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चार किमी दूर तक सुनी गई धमाकों की गूंज
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विस्फोट से ध्वस्त हुई छत
- फोटो : SAHARANPUR
चार किमी दूर तक सुनी गई धमाकों की गूंज
छुटमलपुर (सहारनपुर)। सतपुरा की पटाखा फैक्टरी में आग लगने पर हुए धमाकों की गूंज से आसपास का तीन से चार किमी का इलाका गूंज उठा। किसी बड़े अनिष्ट की आशंका से ग्रामीणों की भीड़ फैक्टरी की तरफ दौड़ पड़ी। फैक्टरी ज्वालामुखी की तरह नजर आ रही थी, जिससे आग की लपटें और धुआं उठ रहा था। रह-रह कर धमाके हो रहे थे। हर तरफ आपाधापी और चीख पुकार मची थी।
सतपुरा गांव स्थित जय बालाजी पटाखा फैक्टरी में काम करने वाले यहीं के अंकित कुमार ने बताया कि सुबह आठ बज कर पांच मिनट पर वह अपने काम में लगा हुआ था। अचानक गोदाम धमाके के साथ आग की लपटों में घिर गया। हर ओर चीख-पुकार और आपाधापी मच गई। वह जान बचाकर मुख्य गेट की तरफ भागा, जो बंद था। छोटा गेट खुला था। वह किसी तरह उससे बाहर निकला। तभी उसे अहसास हुआ कि पड़ोस की महिलाएं और उसके साथी तो अंदर ही फंसे हैं। वह हिम्मत करके पिछले गेट के पास पहुंचा। फिर अपने साथियों शिवम, आकाश और सोनी की मदद से अंदर फंसी महिलाओं को बाहर निकाला। इनमें से कई तो डर के मारे बेहोश हो गई थीं।
इस अग्निकांड में फैक्टरी के अंदर खड़ी अंकित की नई बाइक जल कर कबाड़ हो गई। अंकित ने बताया कि अपनी बाइक का ख्याल तो उसे आग बुझने के बाद ही आया। सुपरवाइजर बाबूलाल का एक्टिवा और खुशहालीपुर निवासी मजदूर की बाइक भी आग की भेंट चढ़ गई। धमाके इतने जोरदार थे कि तीन से चार किमी की दूरी पर स्थित गांवों कुरढीखेडा और खुशहालीपुर तक भी इनकी धमक सुनाई दी।
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लाइन में लगे मजदूरों में मची भगदड़
फैक्टरी में काम करने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं की है। जिस वक्त हादसा हुआ, करीब 150 मजदूर फैक्टरी में प्रवेश कर चुके थे। 100 मजदूर गेट के बाहर लाइन में लगे थे। धमाके होते ही बाहर लाइन में लगे मजदूरों में भगदड़ मच गई। इनमें ऐसे बहुत से मजदूर थे जिनके परिवार के सदस्य अंदर थे।
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। सतपुरा की पटाखा फैक्टरी में आग लगने पर हुए धमाकों की गूंज से आसपास का तीन से चार किमी का इलाका गूंज उठा। किसी बड़े अनिष्ट की आशंका से ग्रामीणों की भीड़ फैक्टरी की तरफ दौड़ पड़ी। फैक्टरी ज्वालामुखी की तरह नजर आ रही थी, जिससे आग की लपटें और धुआं उठ रहा था। रह-रह कर धमाके हो रहे थे। हर तरफ आपाधापी और चीख पुकार मची थी।
सतपुरा गांव स्थित जय बालाजी पटाखा फैक्टरी में काम करने वाले यहीं के अंकित कुमार ने बताया कि सुबह आठ बज कर पांच मिनट पर वह अपने काम में लगा हुआ था। अचानक गोदाम धमाके के साथ आग की लपटों में घिर गया। हर ओर चीख-पुकार और आपाधापी मच गई। वह जान बचाकर मुख्य गेट की तरफ भागा, जो बंद था। छोटा गेट खुला था। वह किसी तरह उससे बाहर निकला। तभी उसे अहसास हुआ कि पड़ोस की महिलाएं और उसके साथी तो अंदर ही फंसे हैं। वह हिम्मत करके पिछले गेट के पास पहुंचा। फिर अपने साथियों शिवम, आकाश और सोनी की मदद से अंदर फंसी महिलाओं को बाहर निकाला। इनमें से कई तो डर के मारे बेहोश हो गई थीं।
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इस अग्निकांड में फैक्टरी के अंदर खड़ी अंकित की नई बाइक जल कर कबाड़ हो गई। अंकित ने बताया कि अपनी बाइक का ख्याल तो उसे आग बुझने के बाद ही आया। सुपरवाइजर बाबूलाल का एक्टिवा और खुशहालीपुर निवासी मजदूर की बाइक भी आग की भेंट चढ़ गई। धमाके इतने जोरदार थे कि तीन से चार किमी की दूरी पर स्थित गांवों कुरढीखेडा और खुशहालीपुर तक भी इनकी धमक सुनाई दी।
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लाइन में लगे मजदूरों में मची भगदड़
फैक्टरी में काम करने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं की है। जिस वक्त हादसा हुआ, करीब 150 मजदूर फैक्टरी में प्रवेश कर चुके थे। 100 मजदूर गेट के बाहर लाइन में लगे थे। धमाके होते ही बाहर लाइन में लगे मजदूरों में भगदड़ मच गई। इनमें ऐसे बहुत से मजदूर थे जिनके परिवार के सदस्य अंदर थे।

आग से पिघली पंखों की पंखडियां- फोटो : SAHARANPUR

फैक्ट्री में बारुद के मलबे तले दबे मजदूरों के टिफिन- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर: पटाखा फैक्ट्री के गोदाम की विस्फोट से उड़ी टीन की छत- फोटो : SAHARANPUR