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रणनीति... राजनीतिक दलों को छोड़ना नहीं, किसानों को रोकना नहीं
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रणनीति... राजनीतिक दलों को छोड़ना नहीं, किसानों को रोकना नहीं
सोमवार रात ही प्रशासन ने बना ली थी योजना, काफी हद तक मिली कामयाबी
सहारनपुर। भारत बंद को लेकर एक तरफ राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनाई थी तो दूसरी तरफ प्रशासन भी तैयार था। सियासी लोगों को किसानों का समर्थन करते हुए प्रदर्शन करना था तो प्रशासन को निषेधाज्ञा का पालन करते हुए इन्हें रोकना था। नेताओं को नजरबंद कर प्रशासन अपनी रणनीति में कामयाब नजर आया और कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं होने दिया। हालांकि राजनीतिक लोगों ने विरोध करने से रोकने को लोकतंत्र का हनन बताया।
पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने सोमवार रात में ही रणनीति बना ली थी कि जिन राजनीतिक दलों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए प्रदर्शन करने का एलान किया है, उन्हें घरों से बाहर ही ना निकलने दिया जाए। इसी के चलते सपा, रालोद, कांग्रेस और बसपा नेताओं के घरों पर पुलिस का पहरा बैठाने के लिए प्लानिंग कर ली थी। मंगलवार सुबह नेताओं के घर के दरवाजे पर पुलिस पहुंच चुकी थी। इसके बाद नेताओं ने प्रदर्शन करने के लिए अपने घरों से निकलने की कोशिशें तो खूब कीं, लेकिन पुलिस और पीएसी के जवानों की मौजूदगी ने उनको आगे नहीं बढ़ने दिया। कांग्रेस और सपा ने इसमें अलग ही रणनीति अपनाई और अलग अलग जगहों से जत्थों में निकले, लेकिन यह सभी नेता पहले से प्रशासन की नजर में थे। जैसे ही वह घरों से निकलकर समर्थकों के साथ प्रदर्शन करने को निकले तो पुलिस ने रोक लिया। सहारनपुर शहर में ऐसा एक दर्जन से ज्यादा जगह हुआ, जहां सपा और कांग्रेस नेताओं ने बाहर निकलकर प्रदर्शन करने की कोशिश की और पुलिस ने रोक दिया।
उधर, भाकियू ने गागलहेड़ी, रामपुर मनिहारान, नागल और शाहजहांपुर में हाईवे पर धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किया, लेकिन उन्हें पुलिस प्रशासन ने रोकने का प्रयास नहीं किया। प्रशासन की इस रणनीति से साफ था कि राजनीतिक लोगों को रोकना है, किसानों को नहीं। यदि किसानों को रोकने की कोशिश की जातीं तो मामला बिगड़ सकता था और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती थी।
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सोमवार रात ही प्रशासन ने बना ली थी योजना, काफी हद तक मिली कामयाबी
सहारनपुर। भारत बंद को लेकर एक तरफ राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनाई थी तो दूसरी तरफ प्रशासन भी तैयार था। सियासी लोगों को किसानों का समर्थन करते हुए प्रदर्शन करना था तो प्रशासन को निषेधाज्ञा का पालन करते हुए इन्हें रोकना था। नेताओं को नजरबंद कर प्रशासन अपनी रणनीति में कामयाब नजर आया और कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं होने दिया। हालांकि राजनीतिक लोगों ने विरोध करने से रोकने को लोकतंत्र का हनन बताया।
पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने सोमवार रात में ही रणनीति बना ली थी कि जिन राजनीतिक दलों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए प्रदर्शन करने का एलान किया है, उन्हें घरों से बाहर ही ना निकलने दिया जाए। इसी के चलते सपा, रालोद, कांग्रेस और बसपा नेताओं के घरों पर पुलिस का पहरा बैठाने के लिए प्लानिंग कर ली थी। मंगलवार सुबह नेताओं के घर के दरवाजे पर पुलिस पहुंच चुकी थी। इसके बाद नेताओं ने प्रदर्शन करने के लिए अपने घरों से निकलने की कोशिशें तो खूब कीं, लेकिन पुलिस और पीएसी के जवानों की मौजूदगी ने उनको आगे नहीं बढ़ने दिया। कांग्रेस और सपा ने इसमें अलग ही रणनीति अपनाई और अलग अलग जगहों से जत्थों में निकले, लेकिन यह सभी नेता पहले से प्रशासन की नजर में थे। जैसे ही वह घरों से निकलकर समर्थकों के साथ प्रदर्शन करने को निकले तो पुलिस ने रोक लिया। सहारनपुर शहर में ऐसा एक दर्जन से ज्यादा जगह हुआ, जहां सपा और कांग्रेस नेताओं ने बाहर निकलकर प्रदर्शन करने की कोशिश की और पुलिस ने रोक दिया।
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उधर, भाकियू ने गागलहेड़ी, रामपुर मनिहारान, नागल और शाहजहांपुर में हाईवे पर धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किया, लेकिन उन्हें पुलिस प्रशासन ने रोकने का प्रयास नहीं किया। प्रशासन की इस रणनीति से साफ था कि राजनीतिक लोगों को रोकना है, किसानों को नहीं। यदि किसानों को रोकने की कोशिश की जातीं तो मामला बिगड़ सकता था और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती थी।
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