्द भुगतान करने के लिए कहा गया है। बकाया भुगतान में कोताही बरतने वाली मिलों के विरुद्घ कडी कार्रवाई की जाएगी। ---- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
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जनपद की मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य
मिल ------------ बकाया
देवबंद ----------- 31.07 करोड़
गांगनौली ------- 212.35 करोड़
शेरमऊ ---------- 60.15 करोड़
गागलहेडी ------- 42.00 करोड़
नानौता ---------- 72.95 करोड़
सरसावा ---------- 64.54 करोड़
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नोट: गन्ना विभाग के 24 जुलाई के आंकडों के अनुसार।