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कहीं बच्चे नहीं पहुंच रहे तो कहीं आंगनबाड़ी नदारद
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सहारनपुर। जनपद में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आए दिन खामियां देखने को मिलती हैं। वर्तमान में कई केंद्र ऐसे हैं, जहां पर नियमित रूप से आंगनबाड़ियां नहीं पहुंचती हैं। वहीं, कुछ केंद्रों पर पंजीकृत में से 70 प्रतिशत बच्चे ही आ रहे हैं। इसमें अभिभावकों की अनदेखी भी बड़ी वजह बनी है।
जनपद में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 2992 आंगनबाड़ियां तैनात है। पद रिक्त होने की वजह से कुछ जगहों पर सहायिका कमान संभालती हैं। अमर उजाला ने पड़ताल की तो ब्लॉक पुवांरका के गांव पुंडैन में आंगनबाड़ी केंद्र से गायब मिली। इसी तरह शहर में खाताखेड़ी व शारदानगर में नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं बैठती हैं। खाताखेड़ी निवासी मोहम्मद फुरकान और शारदानगर निवासी जितेंद्र कश्यप ने बताया कि महीने में 20 दिन ही केंद्र खुलता हैं।
इसी तरह देवबंद क्षेत्र के गांव सरसीना केंद्र पर आंगनबाड़ी संतोष, सीमा व बबीता तैनात मिलीं, लेकिन कुछ देर केंद्र पर रुकने के बाद तीनों सर्वे के लिए चली गईं। इनके अलावा कई गांवों में पंजीकरण रजिस्टर में खामियां देेखने को मिली हैं। कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से बच्चों का पंजीकरण ही नहीं हो पाया है। तीतरो के गांव माधोपुर में 60 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर पांच बच्चे ही मिले हैं। आंगनबाड़ी और सहायिका विभाग को सूचना दिए बिना ही नदारद मिलीं। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पुष्टाहार भी समय पर वितरित नहीं होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन ने बताया कि ज्यादातर अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते हैं। इस वजह से शत-प्रतिशत बच्चे केंद्र पर नहीं आ रहे हैं। कई केंद्रों पर ऐसी स्थिति बनी है।
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हो चुकी है कार्रवाई
पिछले दिनों आंगनबाड़ी केंद्र पर बिना बताए अनुपस्थित रहने वाली 12 आंगनबाड़ियों के खिलाफ विभाग द्वारा नोटिस दिया गया था। लापरवाही बरतने पर गांव पुंडैन से आंगनबाड़ी को हटाकर सुपरवाइजर को चार्ज दिया गया था।
बीएलओ का भी करना होता है काम
आंगनबाड़ियों को बीएलओ का भी काम करना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस वजह से आंगनबाड़ियां पूरा समय केंद्र पर नहीं दे पाती हैं। ऐसे में विभाग और बच्चों को भी दिक्कत उठानी पड़ती है।
लापरवाही बरतने वाली आंगनबाड़ियों के खिलाफ विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। बीएलओ का कार्य देखने की वजह से भी आंगनबाड़ियों को दिक्कत उठानी पड़ती है, जिस वजह से पूरा समय केंद्र पर नहीं दे पाती हैं। फिर भी विभाग का प्रयास रहता है कि प्रत्येक लाभार्थी योजनाओं का लाभ मिले। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जनपद में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 2992 आंगनबाड़ियां तैनात है। पद रिक्त होने की वजह से कुछ जगहों पर सहायिका कमान संभालती हैं। अमर उजाला ने पड़ताल की तो ब्लॉक पुवांरका के गांव पुंडैन में आंगनबाड़ी केंद्र से गायब मिली। इसी तरह शहर में खाताखेड़ी व शारदानगर में नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं बैठती हैं। खाताखेड़ी निवासी मोहम्मद फुरकान और शारदानगर निवासी जितेंद्र कश्यप ने बताया कि महीने में 20 दिन ही केंद्र खुलता हैं।
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इसी तरह देवबंद क्षेत्र के गांव सरसीना केंद्र पर आंगनबाड़ी संतोष, सीमा व बबीता तैनात मिलीं, लेकिन कुछ देर केंद्र पर रुकने के बाद तीनों सर्वे के लिए चली गईं। इनके अलावा कई गांवों में पंजीकरण रजिस्टर में खामियां देेखने को मिली हैं। कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से बच्चों का पंजीकरण ही नहीं हो पाया है। तीतरो के गांव माधोपुर में 60 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर पांच बच्चे ही मिले हैं। आंगनबाड़ी और सहायिका विभाग को सूचना दिए बिना ही नदारद मिलीं। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि पुष्टाहार भी समय पर वितरित नहीं होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन ने बताया कि ज्यादातर अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते हैं। इस वजह से शत-प्रतिशत बच्चे केंद्र पर नहीं आ रहे हैं। कई केंद्रों पर ऐसी स्थिति बनी है।
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हो चुकी है कार्रवाई
पिछले दिनों आंगनबाड़ी केंद्र पर बिना बताए अनुपस्थित रहने वाली 12 आंगनबाड़ियों के खिलाफ विभाग द्वारा नोटिस दिया गया था। लापरवाही बरतने पर गांव पुंडैन से आंगनबाड़ी को हटाकर सुपरवाइजर को चार्ज दिया गया था।
बीएलओ का भी करना होता है काम
आंगनबाड़ियों को बीएलओ का भी काम करना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस वजह से आंगनबाड़ियां पूरा समय केंद्र पर नहीं दे पाती हैं। ऐसे में विभाग और बच्चों को भी दिक्कत उठानी पड़ती है।
लापरवाही बरतने वाली आंगनबाड़ियों के खिलाफ विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। बीएलओ का कार्य देखने की वजह से भी आंगनबाड़ियों को दिक्कत उठानी पड़ती है, जिस वजह से पूरा समय केंद्र पर नहीं दे पाती हैं। फिर भी विभाग का प्रयास रहता है कि प्रत्येक लाभार्थी योजनाओं का लाभ मिले। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी