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Saharanpur News: मृत युवक तो लौटा नहीं... अंधविश्वास अब भी जिंदा
Wed, 06 Aug 2025 11:29 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 06 Aug 2025 11:29 PM IST
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गंगोह के सांगाठेडा निवासी सरवर अली का फाइल फोटो
गंगोह। सांगाठेड़ा गांव में बुधवार करंट लगने से सरवर अली (24) की मौत हो गई। चिकित्सकों ने भी मृत घोषित कर दिया, लेकिन परिजनों ने शव को इस उम्मीद के साथ रेत में दबा दिया कि शायद वह जिंदा हो जाए। आधे घंटे तक रेत में दबाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी शुरू की गई। डॉक्टर इसे अंधविश्वास बता रहे हैं।
दरअसल, दोपहर के समय सरवर अली गुड़छप्पर मार्ग स्थित अपने खेत में पानी चलाने गया था। वहां नलकूप के कमरे में जैसे ही उसने स्टार्टर ऑन करने का प्रयास किया, तभी वह करंट की चपेट में आ गया। काफी देर तक पानी न चलने पर उसके चाचा आमिल खेत पर पहुंचे। आवाज देने पर कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने कमरे में झांका तो सरवर जमीन पर पड़ा था। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सरवर तीन बहनों का इकलौता और बड़ा भाई था। करीब चार वर्ष पूर्व उसकी शादी हुई थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं।
मृत घोषित किए जाने के बाद जब शव को घर लाया गया तो किसी ने बताया कि रेत में दबाने से सांस वापस आ सकती है। परिजनों को उम्मीद थी कि शायद अभी प्राण लौट सकते हैं। इसके बाद मृतक का मुंह बाहर रखकर पूरा शरीर रेत में दबा दिया गया। करीब आधे घंटे तक यह कोशिश चली, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। आखिर में इसके बाद शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी आरंभ हुई। कुछ ग्रामीण इसे अंधविश्वास बता रहे हैं।
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दरअसल, दोपहर के समय सरवर अली गुड़छप्पर मार्ग स्थित अपने खेत में पानी चलाने गया था। वहां नलकूप के कमरे में जैसे ही उसने स्टार्टर ऑन करने का प्रयास किया, तभी वह करंट की चपेट में आ गया। काफी देर तक पानी न चलने पर उसके चाचा आमिल खेत पर पहुंचे। आवाज देने पर कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने कमरे में झांका तो सरवर जमीन पर पड़ा था। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सरवर तीन बहनों का इकलौता और बड़ा भाई था। करीब चार वर्ष पूर्व उसकी शादी हुई थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं।
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मृत घोषित किए जाने के बाद जब शव को घर लाया गया तो किसी ने बताया कि रेत में दबाने से सांस वापस आ सकती है। परिजनों को उम्मीद थी कि शायद अभी प्राण लौट सकते हैं। इसके बाद मृतक का मुंह बाहर रखकर पूरा शरीर रेत में दबा दिया गया। करीब आधे घंटे तक यह कोशिश चली, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। आखिर में इसके बाद शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी आरंभ हुई। कुछ ग्रामीण इसे अंधविश्वास बता रहे हैं।
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