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Saharanpur News: चार साल पहले करोड़ों में खरीदी जमीन फिर भी मालिक नहीं बन सका निगम
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सहारनपुर। कचरा प्रबंधन के लिए चार साल पहले करोड़ों रुपये से खरीदी गई जमीन का नगर निगम आज तक मालिक नहीं बन सका है। इसके पीछे संबंधित अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है। पार्षद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में नगर निगम के अधिकारियों ने कहा है कि अभी प्रक्रिया चल रही है।
नगर निगम ने चार साल पहले बेहट रोड स्थित गांव महेश्वरी खुर्द में करीब 10.5 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। जमीन को नगर निगम के नाम कराने की प्रक्रिया पूर्ण हो जानी चाहिए थी, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के चलते राजस्व अभिलेखों में अभी तक नगर निगम का नाम दर्ज नहीं हो सका है।
इसका पता तब चला, जब कार्यकारिणी सदस्य पार्षद मंसूर बदर ने नगर निगम से भूमि के बारे में सवाल पूछ लिया।
नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें लिखित में जवाब दिया है कि जमीन को नाम कराने की प्रक्रिया अभी चल रही है। जल्द ही राजस्व अभिलेखों में नगर निगम का नाम दर्ज करा लिया जाएगा।
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n पहले भी जमीन गंवा चुका है निगम : पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि नगर निगम ने शहर में ही एक बड़ा भूखंड खरीदा था। उक्त भूमि को भी राजस्व अभिलेखों में नगर निगम अपने नाम नहीं करा सका था। कुछ समय बाद मामला कोर्ट में चला गया, जिसमें नगर निगम हार गया और नगर निगम को करीब 25 करोड़ रुपये की भूमि का नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि कोर्ट ने कहा कि जो लगान दे रहा है मालिक वही है।
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नगर निगम ने चार साल पहले बेहट रोड स्थित गांव महेश्वरी खुर्द में करीब 10.5 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। जमीन को नगर निगम के नाम कराने की प्रक्रिया पूर्ण हो जानी चाहिए थी, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के चलते राजस्व अभिलेखों में अभी तक नगर निगम का नाम दर्ज नहीं हो सका है।
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इसका पता तब चला, जब कार्यकारिणी सदस्य पार्षद मंसूर बदर ने नगर निगम से भूमि के बारे में सवाल पूछ लिया।
नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें लिखित में जवाब दिया है कि जमीन को नाम कराने की प्रक्रिया अभी चल रही है। जल्द ही राजस्व अभिलेखों में नगर निगम का नाम दर्ज करा लिया जाएगा।
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n पहले भी जमीन गंवा चुका है निगम : पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि नगर निगम ने शहर में ही एक बड़ा भूखंड खरीदा था। उक्त भूमि को भी राजस्व अभिलेखों में नगर निगम अपने नाम नहीं करा सका था। कुछ समय बाद मामला कोर्ट में चला गया, जिसमें नगर निगम हार गया और नगर निगम को करीब 25 करोड़ रुपये की भूमि का नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि कोर्ट ने कहा कि जो लगान दे रहा है मालिक वही है।