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कहीं गेहूं-चावल नहीं मिला तो कहीं तेल, दाल

Sun, 05 Sep 2021 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 12:06 AM IST
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Somewhere wheat-rice is not found, then somewhere oil, pulses
अति कुपोषित सार्थक के साथ उसकी मां विन्नी देवी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जनपद में कुपोषित बच्चों को बंटने वाले पोषाहार में खामियां सामने आईं हैं, जबकि विभाग की ओर से प्रतिमाह पोषाहार दिए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति इससे अलग है। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि कहीं लंबे समय से गेहूं, चावल तो कहीं तेल, दाल कुपोषित बच्चों को नहीं मिला है।
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जिले में वर्तमान में 20357 कुपोषित और 2746 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। इन दिनों राष्ट्रीय पोषण माह चल रहा है, लेकिन हर माह पूरा पोषाहार कुपोषितों तक नहीं पहुंच रहा है। नानौता क्षेत्र के ग्राम बकडौली कमालपुर निवासी शिवांगी की मां रुकमेश ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा हर माह बेटी का वजन तोला जाता है, लेकिन पोषाहार में दाल-सोया ऑयल ही मिलता है, जबकि गेहूं व चावल लंबे समय से नहीं मिल पाया। तीतरो क्षेत्र गांव बहलोलपुर निवासी रुकमेश ने बताया कि उनका पुत्र डेढ़ वर्षीय पुत्र शिवाकांत कुपोषित है। पोषाहार में सिर्फ तेल और दाल दिया जाता है। तीन माह में एक बार सवा किलो गेहूं और एक किलो चावल दिया जाता है, जबकि नियम हर माह सवा किलो गेहूं और एक किलो चावल देने का है। वहीं, देवला निवासी दिलीप ने बताया कि गेहूं और चावल प्रत्येक माह मिल रहा है, लेकिन लंबे समय से दाल व सोया ऑयल नहीं मिला है।
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पहले से हुआ सुधार
कई इलाकों में आंगनबाड़ियों व स्वयं सहायता समूहों द्वारा अच्छा कार्य भी किया गया। गांव कंबोहमाजरा निवासी विन्नी देवी का कहना है कि उनका नौ माह का बेटा कुपोषित है। उनको आंगनबाड़ी केंद्र से प्रतिमाह पोषाहार मिल रहा है। वहीं, तल्हेड़ी बुजुर्ग निवासी रोशन ने बताया कि उनकी पोती आरोही कुपोषित है। उन्हें प्रत्येक माह एक किलो चने की दाल और 500 ग्राम सोयाबीन ऑयल सहित अन्य पोषाहार मिल रहा है। वहीं, शासन के निर्देश हैं कि प्रत्येक माह साढ़े चार लीटर तेल पात्र परिवार को दिया जाए, लेकिन इसके विपरीत कई जगहों पर 500 ग्राम से एक लीटर तक तेल दिए जाने के मामले सामने आए हैं।
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तीन विभागों के बीच उलझी पुष्टाहार बंटने की योजना
पहले आंगनबाड़ियों द्वारा पोषाहार बांटा जाता था, लेकिन छह माह पूर्व शासन ने स्वयं सहायता समूहों को पोषाहार बांटने की जिम्मेदारी दी है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह कोटेदार के यहां गेहूं, चावल और दाल लेकर पैकेट तैयार करते हैं। इसके बाद आंगनबाड़ियों द्वारा दी गई सूची के हिसाब से पोषाहार बांटा जाता है, लेकिन बाल विकास विभाग, स्वयं सहायता समूहों और जिला पूर्ति विभाग के बीच तालमेल न होने की वजह से जिले में कई इलाकों में समय पर और पूरा पोषाहार नहीं मिलता है।

विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक कुपोषित बच्चे को हर माह पोषाहार मिले। इसके तहत आंगनबाड़ियां स्वयं सहायता समूहों के साथ तालमेल के साथ कार्य कर रही हैं, जिन जगहों पर खामियां सामने आईं हैं, उससे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी

अपनी दादी रोशन की गोद कुपोषित आरोही

अपनी दादी रोशन की गोद कुपोषित आरोही- फोटो : SAHARANPUR

कुपोषित शिवाकांत के साथ उसकी मां रूकमेश

कुपोषित शिवाकांत के साथ उसकी मां रूकमेश- फोटो : SAHARANPUR

कुपोषित बच्ची शिवांगी के साथ उसकी मां रूकमेश

कुपोषित बच्ची शिवांगी के साथ उसकी मां रूकमेश- फोटो : SAHARANPUR

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