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देख लो पुलिस चौकियों का हाल

Sun, 21 Aug 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 21 Aug 2016 12:19 AM IST
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Take a look at the recent police checkpoints
खाली पड़ी पुलिस चौकी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में पुलिस कप्तान बदलने के बाद भी जनपद में पुलिस के काम करने के तरीके में बदलाव नहीं आया है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को शहर की चौकियों का हाल जानने का प्रयास किया।
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चौकियों पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी की जगह ताले लटके नजर आए। कई जगहों पर खाली कुर्सियों पड़ी मिलीं। यदि पीड़ित शिकायत करने जाए तो कहां जाए? ऐसी स्थिति में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए व्यवस्था में सुधार के पुलिस के दावे फेल नजर आ रहे हैं। 
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शनिवार को अमर उजाला की टीम शाम चार बजे मल्हीपुर रोड स्थित आवास विकास चौकी पहुंची। यहां चौकी पर ताला लगा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि चौकी अक्सर बंद ही रहती है। रात में भी पुलिसकर्मी यहां नहीं मिलते।
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ऐसे में यदि कोई वारदात हो जाए तो या तो 100 नंबर डायल करना पड़ता है। करीब 4:10 बजे टीम मल्हीपुर रोड स्थित देहात कोतवाली की रामनगर चौकी पहुंची। यहां भी कोई नहीं मिला।

यह स्थिति तब है, जबकि मल्हीपुर रोड काफी संवेदनशील माना जाता है। इस रोड पर बदमाश वारदातों को अंजाम देकर अक्सर बच निकलते हैं। करीब तीन महीने पहले एक कॉलोनाइजर से बदमाश स्कूटी लूटकर भागे थे, जिसमें दो लाख रुपये भी रखे थे।

पुलिस आज तक बदमाशों का पता तक नहीं लगा सकी है। इसके बाद टीम बजे सिविल लाइंस चौकी पहुंची। यहां तिराहे पर काफी ट्रैफिक रहता है। यहां ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए भी पुलिसकर्मी की जरूरत रहती है।

मगर शाम करीब 4:20 बजे यहां कोई पुलिसकर्मी नहीं मिला। शाम 4:23 बजे पार्श्वनाथ प्लाजा के बाहर बनी चौकी भी खाली थी। जबकि इस चौकी पर पूरे चंद्रनगर, मिशन कंपाउंड, गिल कॉलोनी, अहमद बाग समेत अनेक क्षेत्रों की जिम्मेदारी है।

इसके बाद टीम शाम करीब 4:28 बजे घंटाघर चौकी पहुंची, यहां केवल एक सिपाही बैठा मिला। यहां से टीम जोगियान पुल स्थिति चौकी पहुंची, जो खाली मिली। सवाल यह है कि यदि दिन में ही चौकियों का यह हाल है तो रात में क्या होगा।


ऐसे में पुलिस अफसरों के व्यवस्था में सुधार के दावे फेल साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि अपराध कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं, जो पुलिस के लिए चुनौती और आम आदमी के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं।  
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