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बादशाहपुर में बनने वाले एसटीपी से सुधरेगी नदियों की हालत
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सहारनपुर। बदशाहपुर में बनने वाले 90 एमएलडी के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से न केवल शहर के नालों और सीवर का पानी साफ होगा, बल्कि पांवधोई, ढमोला, हिंडन और यमुना को भी नया जीवन मिलेगा। एसटीपी का निर्माण जल निगम कराएगा। नगर निगम जल निगम को 100 बीघा जमीन मुहैया कराएगा।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत सहारनपुर शहर में 90 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) के एसटीपी को स्वीकृति मिली है। एसटीपी के लिए 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए, जो नगर निगम तलाशकर देगा। नगर निगम ने मल्हीपुर रोड पर बादशाहपुर (रामनगर) के पास जमीन देखी है। यह जमीन ढमोला नदी के काफी नजदीक है। इस एसटीपी से शहर भर के नालों और सीवर को जोड़ा जाएगा। नालों और सीवर का पानी एसटीपी के जरिए साफ होकर ढमोला में छोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि एसटीपी बनने के बाद एक नहीं, बल्कि चार नदियों में सुधार होगा, जिसमें पांवधोई नदी, ढमोला नदी, हिंडन नदी और यमुना नदी शामिल है। गौरतलब है कि शहर के तमाम सीवर और नाले पांवधोई और ढमोला नदी में सीधे डाले जा रहे हैं, जिनकी वजह से दोनों नदियों का पानी दूषित हो रहा है। दोनों नदियों का पानी हिंडन और हिंडन से यमुना नदी में जाता है। ऐसे में सीधे तौर पर एसटीपी का असर इन नदियों पर दिखेगा।
शहर में नौ आईपीएस बनेंगे
एसटीपी तक सीवर और नालों का पानी पहुंचाने के लिए शहर में नौ आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) बनेंगे। इनके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। फिलहाल शहर में तीन आईपीएस पहले से बने हुए हैं, जिनमें राकेश टाकिज, दालमंडी पुल के आईपीएस शामिल हैं।
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एसटीपी के लिए सरकारी जमीन नहीं है। ऐसे में जमीन खरीदने के लिए मल्हीपुर क्षेत्र के किसानों से बात की जा रही है। कई किसानों से सहमति पत्र लिए गए हैं। कोशिश यही है कि जल्द से जल्द जमीन फाइनल कर जल निगम के हेंडओवर की जाए, जिससे एसटीपी पर काम शुरू हो सके। - अमरनाथ श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जलकल, नगर निगम।
नगर निगम के द्वारा जमीन की तलाश की जा रही है। जैसे ही जमीन जल निगम को मिल जाएगी तो हम आगे की कार्रवाई करेंगे। डीपीआर बनाने का काम भी जमीन मिलने के बाद ही शुरू होगा। -- वेदपाल सिंह, एई, जल निगम।
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केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत सहारनपुर शहर में 90 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) के एसटीपी को स्वीकृति मिली है। एसटीपी के लिए 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए, जो नगर निगम तलाशकर देगा। नगर निगम ने मल्हीपुर रोड पर बादशाहपुर (रामनगर) के पास जमीन देखी है। यह जमीन ढमोला नदी के काफी नजदीक है। इस एसटीपी से शहर भर के नालों और सीवर को जोड़ा जाएगा। नालों और सीवर का पानी एसटीपी के जरिए साफ होकर ढमोला में छोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि एसटीपी बनने के बाद एक नहीं, बल्कि चार नदियों में सुधार होगा, जिसमें पांवधोई नदी, ढमोला नदी, हिंडन नदी और यमुना नदी शामिल है। गौरतलब है कि शहर के तमाम सीवर और नाले पांवधोई और ढमोला नदी में सीधे डाले जा रहे हैं, जिनकी वजह से दोनों नदियों का पानी दूषित हो रहा है। दोनों नदियों का पानी हिंडन और हिंडन से यमुना नदी में जाता है। ऐसे में सीधे तौर पर एसटीपी का असर इन नदियों पर दिखेगा।
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शहर में नौ आईपीएस बनेंगे
एसटीपी तक सीवर और नालों का पानी पहुंचाने के लिए शहर में नौ आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) बनेंगे। इनके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। फिलहाल शहर में तीन आईपीएस पहले से बने हुए हैं, जिनमें राकेश टाकिज, दालमंडी पुल के आईपीएस शामिल हैं।
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एसटीपी के लिए सरकारी जमीन नहीं है। ऐसे में जमीन खरीदने के लिए मल्हीपुर क्षेत्र के किसानों से बात की जा रही है। कई किसानों से सहमति पत्र लिए गए हैं। कोशिश यही है कि जल्द से जल्द जमीन फाइनल कर जल निगम के हेंडओवर की जाए, जिससे एसटीपी पर काम शुरू हो सके। - अमरनाथ श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जलकल, नगर निगम।
नगर निगम के द्वारा जमीन की तलाश की जा रही है। जैसे ही जमीन जल निगम को मिल जाएगी तो हम आगे की कार्रवाई करेंगे। डीपीआर बनाने का काम भी जमीन मिलने के बाद ही शुरू होगा। -- वेदपाल सिंह, एई, जल निगम।