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सपा से गठबंधन पर 17 जनवरी तक इंतजार करेगी आसपा
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सहारनपुर। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर कवायद जारी है। शनिवार को पहले तो चंद्रशेखर आजाद ने लखनऊ में मीडिया के समक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए दलितों को राजनीति में भागीदारी नहीं देने जैसा गंभीर आरोप लगा दिया, लेकिन उसके ठीक बाद प्रदेश कार्यालय प्रभारी अमित गौतम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अखिलेश यादव को 17 जनवरी तक का समय देने की जानकारी दी।
पार्टी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी अमित गौतम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि आजाद समाज पार्टी ने अपने एजेंडे के कुछ बिंदुओं को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की शर्त में शामिल किया है। उक्त बिंदुओं पर अपने सहयोगी दलों के साथ विचार विमर्श कर 17 जनवरी तक निर्णय देने का समय सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिया गया है। यदि 17 जनवरी तक अखिलेश यादव उक्त बिंदुओं पर सहमत नहीं होते हैं तो आजाद समाज पार्टी 18 जनवरी को समान विचारधारा वाले प्रदेश के अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी। आजाद समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के गठबंधन के लिए जो शर्तें रखी हैं उनमें तीन प्रमुख शर्तों हैं। पहली शर्त में कहा गया है कि समाजवादी पार्टी की पूर्व की सरकार में अनुसूचित जाति के लोक सेवकों का पदोन्नति में आरक्षण खत्म किया गया। इससे समाजवादी पार्टी दलित विरोधी पार्टी के रूप में जानी जाती है। अनुसूचित जाति को कैसे भरोसा दिलाया जाए कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के बाद उनके हक में कार्य करेगी। यह स्टांप पर लिखित में दिया जाए। दूसरी शर्त अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज खासकर पसमांदा मुसलमानों के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा 2012 के चुनाव में किए वादों को सत्ता में आने पर पूरा करने को घोषणा पत्र में शामिल किया जाए। इसके अलावा पिछड़ों, दलितों, अति पिछड़े हिंदुओं और अल्पसंख्यक मुसलमानों की हिस्सेदारी सरकार में तय हो।
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पार्टी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी अमित गौतम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि आजाद समाज पार्टी ने अपने एजेंडे के कुछ बिंदुओं को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की शर्त में शामिल किया है। उक्त बिंदुओं पर अपने सहयोगी दलों के साथ विचार विमर्श कर 17 जनवरी तक निर्णय देने का समय सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिया गया है। यदि 17 जनवरी तक अखिलेश यादव उक्त बिंदुओं पर सहमत नहीं होते हैं तो आजाद समाज पार्टी 18 जनवरी को समान विचारधारा वाले प्रदेश के अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी। आजाद समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के गठबंधन के लिए जो शर्तें रखी हैं उनमें तीन प्रमुख शर्तों हैं। पहली शर्त में कहा गया है कि समाजवादी पार्टी की पूर्व की सरकार में अनुसूचित जाति के लोक सेवकों का पदोन्नति में आरक्षण खत्म किया गया। इससे समाजवादी पार्टी दलित विरोधी पार्टी के रूप में जानी जाती है। अनुसूचित जाति को कैसे भरोसा दिलाया जाए कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के बाद उनके हक में कार्य करेगी। यह स्टांप पर लिखित में दिया जाए। दूसरी शर्त अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज खासकर पसमांदा मुसलमानों के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा 2012 के चुनाव में किए वादों को सत्ता में आने पर पूरा करने को घोषणा पत्र में शामिल किया जाए। इसके अलावा पिछड़ों, दलितों, अति पिछड़े हिंदुओं और अल्पसंख्यक मुसलमानों की हिस्सेदारी सरकार में तय हो।
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