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रोजा इफ्तार पाटिर्यों में गरीबों का है पहला हक
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रोजा इफ्तार पार्टियों में गरीबों का है पहला हक
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रमजान में हमें इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि कहीं हमसे गरीबों का हक अदा करने में कोई कोताही तो नहीं हो रही है। अक्सर रोजा इफ्तार पार्टियों में देखते हैं कि गरीबों को आमंत्रित नहीं किया जाता, जबकि शरीयत के अनुसार पहला हक गरीबों का होता है। इस बात का ख्याल रखें कि खुदा के यहां हमें इसका भी जवाब देना होगा। मुसलमानों को चाहिए कि ऐसा कोई कार्य न करें, जिसकी अल्लाह के यहां पकड़ हो।
सवाल- बाराबंकी निवासी जाकिर ने पूछा कि मेरे पिता बहुत बीमार हैं और वह जबरदस्ती रोजा रखते हैं और दिन चढ़ने तक हिम्मत टूटने पर तोड़ देते हैं। अब ऐसी सूरत में शरीयत का क्या हुकुम है।
जवाब- आपके पिता को ऐसा नहीं करना चाहिए। उनको बता दें कि शरीयत बीमार को रोजा कजा करने की इजाजत देती है। याद रखें रोजे की हालत में कोई ऐसा काम करना भी मकरूह है, जिससे इस कदर कमजोरी हो जाए कि किसी समय रोजा तोड़ना पड़े।
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सवाल- खाताखेड़ी निवासी बिलाल ने पूछा कि शरीयत के अनुसार जकात फर्ज होने की क्या शर्तें हैं।
जवाब- जकात फर्ज होने की खास चार शर्त हैं। इनमें एक इस्लाम में होना। दूसरी निसाब का पूरा होना। तीसरी उस पर चांद के हिसाब से साल गुजर जाए और चौथी आकिल और बालिग होना।
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रमजान में हमें इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि कहीं हमसे गरीबों का हक अदा करने में कोई कोताही तो नहीं हो रही है। अक्सर रोजा इफ्तार पार्टियों में देखते हैं कि गरीबों को आमंत्रित नहीं किया जाता, जबकि शरीयत के अनुसार पहला हक गरीबों का होता है। इस बात का ख्याल रखें कि खुदा के यहां हमें इसका भी जवाब देना होगा। मुसलमानों को चाहिए कि ऐसा कोई कार्य न करें, जिसकी अल्लाह के यहां पकड़ हो।
सवाल- बाराबंकी निवासी जाकिर ने पूछा कि मेरे पिता बहुत बीमार हैं और वह जबरदस्ती रोजा रखते हैं और दिन चढ़ने तक हिम्मत टूटने पर तोड़ देते हैं। अब ऐसी सूरत में शरीयत का क्या हुकुम है।
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जवाब- आपके पिता को ऐसा नहीं करना चाहिए। उनको बता दें कि शरीयत बीमार को रोजा कजा करने की इजाजत देती है। याद रखें रोजे की हालत में कोई ऐसा काम करना भी मकरूह है, जिससे इस कदर कमजोरी हो जाए कि किसी समय रोजा तोड़ना पड़े।
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सवाल- खाताखेड़ी निवासी बिलाल ने पूछा कि शरीयत के अनुसार जकात फर्ज होने की क्या शर्तें हैं।
जवाब- जकात फर्ज होने की खास चार शर्त हैं। इनमें एक इस्लाम में होना। दूसरी निसाब का पूरा होना। तीसरी उस पर चांद के हिसाब से साल गुजर जाए और चौथी आकिल और बालिग होना।