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एसपीओ के सहारे क्राइम कंट्रोल की कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:34 AM IST
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police
- फोटो : amar ujala
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सहारनपुर में सोशल पुलिसिंग को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए एसएसपी ने अब लोगों को पुलिस से सीधा जोड़ने की योजना तैयार की है। इसमें किसी भी तरह की घटना-दुर्घटना के वक्त लोग पुलिस के साथ होंगे।
इसके लिए जिले भर में साफ छवि वालों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) नियुक्त किया जाएगा। ये क्षेत्र में होने वाली दिनभर की गतिविधियों पर भी नजर रखकर पुलिस के साथ सूचनाएं भी साझा करेंगे।
सबसे बड़ी बात यह है कि एसएसपी की ओर से नियुक्त होने वाले एसपीओ पुलिस की कार्यशैली पर आम जनता से राय लेकर उसका फीडबैक कप्तान तक पहुंचाएंगे।
सक्रिय हो रहे खुराफाती और अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एसएसपी अब सोशल पुलिसिंग को मजबूत करने की पहल कर रहे हैं। कई दिन से कप्तान समाज के अलग-अलग वर्ग के लोगों के साथ सीधा संवाद कर रहे हैं।
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संवाद की इस कड़ी के बाद अब थानों के हिसाब से शहर और देहात के गणमान्य लोगों की सूची बनाई जा रही है। साफ और गैर राजनीतिक छवि वाले लोगों को पुलिस के साथ खड़ा करने के लिए उन्हें एसपीओ नियुक्त किया जाएगा।
आपको बता दें कि विशेष पुलिस अधिकारी की परंपरा तो काफी पुरानी है। मगर, एसपीओ बनने के बाद व्यक्ति पुलिस की मदद की बजाय अपने जुगाड़ में जुट जाते हैं। इस बार नियुक्त हो रहे एसपीओ को हर मौके पर उसके काम की रैकिंग मिलेगी। निष्क्रिय या शिकायत पर उन्हें ब्लैक लिस्टेड भी किया जाएगा।
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इसके लिए जिले भर में साफ छवि वालों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) नियुक्त किया जाएगा। ये क्षेत्र में होने वाली दिनभर की गतिविधियों पर भी नजर रखकर पुलिस के साथ सूचनाएं भी साझा करेंगे।
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सबसे बड़ी बात यह है कि एसएसपी की ओर से नियुक्त होने वाले एसपीओ पुलिस की कार्यशैली पर आम जनता से राय लेकर उसका फीडबैक कप्तान तक पहुंचाएंगे।
सक्रिय हो रहे खुराफाती और अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एसएसपी अब सोशल पुलिसिंग को मजबूत करने की पहल कर रहे हैं। कई दिन से कप्तान समाज के अलग-अलग वर्ग के लोगों के साथ सीधा संवाद कर रहे हैं।
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संवाद की इस कड़ी के बाद अब थानों के हिसाब से शहर और देहात के गणमान्य लोगों की सूची बनाई जा रही है। साफ और गैर राजनीतिक छवि वाले लोगों को पुलिस के साथ खड़ा करने के लिए उन्हें एसपीओ नियुक्त किया जाएगा।
आपको बता दें कि विशेष पुलिस अधिकारी की परंपरा तो काफी पुरानी है। मगर, एसपीओ बनने के बाद व्यक्ति पुलिस की मदद की बजाय अपने जुगाड़ में जुट जाते हैं। इस बार नियुक्त हो रहे एसपीओ को हर मौके पर उसके काम की रैकिंग मिलेगी। निष्क्रिय या शिकायत पर उन्हें ब्लैक लिस्टेड भी किया जाएगा।