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Saharanpur News: हादसे ने छीने सपने, दिल में दर्द, आंखों में आंसू, दूसरे दिन भी नहीं थमीं सिसकियां

Sun, 30 Nov 2025 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sun, 30 Nov 2025 12:36 AM IST
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The accident took away dreams, pain in the heart, tears in the eyes, the sobs did not stop even on the second day.
छुटमलपुर। सड़क हादसे में पत्नी, बेटा, बेटी, दामाद और मासूम नाती सहित सात परिजनों को खोने वाले महेंद्र सैनी की सिसकियां दूसरे दिन भी थम नहीं रही हैं। आसपास के घरों की महिलाएं पीड़ित परिवार की महिलाओं को ढांढस बंधा रही हैं। दर्द इतना है कि हादसे का नाम लेते ही पीड़ित परिजन सिहर उठते हैं। उनके दिल में दर्द और आंखों में आंसू हैं। महेंद्र रुंधे गले से कहते हैं कि हादसे ने उनके सारे सपने छीन लिए।
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शनिवार को हादसे के दूसरे दिन गांव सोना सैयद माजरा में महेंद्र सैनी के घर सांत्वना देने पहुंचने वालों का दिन भर तांता लगा रहा। महेंद्र के बड़े बेटे प्रदीप की पत्नी कोमल बार-बार बेसुध हुई जा रही थी। उसकी आंखों के आंसू थम नहीं रहे थे। ढांढस बंधाने पहुंचीं महिलाएं उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थीं। परिवार का दामाद शेखर अपनी कार से आया था, जिसे वह यहीं खड़ी करके परिजनों संग मामा की अंत्येष्टि में शामिल होने जा रहा था कि पत्नी जूली और मासूम बेटे सहित मौत का शिकार हो गया। उनकी कार को देखकर ससुर महेंद्र बार-बार सिसक पड़ते हैं। बोलते हैं इसे तो कोई चलाने वाला भी घर में नहीं बचा है। केवल पांच साल का नाती अभिनंदन घर पर अपनी दादी सुशीला के पास है। सुशीला भी बीमार है। चलने फिरने में भी दिक्कत है। महेंद्र ने बताया कि उसकी बेटी, दामाद और नाती की रस्म पगड़ी रविवार (आज) छांगामजरी में कर दी जाएगी। आखिर वहां अब कौन बचा, जो 11 या 13 दिन तक धार्मिक रीति रिवाज पूरे करे।
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इस दौरान पीड़ित परिवार के अन्य लोगों का दर्द जुबां पर आया तो बस इतना ही बोले कि हमारे तो चले गए, हमें किसी से कोई शिकायत नहीं। प्रशासन बस आश्रितों को आर्थिक मदद दिला दे। शेखर और जूली के अनाथ हुए बेटे अभिनंदन की परवरिश और उसके भविष्य की चिंता भी रिश्तेदारों के चेहरों पर साफ दिख रही थी।
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