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Saharanpur News: एक कमरे से शुरू किया सफर, अब असम-बंगाल तक की डगर
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छुटमलपुर। कस्बे की पंजाबी काॅलोनी निवासी मिनाक्षी फुटेला लड्डू गोपाल की पोशाक बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी है। कभी अपने लड्डू गोपाल की पोशाक खुद बनाई तो पडोसियों की दाद मिली। इससे उत्साहित हो उसने बिजनेस के तौर पर कान्हा जी के वस्त्र बनाएं, जिन्हे खरीदारों ने हाथोहाथ लिया। आज उनके बनाए वस्त्रों की मांग असम से बंगाल तक है।
मिनाक्षी बताती हैं कि जल्दी शादी के चक्कर में बीए द्वितीय वर्ष में उनकी पढ़ाई छूट गई थी। पति हरीश फुटेला एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। वेतन ज्यादा नहीं है। ऐसे में आर्थिक दिक्कतें आई तो लगा कि परिवार की जिम्मेदारी में हाथ बंटाया जाए, लेकिन कोई आइडिया नहीं आया। इसी दौरान करीब ढाई साल पहले अपने घर के लड्डू गोपाल की पोशाक खुद डिजाइन की। जिस पर सभी से खूब वाहवाही मिली। इस पर उनका उत्साह बढ़ा। पहले उन्होंने पोशाक बनाकर पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों को उपहार में दी। वहां से प्रोत्साहन मिला तो घर के एक कमरे में मशीन लगा इसे व्यावसायिक स्तर पर शुरु किया। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पेज बनाया तो लोगों ने इसे हाथोंहाथ लिया। लोगों को उनकी बनाई पोशाक बेहद पसंद आई।
मिनाक्षी ने बताया कि यूपी, हरियाणा, असम और बंगाल तक से उन्हें अच्छी खासी संख्या में ऑर्डर मिलते हैं। जन्माष्टमी और सर्दी का सीजन शुरु होने पर उन्हें काम से फुर्सत नहीं मिलती है। कहती हैं कि लड्डू गोपाल ने उनकी जिंदगी खुशियों से भर दी।
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मिनाक्षी बताती हैं कि जल्दी शादी के चक्कर में बीए द्वितीय वर्ष में उनकी पढ़ाई छूट गई थी। पति हरीश फुटेला एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। वेतन ज्यादा नहीं है। ऐसे में आर्थिक दिक्कतें आई तो लगा कि परिवार की जिम्मेदारी में हाथ बंटाया जाए, लेकिन कोई आइडिया नहीं आया। इसी दौरान करीब ढाई साल पहले अपने घर के लड्डू गोपाल की पोशाक खुद डिजाइन की। जिस पर सभी से खूब वाहवाही मिली। इस पर उनका उत्साह बढ़ा। पहले उन्होंने पोशाक बनाकर पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों को उपहार में दी। वहां से प्रोत्साहन मिला तो घर के एक कमरे में मशीन लगा इसे व्यावसायिक स्तर पर शुरु किया। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पेज बनाया तो लोगों ने इसे हाथोंहाथ लिया। लोगों को उनकी बनाई पोशाक बेहद पसंद आई।
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मिनाक्षी ने बताया कि यूपी, हरियाणा, असम और बंगाल तक से उन्हें अच्छी खासी संख्या में ऑर्डर मिलते हैं। जन्माष्टमी और सर्दी का सीजन शुरु होने पर उन्हें काम से फुर्सत नहीं मिलती है। कहती हैं कि लड्डू गोपाल ने उनकी जिंदगी खुशियों से भर दी।
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