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खर्च कम करने के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया स्थगित
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सहारनपुर। पेयजल की पाइपलाइनों के लीकेज के नाम पर प्रति वर्ष होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च को कम करने के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया सोमवार को अचानक स्थगित कर दी गई। टेंडर स्थगित करने के पीछे कुछ ठेकेदारों, निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों का हाथ माना जा रहा है। इसे लेकर नगर निगम में सोमवार को दिन भर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं।
जलकल विभाग से लीकेज ठीक होने का टेंडर पिछले ढाई सालों से पुरानी दरों पर ही चल रहा है। नियम यह है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष का टेंडर होना चाहिए, लेकिन पिछले ढाई साल से प्रत्येक वर्ष 10 करोड़ का भुगतान लीकेज के नाम पर हो रहा है। महाप्रबंधक जलकल मनोज कुमार आर्य ने दस करोड़ रुपये के खर्च को दो करोड़ रुपये पर लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया एक जनवरी 2022 में शुरू की थी। इसमें नगर निगम सहारनपुर को प्रत्येक वर्ष आठ करोड़ की बचत होती। महाप्रबंधक जल कल ने लीकेज की 150 मदों को घटाकर 50 कर दिया था, जिसके विरुद्ध कुछ ठेकेदार लामबंद हो गए थे। निगम में चर्चा है कि ठेकेदारों और कर्मचारियों ने ऐसी गोटियां बिठाईं कि नगर निगम अधिकारियों को टेंडर स्थगित करना पड़ा। चर्चा यह भी है कि टेंडर प्रक्रिया कम से कम तीन दिन और अधिकतम एक सप्ताह में पूरी हो जानी थी, लेकिन इसे दस जनवरी तक इसीलिए खींचा गया, जिससे कि आचार संहिता का हवाला देकर इसे स्थगित किया जा सके। पार्षदों ने इसके पीछे बड़ा खेल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि सफाई और पथ प्रकाश जैसे कार्यों के लिए एक कंपनी काम कर सकती है तो लीकेज का काम क्यों नहीं?
लीकेज के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। सोमवार को टेंडर खोला जाना था, लेकिन नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने निर्देश दिए हैं कि जो भी टेंडर प्रक्रियाएं चल रही हैं फिलहाल उनकेे स्थगित कर दिया जाए। ऐसे में इस प्रक्रिया को भी स्थगित कर दिया गया है, जो सामान्य बात है।
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मनोज कुमार आर्य, महाप्रबंधक, जल कल।
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जलकल विभाग से लीकेज ठीक होने का टेंडर पिछले ढाई सालों से पुरानी दरों पर ही चल रहा है। नियम यह है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष का टेंडर होना चाहिए, लेकिन पिछले ढाई साल से प्रत्येक वर्ष 10 करोड़ का भुगतान लीकेज के नाम पर हो रहा है। महाप्रबंधक जलकल मनोज कुमार आर्य ने दस करोड़ रुपये के खर्च को दो करोड़ रुपये पर लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया एक जनवरी 2022 में शुरू की थी। इसमें नगर निगम सहारनपुर को प्रत्येक वर्ष आठ करोड़ की बचत होती। महाप्रबंधक जल कल ने लीकेज की 150 मदों को घटाकर 50 कर दिया था, जिसके विरुद्ध कुछ ठेकेदार लामबंद हो गए थे। निगम में चर्चा है कि ठेकेदारों और कर्मचारियों ने ऐसी गोटियां बिठाईं कि नगर निगम अधिकारियों को टेंडर स्थगित करना पड़ा। चर्चा यह भी है कि टेंडर प्रक्रिया कम से कम तीन दिन और अधिकतम एक सप्ताह में पूरी हो जानी थी, लेकिन इसे दस जनवरी तक इसीलिए खींचा गया, जिससे कि आचार संहिता का हवाला देकर इसे स्थगित किया जा सके। पार्षदों ने इसके पीछे बड़ा खेल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि सफाई और पथ प्रकाश जैसे कार्यों के लिए एक कंपनी काम कर सकती है तो लीकेज का काम क्यों नहीं?
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लीकेज के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। सोमवार को टेंडर खोला जाना था, लेकिन नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने निर्देश दिए हैं कि जो भी टेंडर प्रक्रियाएं चल रही हैं फिलहाल उनकेे स्थगित कर दिया जाए। ऐसे में इस प्रक्रिया को भी स्थगित कर दिया गया है, जो सामान्य बात है।
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मनोज कुमार आर्य, महाप्रबंधक, जल कल।