फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   The land was declared transferable in 2014.

2014 में संक्रमणीय घोषित करा दी थी भूमि

Sat, 16 Oct 2021 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 12:03 AM IST
विज्ञापन
The land was declared transferable in 2014.
सहारनपुर। पट्टों के रूप में आवंटित हुई सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अब्दुल वहीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम बैनामे कराने से लेकर भूमि की श्रेणी परिवर्तित करने में अधिकारी कठपुतली बन गए थे, जबकि पट्टे की भूमि का आवंटन सिर्फ उपयोग के लिए किया गया था, उसे बेचा नहीं जा सकता था। वर्ष 2014 में इस भूमि को संक्रमणीय भूमिधर घोषित करा लिया गया था।
विज्ञापन

दरअसल, गांव असलमपुर बरथा निवासी रणवीर सिंह ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की और बेहट तहसील के तीन गांवों में सार्वजनिक उपयोग की करीब 750 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा होने का आरोप लगाया था। इसकी जांच एसडीएम बेहट ने की। जांच में स्पष्ट हुआ कि जिन लोगों के नाम पट्टे आवंटित हुए हैं, उन्होंने जमीन बेची है, जबकि जमीन बेचने का उन्हें अधिकार नहीं था। चूंकि यह भूमि 115 पट्टाधारकों को उपयोग के लिए आवंटित की गई थी और उसका भी समय निर्धारित था। बावजूद इसके जमीन बेच दी गई और जमीन को संक्रमणीय भूमिधर तक घोषित करा लिया गया था। इस खेल में हल्का लेखपाल से लेकर रजिस्ट्रार कानूनगो और एसडीएम तक शामिल हो गए थे। यही वजह है कि अब अब्दुल वहीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों सहित उन सब अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हो गई, जो इस खेल में शामिल थे।
विज्ञापन

अपर जिलाधिकारी न्यायालय ने निरस्त किए थे पट्टे
गत 08 सितंबर को ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के न्यायालय ने उक्त भूमि के 115 पट्टों का आवंटन निरस्त करने का आदेश दिया था, साथ ही भूमि को राजस्व अभिलेखों में मूल नौइयत के अनुसार दर्ज कराने और भूमि पर राजस्व विभाग को कब्जा लेने का भी आदेश दिया था। यह मामला अपर जिलाधिकारी के न्यायालय में 2018 से विचाराधीन था। इस आदेश के अगले दिन बेहट तहसील प्रशासन और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर निशानदेही कराते हुए झंडी लगाई थीं, लेकिन उसी दिन राजस्व परिषद से अब्दुल वहीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पक्ष में स्थगनादेश आ गया था। इस कारण बाद में भूमि पर कब्जा लेने की प्रक्रिया रुक गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीनों गांवों की है जमीन
ग्रामशेरपुर पेलो की 27.207 हेक्टेयर, रोशनपुर पेलो की 9.246 हेक्टेयर और अली अकबरपुर की 13.242 हेक्टेयर यानी कुल 49.695 हेक्टेयर(745.425 बीघा)है, जिसका आवंटन निरस्त हुआ था। इसमें काफी हिस्सा अब्दुल वहीद एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पास है।

पूर्व में दो मुकदमे हार चुका है हाजी इकबाल पक्ष
ग्राम अकबरपुर की सार्वजनिक उपयोग और गोहर की भूमि को लेकर तहसीलदार बेहट न्यायालय में दो वाद 2017 में दर्ज हुए थे। आरोप था कि सार्वजनिक उपयोग और गोहर की भूमि पर अनधिकृत कब्जा करके अपनी जमीन में शामिल कर लिया गया। 19 नवंबर 2018 को तहसीलदार न्यायालय बेहट ने मुकदमे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों को जमीन से बेदखली का आदेश किया था, साथ ही एक मुकदमे में बतौर क्षतिपूर्ति सर्किल रेट के पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष के अनुसार करीब 25 लाख और दूसरे मुकदमे में 4,71,500 रुपये सहित वाद व्यय और निष्पादन शुल्क के रूप में आरोपित किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed