{"_id":"7d6028f98462a679bc6668c377b9478b","slug":"the-attitude-of-the-administration-in-darul-uloom-tension-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दारुल उलूम के तेवर से टेंशन में प्रशासन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दारुल उलूम के तेवर से टेंशन में प्रशासन
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 23 Sep 2015 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत प्रस्तावित मुजफ्फरनगर-सहारनपुर फोरलेन पर धार्मिक स्थलों को शिफ्ट करने के मामले में दारुल उलूम के तल्ख तेवर से अफसर टेंशन में हैं। कारण, देवबंद क्षेत्र में छह धार्मिक स्थलों को शिफ्ट किए बिना फोरलेन का निर्माण संभव नहीं होगा। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी अब इस फोरलेन में रूट को लेकर विकल्प तलाशने की कोशिश में लग गए हैं।
दरअसल, सहारनपुर- मुजफ्फरनगर फोरलेन निर्माण में देवबंद कस्बे में फ्लाईओवर प्रस्तावित है। फ्लाईओवर के बीच में छह धार्मिक स्थल आ रहे हैं। इसमें चार धार्मिक स्थलों की वजह से फोरलेन मामूली रुप से प्रभावित हो रहा है, मगर एक मंदिर और एक मस्जिद फ्लाईओवर के बीच आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अॅथारिटी (उपसा), निर्माण कंपनी और प्रशासन गुपचुप तरीके से इन धार्मिक स्थलों पर सहमति बनाने के लिए प्रयासरत था। इस बीच प्रशासन ने दावा किया था कि धार्मिक स्थलों को शिफ्ट कराने में दारुल उलूम का सकारात्मक रुख है। इसकी भनक लगते ही दारुल उलूम ने प्रशासन के दावों का विरोध किया और साफ कर दिया है कि इस संबंध में कोई बात नहीं हुई है। इतना ही नहीं, किसी धार्मिक स्थल को छेड़ने पर चेतावनी भी दी है। ऐसे में प्रशासन अपने अभियान को लेकर मुश्किल में पड़ गया है।
विज्ञापन
प्रस्तावित रूट पर बिना धार्मिक स्थलों को शिफ्ट किए हुए फ्लाईओवर का निर्माण संभव नहीं होगा। मंगलवार को दारुल उलूम के विरोध के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी योजना में बदलाव किया है। इस मामले के शांत होने तक फ्लाईओवर की बाधाओं पर चर्चा नहीं होगी। इस बीच कस्बे के दोनों तरफ और गागलहेड़ी तक अवैध अतिक्रमण हटाने पर प्रशासन पूरा फोकस करेगा।
आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर सहारनपुर फोरलेन का निर्माण पूरा होने से शहर के यातायात को बड़ी राहत मिलेगी। कारण, गागलहेड़ी मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के चलते वाहन चालक नागल से शहर का रुख करते हैं। इस फोरलेन का निर्माण पूरा होने से देहरादून रोड इससे लिंक हो जाएगी और इसे आउटर रोड के रुप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यही कारण है कि इस फोरलेन को लेकर प्रशासन बेहद गंभीर भी है।
विकल्पों की तलाश में जुटा प्रशासन
प्रशासन इस फोरलेन में फ्लाईओवर निर्माण पर विकल्प भी तलाश रहा है। इस निर्माण से जुड़े इंजीनियर अब धार्मिक स्थलों के पास फ्लाईओवर के नए डिजाइन में लग रहे हैं। हालांकि माना जा रहा है कि विकल्पों की ज्यादा गुंजाइश प्रशासन के पास नहीं है। मगर, इस पूरे मामले में अब उपसा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर विकल्पों की तलाश में जुटेगा।
इस मामले में अभी उपसा के अधिकारियों से बात नहीं हुई है। पूरे मामले की रिपोर्ट मैंने मंगाई है और रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
पवन कुमार, जिलाधिकारी
विज्ञापन
दरअसल, सहारनपुर- मुजफ्फरनगर फोरलेन निर्माण में देवबंद कस्बे में फ्लाईओवर प्रस्तावित है। फ्लाईओवर के बीच में छह धार्मिक स्थल आ रहे हैं। इसमें चार धार्मिक स्थलों की वजह से फोरलेन मामूली रुप से प्रभावित हो रहा है, मगर एक मंदिर और एक मस्जिद फ्लाईओवर के बीच आ रहे हैं।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अॅथारिटी (उपसा), निर्माण कंपनी और प्रशासन गुपचुप तरीके से इन धार्मिक स्थलों पर सहमति बनाने के लिए प्रयासरत था। इस बीच प्रशासन ने दावा किया था कि धार्मिक स्थलों को शिफ्ट कराने में दारुल उलूम का सकारात्मक रुख है। इसकी भनक लगते ही दारुल उलूम ने प्रशासन के दावों का विरोध किया और साफ कर दिया है कि इस संबंध में कोई बात नहीं हुई है। इतना ही नहीं, किसी धार्मिक स्थल को छेड़ने पर चेतावनी भी दी है। ऐसे में प्रशासन अपने अभियान को लेकर मुश्किल में पड़ गया है।
विज्ञापन
प्रस्तावित रूट पर बिना धार्मिक स्थलों को शिफ्ट किए हुए फ्लाईओवर का निर्माण संभव नहीं होगा। मंगलवार को दारुल उलूम के विरोध के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी योजना में बदलाव किया है। इस मामले के शांत होने तक फ्लाईओवर की बाधाओं पर चर्चा नहीं होगी। इस बीच कस्बे के दोनों तरफ और गागलहेड़ी तक अवैध अतिक्रमण हटाने पर प्रशासन पूरा फोकस करेगा।
आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर सहारनपुर फोरलेन का निर्माण पूरा होने से शहर के यातायात को बड़ी राहत मिलेगी। कारण, गागलहेड़ी मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के चलते वाहन चालक नागल से शहर का रुख करते हैं। इस फोरलेन का निर्माण पूरा होने से देहरादून रोड इससे लिंक हो जाएगी और इसे आउटर रोड के रुप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यही कारण है कि इस फोरलेन को लेकर प्रशासन बेहद गंभीर भी है।
विकल्पों की तलाश में जुटा प्रशासन
प्रशासन इस फोरलेन में फ्लाईओवर निर्माण पर विकल्प भी तलाश रहा है। इस निर्माण से जुड़े इंजीनियर अब धार्मिक स्थलों के पास फ्लाईओवर के नए डिजाइन में लग रहे हैं। हालांकि माना जा रहा है कि विकल्पों की ज्यादा गुंजाइश प्रशासन के पास नहीं है। मगर, इस पूरे मामले में अब उपसा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर विकल्पों की तलाश में जुटेगा।
इस मामले में अभी उपसा के अधिकारियों से बात नहीं हुई है। पूरे मामले की रिपोर्ट मैंने मंगाई है और रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
पवन कुमार, जिलाधिकारी