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Saharanpur News: संसद में सरकार ने माना, 1258 में से 254 गांव ही हर घर जल से प्रमाणित
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सहारनपुर। सांसद इमरान मसूद ने जल जीवन मिशन की ओर से जिले में पाइप जलापूर्ति, अधूरी योजनाओं, टूटी सड़कों की मरमत, कार्यों की प्रगति के संबंध में तारांकित सवाल (मौखिक सवाल) पूछा।
सरकार ने सवाल के जवाब में बताया कि सहारनपुर जनपद के कुल 1258 गांवों में से 1103 गांवों में पाइप लाइन से जलापूर्ति का कार्य शुरू हो चुका है। 155 गांव अभी भी वंचित हैं। जवाब में सरकार ने माना कि मात्र 366 गांवों में ही सौ फीसदी लक्ष्य हासिल किया गया है। इनमें से भी सिर्फ 254 गांवों को हर घल जल प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। अन्य गांवों में कार्य अधूरा है। सांसद ने सवाल उठाया कि पाइपलाइन बिछाने से सड़कों को जो क्षति पहुंची है, उसकी मरम्मत कब और कैसे की जा रही है। जवाब में सरकार ने बताया कि 460 गांवों में सड़कों की मरम्मत हो चुकी है।
643 गांवों में आंशिक मरम्मत हो चुकी है। कार्य की धीमी गति और एजेंसी की निष्क्रियता के कारण एक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया है। 391 गांवों का कार्य संस्था से वापस लेकर अन्य को दिया गया है। संसदीय कार्य प्रभारी विपिन जैन ने बताया कि सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के पीछे जो सच्चाई छिपी है, उसे उजागर करना आवश्यक था। जब तब हर गांव में पूरी पाइपलाइन, सड़कों की मरम्मत और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती तब तब योजना आंकड़ों तक सीमित मानी जाएगी।
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सरकार ने सवाल के जवाब में बताया कि सहारनपुर जनपद के कुल 1258 गांवों में से 1103 गांवों में पाइप लाइन से जलापूर्ति का कार्य शुरू हो चुका है। 155 गांव अभी भी वंचित हैं। जवाब में सरकार ने माना कि मात्र 366 गांवों में ही सौ फीसदी लक्ष्य हासिल किया गया है। इनमें से भी सिर्फ 254 गांवों को हर घल जल प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। अन्य गांवों में कार्य अधूरा है। सांसद ने सवाल उठाया कि पाइपलाइन बिछाने से सड़कों को जो क्षति पहुंची है, उसकी मरम्मत कब और कैसे की जा रही है। जवाब में सरकार ने बताया कि 460 गांवों में सड़कों की मरम्मत हो चुकी है।
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643 गांवों में आंशिक मरम्मत हो चुकी है। कार्य की धीमी गति और एजेंसी की निष्क्रियता के कारण एक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया है। 391 गांवों का कार्य संस्था से वापस लेकर अन्य को दिया गया है। संसदीय कार्य प्रभारी विपिन जैन ने बताया कि सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के पीछे जो सच्चाई छिपी है, उसे उजागर करना आवश्यक था। जब तब हर गांव में पूरी पाइपलाइन, सड़कों की मरम्मत और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती तब तब योजना आंकड़ों तक सीमित मानी जाएगी।
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