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शाकंभरी विवि में शिक्षकों के अनुबंध की बाध्यता होगी समाप्त

Thu, 15 Sep 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 12:21 AM IST
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The contractual obligation of teachers in Shakambhari University will end
मॉ शाकंभरी विश्व विद्यालय में कार्य समिति की बैठक लेते कुलपति - फोटो : SAHARANPUR
शाकंभरी विवि में शिक्षकों के अनुबंध की बाध्यता होगी समाप्त
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सहारनपुर। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की पहली बैठक बुधवार को विवि परिसर के सभागार में हुई। बैठक में लंबित कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखने, स्ववित्तपोषित योजना के तहत शिक्षकों के तीन एवं पांच साल के अनुबंध की बाध्यता को समाप्त करने सहित कई अन्य मामलों में सहमति बनी।
कार्य परिषद की बैठक पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई, जो दो बजे तक चली। अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर एचएस सिंह ने की। परिषद के 19 में से 17 सदस्यों ने प्रतिभाग किया। बैठक में मुख्य रूप से जिन बिंदुओं पर विचार किया गया उसमें विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित विभिन्न शासनादेशों एवं गजट, विश्वविद्यालय का लोगो, ध्येय वाक्य एवं झंडे का प्रारूप आदि रहे। सात मार्च 2022 और 12 सितंबर 2022 को हुई वित्त समिति की बैठक की संस्तुतियों का अनुमोदन किया गया।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय में लंबित कार्यों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से आउटसोर्सिग के माध्यम से कर्मियों को रखे जाने की भी अनुमति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के प्रथम परिनियमावली, अध्यादेश एवं विनियम बनाने के लिए समिति गठित करने के लिए कुलपति को अधिकृत किया गया। स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत शिक्षकों के तीन साल एवं पांच साल के अनुबंध की बाध्यता को समाप्त करने के संबंध में निर्गत शासन आदेश को स्वीकार किया गया तथा शासनादेश में उल्लिखित बिंदुओं पर कार्यवाही के संबंध में समिति गठित करने के लिए कुलपति को अधिकृत किया गया। गोचर महाविद्यालय, सहारनपुर की कालातीत प्रबंध समिति/ वित्तीय अनियमितता के संबंध में पूर्व विधायक मनोज चौधरी द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर आख्या उपलब्ध कराने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
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एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अर्हता के संबंध में बार काउंसलिंग ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार अनारक्षित श्रेणी के लिए 45 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 42 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति/जनजाति हेतु 40 प्रतिशत अंक (स्नातक स्तर पर) प्राप्त करना अनिवार्य है, जिसे स्वीकार किया गया। इसमें किसी प्रकार का विचलन अनुमन्य नहीं है। विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों को शुरू करने के लिए सिद्धांत सहमति प्रदान की गई।
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