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आज फायदा लेकिन कल घाटे का सौदा न बन जाए गन्ना प्रजातडि सीओ 023

Fri, 08 Nov 2019 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Nov 2019 11:30 PM IST
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Sugarcane species CO 0238 should not become a loss deal tomorrow
Sugarcane species CO 0238 should not become a loss deal tomorrow
सहारनपुर। अच्छी पैदावार देने वाली अगेती गन्ने की प्रजाति सीओ 0238 में यदि कोई रोग लगा तो जनपद के किसानों का खासा नुकसान पहुंच सकती है। जिले में इस प्रजाति के गन्ने का रकबा 89.13 प्रतिशत है। इससे साफ है कि जनपद के किसान इस प्रजाति पर निर्भर हैं। गन्ना विभाग किसानों को कई प्रजातियों की खेती करने के लिए समय समय पर जागरूक करता रहा है।
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बढ़िया उत्पादन और अच्छी शुगर रिकवरी देने वाली गन्ने की प्रजाति सीओ 0238 न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद हैं बल्कि चीनी मिलों के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है। इसके चलते किसान लगभग एक तरफा इस प्रजाति की खेती कर रहे हैं। जनपद में गन्ने का क्षेत्रफल 100383 हेक्टेयर है। इसमें से 89474 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सीओ 0238 प्रजाति के गन्ने की खेती हो रही है। जो कुल रकबे का 89.13 प्रतिशत बैठता है। लेकिन यदि इस प्रजाति में रोग लगा तो किसानों को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे पहले भी गन्ने की कई प्रजातियां खत्म हो चुकी हैं। गन्ना विकास निरीक्षक डॉक्टर यशपाल सिंह ने बताया कि सीओ 0238 में पोक्का बोईंग, रेटरॉट, ग्रासी शूट डिजीज आदि रोगों के होने की आशंका सर्वाधिक है। पूर्वांचल के कुछ जिलों में इसके प्रकोप से नुकसान भी हुआ है। किसानों को सीओ 0238 के अलावा सीओ 0118, 98014, 8272 आदि अगेती प्रजातियों को भी अपनाना चाहिए।
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जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि किसानों को कभी भी गन्ने की किसी एक प्रजाति के भरोसे नहीं रहना चाहिए। क्योंकि यदि कभी उस प्रजाति पर रोगों का अधिक प्रकोप बढ़ा तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए किसानों को सीओ 0238 के साथ ही अन्य अगेती प्रजातियों की बुआई करने के लिए भी समय समय पर जागरूक किया जाता है। अधिक मिठास होने के चलते इस प्रजाति में कीटों और रोगों का प्रकोप भी अन्य की अपेक्षा अधिक होता है।
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बीज शोधन कर करें गन्ना बुआई
डीसीओ ने बताया कि बीज शोधन करके बुआई करने से गन्ने की प्रजाति की उम्र को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीज को एमएचएटी-मॉस्चर हीट एयर ट्रीटमेंट से शोधित करके ही बुआई करनी चाहिए। इससे गन्ने के रेडरॉट, जीएसडी आदि रोग से बचाव हो सकता है। इसमें गन्ने के टुकड़ों को 52 डिग्री सेल्सियस पर भाप की ओर से शोधित किया जाता है। सभी शुगर मिलों में इसकी सुविधा निशुल्क उपलब्ध है।
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