फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   student caught in the trap of College's breakup

कॉलेजों के गोलमाल के चक्रव्यूह में फंस गए छात्र

Thu, 04 Aug 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Thu, 04 Aug 2016 12:40 AM IST
विज्ञापन
कॉलेेजों द्वारा किए गए गोलमाल के चक्रव्यूह में छात्रों को भविष्य फंस गया है। समाज कल्याण निदेशालय द्वारा 21 कॉलेजों को काली सूची में डाले जाने से इन कॉलेजों के उन गरीब छात्रों की पढ़ाई तो बीच में ही छूट जाएगी जो सिर्फ शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के भरोसे ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अगले पांच साल तक इन कॉलेजों को कोई सहायता मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
विज्ञापन


शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के घोटाले में फंसे 21 कॉलेजों को समाज कल्याण निदेशालय द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इन कॉलेजों में लगभग 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं।
विज्ञापन


निदेशालय की इस कार्रवाई से इन कॉलेजों में पढ़ रहे हजारों गरीब छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। हजारों ऐसे गरीब छात्र-छात्राएं हैं, जो केवल वजीफे के बल पर ही  पढ़ाईं कर रहे हैं। नियमानुसार इन कॉलेजों को पांच साल तक शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति नहीं दी जाएगी। जबकि कॉलेज अपनी फीस छात्रों से इसी शर्त पर जमा कराते हैं कि उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति मिल जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कई छात्र तो ऐसे हैं जिन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर कॉलेेजों की भारी भरकम फीस सिर्फ इसी उम्मीद में चुकाई कि उन्हें बाद में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिल जाएगी लेकिन 21 कॉलेजों पर ब्लैकलिस्टेड का ठप्पा लगने के बाद इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हालांकि कुछ कॉलेज हाईकोर्ट में अपील कर बचने का प्रयास कर रहे हैं। 

मिलेनियम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चेयरमैन संजीव अरोड़ एवं सहारनपुर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज के सचिव जुबेर आलम ने दावा किया कि कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। हालांकि अभी तक कोर्ट का कोई आदेश नहीं है। 

शासन से राहत पर संशय 
कॉलेजों के घपले में फंसे छात्रों को शासन से फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कालेजों द्वारा लगातार छात्रों को आश्वासन दिया जा रहा है कि उनका कॉलेज काली सूची से बाहर आ जाएगा। वह पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन शासन से राहत नहीं मिली तो छात्रों के लिए परेशानी हो जाएगी।


पांच साल तक नहीं मिलेगा वजीफा
प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी यश वर्मा का कहना है कि निदेशालय के नियमानुसार पांच साल तक काली सूची में शामिल कॉलेजों और छात्रों को कोई सरकारी लाभ नहीं मिल सकेगा। फिर भी निदेशालय से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे उनका पालन कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed