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दो दिन में कैसे होगा शुष्क पोषाहार का शत-प्रतिशत वितरण
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दावा दो दिन में शुष्क पोषाहार बांटने का लक्ष्य, चार विकास खंड में नहीं तैयारी
सहारनपुर। कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण बचाने के लिए शुष्क पोषहार दो दिन में शत-प्रतिशत बांटने का लक्ष्य है। लेकिन जिले के 11 विकासखंडों में चार में नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। ऐसे में दो दिन में शत-प्रतिशत पोषाहार बांटने का लक्ष्य को पाना मुश्किल है।
स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मिले और नए स्वयं सहायता समूह बने, इसके लिए शासन ने शुष्क पोषाहार बनाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। इनके द्वारा कोटेदार से गेहूं व चावल और बाजार से दाल खरीदकर शुष्क पोषाहार तैयार किया गया है। यह समूह पुष्टाहार एवं बाल विकास विभाग को शुष्क पोषाहार के पैकेट तैयार कर दे रहे हैं। जिले में अब तक शहर सहित सात विकासखंडों में 65 प्रतिशत ही वितरित हुआ है, जबकि दो दिन के अंदर शत-प्रतिशत पोषाहार के वितरण किया जाना है, लेकिन नानौता, रामपुर मनिहारान, नकुड़, गंगोह में अभी नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं पाए है। ऐसे में दो दिन में शुष्क पोषाहार कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक नहीं पहुंच पाएगा। वर्तमान में जनपद में कुपोषित बच्चों की संख्या 21 हजार के करीब और गर्भवती महिलाओं की संख्या 27 हजार है।
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कम तो हुआ, पर नहीं खत्म हो सका कुपोषण
वर्ष----कुपोषित ----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
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जिले में शुष्क पोषाहार वितरित किया जा रहा है। दो दिन में लक्ष्य को पूरा करना है। सात ब्लॉकों में स्वयं सहायता समूह क्रियाशील है और बाकी बचे चार विकासखंड़ों में संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर नए स्वयं सहायता समूहों को क्रियाशील किए जा रहे है।
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-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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सहारनपुर। कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण बचाने के लिए शुष्क पोषहार दो दिन में शत-प्रतिशत बांटने का लक्ष्य है। लेकिन जिले के 11 विकासखंडों में चार में नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। ऐसे में दो दिन में शत-प्रतिशत पोषाहार बांटने का लक्ष्य को पाना मुश्किल है।
स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मिले और नए स्वयं सहायता समूह बने, इसके लिए शासन ने शुष्क पोषाहार बनाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। इनके द्वारा कोटेदार से गेहूं व चावल और बाजार से दाल खरीदकर शुष्क पोषाहार तैयार किया गया है। यह समूह पुष्टाहार एवं बाल विकास विभाग को शुष्क पोषाहार के पैकेट तैयार कर दे रहे हैं। जिले में अब तक शहर सहित सात विकासखंडों में 65 प्रतिशत ही वितरित हुआ है, जबकि दो दिन के अंदर शत-प्रतिशत पोषाहार के वितरण किया जाना है, लेकिन नानौता, रामपुर मनिहारान, नकुड़, गंगोह में अभी नए स्वयं सहायता समूह क्रियाशील नहीं पाए है। ऐसे में दो दिन में शुष्क पोषाहार कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक नहीं पहुंच पाएगा। वर्तमान में जनपद में कुपोषित बच्चों की संख्या 21 हजार के करीब और गर्भवती महिलाओं की संख्या 27 हजार है।
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कम तो हुआ, पर नहीं खत्म हो सका कुपोषण
वर्ष----कुपोषित ----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
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जिले में शुष्क पोषाहार वितरित किया जा रहा है। दो दिन में लक्ष्य को पूरा करना है। सात ब्लॉकों में स्वयं सहायता समूह क्रियाशील है और बाकी बचे चार विकासखंड़ों में संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर नए स्वयं सहायता समूहों को क्रियाशील किए जा रहे है।
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-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी