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अंतिम संस्कार करने से रोका, तनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:55 PM IST
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ग्रामीणों को सिजरा दिखाते नायब तहसीलदार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर के बेहट में शव का अंतिम संस्कार करने से रोकने पर गांव मरवा एवं भोजपुर के दो समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस और नायब तहसीलदार राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
नायब तहसीलदार ने एक पक्ष के लोगों को समझाकर शव का अंतिम संस्कार कराया और आश्वासन दिया कि वह इस विवाद का स्थाई समाधान करेंगे। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान मरवा एवं हलका लेखपाल को ग्राम समाज की भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए, ताकि बाल्मीकि समाज के लोगों को श्मशान की भूमि आवंटित की जा सके।
मरवा गांव की बाल्मीकि बस्ती के लोग चेंची रजवाहे के किनारे एक भूमि में अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। पिछले दो साल से उक्त भूमि पर अंतिम संस्कार करने को लेकर पास के गांव भोजपुर के मुस्लिम समुदाय के फुरकान और उसके भाई विरोध कर रहे हैं।
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उनका कहना है, उक्त भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है। यह भूमि राजस्व रिकार्ड में भी उनके नाम दर्ज है। उधर मरवा गांव के बाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है, कि उनके पूर्वजों के जमाने से उक्त भूमि पर ही अंतिम संस्कार होता आ रहा है।
दो साल से चला आ रहा, यह विवाद बृहस्पतिवार को उस समय फिर तूल पकड़ गया, जब गांव मरवा के बाल्मीकि समाज के ऋषिपाल (60) की मौत हो गई। बाल्मीकि समाज के लोग मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए विवादित जगह पर पहुंचे,
तो गांव भोजपुर निवासी फुरकान और उसके भाई मौके पर पहुंच गए और उन्होंने अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। इससे तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार नितिन तेवतिया राजस्व टीम एवं कोतवाली पुलिस को साथ लेकर मौके पर पहुंचे और उन्होंने दोनों पक्षों के सामने सजरा खंगाला, जिसमें उक्त भूमि में श्मशान दर्ज नहीं था।
इस पर नायब तहसीलदार ने फुरकान आदि को समझाकर शव का अंतिम संस्कार करा दिया और ईद के त्योहार के बाद दोनों पक्षों को तहसील बुलाया। उन्होंने मरवा के ग्राम प्रधान एवं हलका लेखपाल को निर्देश दिए कि ग्राम समाज की भूमि चिह्नित कर उन्हें रिपोर्ट दें, ताकि बाल्मीकि समाज के लोगों को श्मशान की भूमि आवंटित की जा सके।
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नायब तहसीलदार ने एक पक्ष के लोगों को समझाकर शव का अंतिम संस्कार कराया और आश्वासन दिया कि वह इस विवाद का स्थाई समाधान करेंगे। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान मरवा एवं हलका लेखपाल को ग्राम समाज की भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए, ताकि बाल्मीकि समाज के लोगों को श्मशान की भूमि आवंटित की जा सके।
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मरवा गांव की बाल्मीकि बस्ती के लोग चेंची रजवाहे के किनारे एक भूमि में अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। पिछले दो साल से उक्त भूमि पर अंतिम संस्कार करने को लेकर पास के गांव भोजपुर के मुस्लिम समुदाय के फुरकान और उसके भाई विरोध कर रहे हैं।
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उनका कहना है, उक्त भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है। यह भूमि राजस्व रिकार्ड में भी उनके नाम दर्ज है। उधर मरवा गांव के बाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है, कि उनके पूर्वजों के जमाने से उक्त भूमि पर ही अंतिम संस्कार होता आ रहा है।
दो साल से चला आ रहा, यह विवाद बृहस्पतिवार को उस समय फिर तूल पकड़ गया, जब गांव मरवा के बाल्मीकि समाज के ऋषिपाल (60) की मौत हो गई। बाल्मीकि समाज के लोग मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए विवादित जगह पर पहुंचे,
तो गांव भोजपुर निवासी फुरकान और उसके भाई मौके पर पहुंच गए और उन्होंने अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। इससे तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार नितिन तेवतिया राजस्व टीम एवं कोतवाली पुलिस को साथ लेकर मौके पर पहुंचे और उन्होंने दोनों पक्षों के सामने सजरा खंगाला, जिसमें उक्त भूमि में श्मशान दर्ज नहीं था।
इस पर नायब तहसीलदार ने फुरकान आदि को समझाकर शव का अंतिम संस्कार करा दिया और ईद के त्योहार के बाद दोनों पक्षों को तहसील बुलाया। उन्होंने मरवा के ग्राम प्रधान एवं हलका लेखपाल को निर्देश दिए कि ग्राम समाज की भूमि चिह्नित कर उन्हें रिपोर्ट दें, ताकि बाल्मीकि समाज के लोगों को श्मशान की भूमि आवंटित की जा सके।