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सगीर को मौत के मुंह में खींचकर ले गई मुफलिसी
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सहारनपुर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में टारगेट किलिंग का शिकार बने सगीर अहमद को मुफलिसी मौत के मुंह में खींचकर ले गई। सहारनपुर में काम न मिलने की वजह से वह एक वर्ष पहले पुलवामा गए थे। सगीर के अलावा भी काफी लोग लड़की छिलाई और कटाई का कार्य जम्मू-कश्मीर में करते हैं, वह कहते हैं कि वहां दहशत के साये में रहकर काम करना पड़ता है।
सगीर अहमद का भतीजा फैसल भी पुलवामा की उसी फैक्टरी में लकड़ी की छिलाई और कटाई का कार्य करता था। फैसल दो सप्ताह पूर्व ही सहारनपुर आया था। फैसल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की वजह से दूसरे प्रदेशों के लोग हर समय दहशत में रहते हैं। पुलवामा में सहारनपुर के दस से अधिक लोग लकड़ी का कार्य करते हैं, जो उनके संपर्क में रहे हैं। फैसल ने बताया कि पुलवामा में कार्य करना आसान नहीं है। क्योंकि, हर समय आतंकी गतिविधयों का डर रहता है। हालांकि, पुलिस और सेना की ओर से सुरक्षा दी जाती है। आतंकियों का मकसद है कि दूसरे प्रदेशों के लोग जम्मू-कश्मीर में आकर न बसें।
फैसल का कहना है कि सहारनपुर में काम न मिलने और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वह पुलवामा में काम करने गए थे। कोरोना काल के बाद से काम मिलना मुश्किल हो गया था, काफी तलाश के बाद पुलवामा में काम मिला था।
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देर रात पहुंचेगा शव, छाया मातम
शव लेने के लिए सगीर अहमद का भाई नसीम और दामाद शमशाद शनिवार देर रात पुलवामा के लिए रवाना हो गए थे। रविवार दोपहर तीन बजे के बाद सगीर का शव लेकर सहारनपुर के लिए चले हैं। वह देर रात तक सहारनपुर पहुंचेंगे। वहीं, पूरे दिन पड़ोसी और परिवार के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते रहे।
पत्नी की कोरोना से हुई थी मौत, बेटा बाडमेर में करता है नौकरी
सगीर अहमद की पत्नी नफीसा की मौत चार माह पूर्व कोरोना संक्रमण की वजह से हुई थी। उनका बेटा जहांगीर राजस्थान के बाडमेर में लकड़ी कटाई और छिलाई का कार्य करता है। क्षेत्रीय पार्षद मंसूर बदर का कहना है कि मुफलिसी की वजह से लोग जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों में नौकरी करने को मजबूर हैं।
एडीएम और एसडीएम ने दी सांत्वना
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डाक्टर अर्चना द्विवेदी और उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने सगीर अहमद के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। दोनों अधिकारियों के समक्ष परिवार के लोगों ने एक करोड़ रुपये आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग की। साथ ही लेखपाल ने भी परिवार के लोगों के खाता संख्या और आधार कार्ड लिए हैं।
बोली पुत्रियां, सेना ले बदला
सगीर अहमद की चार बेटियां और एक बेटा है। इनमें से नफीसा, नजराना व आयशा की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटी बेटी सोबी अविवाहित है। पिता की मौत पर बेटियों और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। नफीसा, नजाराना व आयशा का कहना है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता है। नजराना व जहांगीर का कहना है कि भारतीय सेना उनके पिता की मौत का बदला ले। दूसरे राज्यों और जिलों के लोगों को जम्मू-कश्मीर में पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए।
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सगीर अहमद का भतीजा फैसल भी पुलवामा की उसी फैक्टरी में लकड़ी की छिलाई और कटाई का कार्य करता था। फैसल दो सप्ताह पूर्व ही सहारनपुर आया था। फैसल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की वजह से दूसरे प्रदेशों के लोग हर समय दहशत में रहते हैं। पुलवामा में सहारनपुर के दस से अधिक लोग लकड़ी का कार्य करते हैं, जो उनके संपर्क में रहे हैं। फैसल ने बताया कि पुलवामा में कार्य करना आसान नहीं है। क्योंकि, हर समय आतंकी गतिविधयों का डर रहता है। हालांकि, पुलिस और सेना की ओर से सुरक्षा दी जाती है। आतंकियों का मकसद है कि दूसरे प्रदेशों के लोग जम्मू-कश्मीर में आकर न बसें।
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फैसल का कहना है कि सहारनपुर में काम न मिलने और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वह पुलवामा में काम करने गए थे। कोरोना काल के बाद से काम मिलना मुश्किल हो गया था, काफी तलाश के बाद पुलवामा में काम मिला था।
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देर रात पहुंचेगा शव, छाया मातम
शव लेने के लिए सगीर अहमद का भाई नसीम और दामाद शमशाद शनिवार देर रात पुलवामा के लिए रवाना हो गए थे। रविवार दोपहर तीन बजे के बाद सगीर का शव लेकर सहारनपुर के लिए चले हैं। वह देर रात तक सहारनपुर पहुंचेंगे। वहीं, पूरे दिन पड़ोसी और परिवार के लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते रहे।
पत्नी की कोरोना से हुई थी मौत, बेटा बाडमेर में करता है नौकरी
सगीर अहमद की पत्नी नफीसा की मौत चार माह पूर्व कोरोना संक्रमण की वजह से हुई थी। उनका बेटा जहांगीर राजस्थान के बाडमेर में लकड़ी कटाई और छिलाई का कार्य करता है। क्षेत्रीय पार्षद मंसूर बदर का कहना है कि मुफलिसी की वजह से लोग जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों में नौकरी करने को मजबूर हैं।
एडीएम और एसडीएम ने दी सांत्वना
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डाक्टर अर्चना द्विवेदी और उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने सगीर अहमद के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। दोनों अधिकारियों के समक्ष परिवार के लोगों ने एक करोड़ रुपये आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग की। साथ ही लेखपाल ने भी परिवार के लोगों के खाता संख्या और आधार कार्ड लिए हैं।
बोली पुत्रियां, सेना ले बदला
सगीर अहमद की चार बेटियां और एक बेटा है। इनमें से नफीसा, नजराना व आयशा की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटी बेटी सोबी अविवाहित है। पिता की मौत पर बेटियों और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। नफीसा, नजाराना व आयशा का कहना है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता है। नजराना व जहांगीर का कहना है कि भारतीय सेना उनके पिता की मौत का बदला ले। दूसरे राज्यों और जिलों के लोगों को जम्मू-कश्मीर में पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए।