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गन्ना तो खेत्तों में खड़ा, पपलर लेण वाला कोई नी

Tue, 24 Nov 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 24 Nov 2015 12:25 AM IST
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Sugarcane standing in the field, no ni Len Pplr
राहुल जी..., किसान्नों की हालत ण पूच्छो। गन्ना तो खेत्तों में ही खड़ा, अर पपलर लेण वाला कोई नी। कई मिलों पै ताले लग लिए अर जो बची वो बी इब तक नहीं चली। अब किसान जावै तो जावै कहां। कुछ इसी अंदाज में एक-एक कर किसानों ने अपने दिल का दर्द राहुल गांधी के साथ संवाद में पेश किया। हालांकि काफी संख्या में ऐसे किसान और मजदूर भी रहे जो अपनी बात बताना तो दूर उनकी झलक तक नहीं पा सके।
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हरडाखेड़ी में ग्राम प्रधान मुर्सीदा के पति मारूफ, तालिब, सगीर सहित अन्य किसानों ने गन्ना, पापुलर और धान की खेती से जुड़ी समस्याओं पर सबसे अधिक सवाल किए। राहुल के सामने किसान बोले कि पहले गन्ने के बकाया भुगतान के लिए रोते रहे तो अब तब गन्ना खेतों में ही खड़ा हुआ है। चीनी मिलें अब तक नहीं चली हैं। गन्ने के नुकसान की भरपाई पहले पापुलर की खेती से हो जाती थी, लेकिन अब इस खेती में भी किसान रो रहे हैं। पापुलर के दाम अब पहले से आधे हो गए हैं। धान की प्रमुख फसल पर किसान बोले कि अब तक इस फसल का उचित एमएसपी तय नहीं किया गया है। पहले गेहूं ओलों में बरबाद हो गया था। अब किसानों का धान कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। कई केंद्रों पर तो धान की खरीद करने तक से परहेज किया जा रहा है।
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किसानों के 75 फीसदी बेटे अब खेती करने को तैयार नहीं
हरडाखेड़ी के बाद सीकरी कलां में राहुल गांधी से संवाद के दौरान किसानों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। सीकरी कलां में किसान रजेश ने भूमि अधिग्रहण बिल पारित न होने देने पर राहुल गांधी का आभार जताया। फिर कहा कि पिलखनी-देहरादून के लिए रेलवे ने सर्वे किया था। किसानों के खेतों के बीच से शायद रेलवे लाइन जाएगी। इसके लिए तो वे तैयार हैं, लेकिन इसके बदले किसानों को मिलेगा क्या। हकीकत तो यह है कि किसानों के 75 फीसदी बेटे तो अब खेती ही नहीं करना चाहते। इसलिए केंद्र पर दबाव बनाकर किसानों का हाल सुधारा जाए।
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एक लाख में बिजली कनेक्शन, मगर चार घंटे बिजली नहीं
- सीकरी के किसान चौधरी सुखबीर सिंह ने कहा कि पूर्वी यमुना नहर से सिंचाई की जरूरत का पानी नहीं मिलता। नलकूप के लिए बिजली का कनेक्शन तो एक लाख में मिलता है ,लेकिन बिजली तीन-चार घंटे ही मिलती है।
- किसान पुनीत ने किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी समस्या रखी। उन्होंने कहा कि इस कार्ड से मिलने वाले लोन पर पांच साल तक सिर्फ ब्याज वसूली की जाए। पूरा ऋण वसूल करने से किसान और कर्ज में चला जाता है।

पापुलर के रेट तो क्या नपाई के तरीके में भी लुट रहे
- किसान चौधरी बालेंद्र सिंह नुनियारी ने कहा कि पोपलर के रेट तो पहले ही बहुत कम हो गए हैं, लेकिन अब मंडी में पापुलर की नपाई का तरीका भी बदल गया है। इसलिए पापुलर के रेट तो क्या नपाई के तरीके में भी किसान लुट रहे हैं। नए तरीके से पोपलर का वजन अंडरवेट बताया जाता है।


फसल की बड़ी लागत से हुए परेशान
- किसान लोमेश ने कहा कि डीएपी खाद पहले 400 रुपये तक में मिल जाता था। अब इसके लिए भी 1200 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। गन्ने की मैली पर भी दलाल बैठे हैं। फसलों की भारी लागत से खेती करना मुश्किल हो रहा है।
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