फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Superstition or curse...it became a curse for two villages

Saharanpur News: अंधविश्वास या श्राप...दो गांवों के लिए बन गया अभिशाप

Sun, 17 Sep 2023 01:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Sep 2023 01:09 AM IST
विज्ञापन
Superstition or curse...it became a curse for two villages
-आज भी कातला के लोग नहीं पीते पड़ोसी गांव सिसौनी का पानी
विज्ञापन

-मान्यता है कि पति की हत्या के बाद सती हुई महिला ने दिया था श्राप
- तभी से दोनों गांव के लोग आपस में रिश्ते भी तय नहीं करते
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़गांव। भले ही हम आधुनिक दौर में जी रहे हों, लेकिन आज भी दो गांवों में बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई परंपरा को बखूबी निभाया जा रहा है। बड़गांव क्षेत्र में गांव कातला के लोग सिसौनी का खाना खाना तो दूर की बात गांव की सीमा का पानी तक नहीं पीते हैं। इसी परंपरा के चलते दोनों गांवों के लोगों में आपस में रिश्ते तक नहीं होते हैं। पति की हत्या के बाद सती हुई महिला के श्राप के कारण इन गांवों के बाशिंदे सैकड़ों सालों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।

बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल के समय से चली आ रही है। उस वक्त सिसौनी गांव की एक लड़की की शादी कातला गांव में हुई थी। कातला गांव निवासी दामाद सिसौनी गांव के जंगल में हर रोज गाय, बकरी, भेड़ चराने के लिए जाया करता था। यह बात सिसौनी निवासी ससुरालियों को अच्छी नहीं लगती थी। ससुराल के लोगों ने युवक को मना किया, लेकिन वह नहीं माना। इस पर उन्होंने एक दिन कातला निवासी अपने दामाद की पीट-पीट कर हत्या कर दी, जब यह बात मायके में मौजूद उनकी बेटी को पता चली तो वह अकेली जंगल में पहुंची और रोते बिलखते अपने पति के शव को लेकर कातला के लिए चली। रास्ते में खुदाबक्सपुर माजरा व बड़गांव के बीच वह अपने पति के साथ सती हो गई।
विज्ञापन

बताया जाता है कि सती होने से पहले उसने श्राप दिया कि यदि कातला के लोगों ने सिसौनी गांव में खाना तो दूर पानी तक भी पिया तो विक्षिप्त हो जाएंगे। वहीं सिसौनी गांव के लोगों को परिवार में एक बच्चा पैदा होने का श्राप दिया था। सिसौनी गांव में तो कई पीढि़यों तक परिवारों में एक ही संतान हुई। हालांकि बाद में यह रीत टूट गई। परंतु कातला गांव के लोग परंपरा को निभा रहे हैं। दोनों गांवों के लोगों में आपसी प्यार भी बहुत है, लेकिन वे आपस में रिश्ते भी नहीं करते हैं। खुदाबक्सपुर माजरा और बड़गांव के बीच जहां महिला सती हुई थी। वहां आज भी क्षेत्र के 12 गांवों में शादी होने के बाद नवविवाहिता जोड़ा सती माता का आशीर्वाद लेने पहुंचता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कातला के पूर्व प्रधान ठा. सुखपाल सिंह का कहना है कि पुरखों के वक्त से यह विश्वास चला आ रहा है कि किसी ने इस परंपरा को तोड़ा तो दिक्कत होगी। उन्होंने भी अपने जीवन में कभी सिसौनी का पानी नहीं पिया।
सिसौनी के पूर्व प्रधान सतपाल सिंह ने बताया कि भले ही इसे अंधविश्वास माना जाए, लेकिन यह परंपरा एक सच्ची घटना के बाद पड़ी है। भले ही आक्रोश की प्रतिक्रियास्वरूप इस परंपरा का जन्म हुआ हो।


------------------------------

सिसौनी के दुकानदार से सामान तक नहीं लेते

बड़गांव में लगने वाले पैठ बाजार में सिसौनी के दुकानदार तक से सब्जी या अन्य सामान कातला के लोग नहीं लेते हैं। यदि गलती से सामान खरीद लें और बाद में पता चले कि यह सिसौनी गांव का दुकानदार था तो उसे सामान वापस कर अपने पैसे ले जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed