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उत्तम मार्दव धर्म से आती है मृदुता और विनयशीलता
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जैन बाग स्थित जैन मन्दिर में पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जैन बाग स्थित प्राचीन अतिशयकारी जिनालय में दशलक्षण महा पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-आराधना की। मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए व्रती श्रावक सीए अनिल जैन ने बताया कि मार्दव से आशय मृदुता एवं कोमलता से है। जब मानव मिथ्या अहंकार, मान, कषाय का त्याग कर देता है तभी मृदुता, विनय शीलता को ग्रहण कर सकता है और उसकी आत्मा में उत्तम मार्दव धर्म उत्पन्न होता है।
उन्होंने कहा जो मनुष्य अपने धन, वैभव, संपत्ति, पद, प्रतिष्ठान, ज्ञान, रूप, जाति, कुल का अहंकार करता है, उसमें कभी भी मार्दव धर्म पैदा नहीं हो सकता। अहंकार एवं मान कषाय मानव को पतन की ओर अग्रसर कर देती है। अहंकार में पशुता छिपी रहती है, मानवता का अभाव होता है, ऐसे मनुष्यों में दया, करुणा, सत्य, अहिंसा, संवेदनशीलता का अभाव होता है। इस प्रकार के व्यक्ति समाज के कल्याण के विषय में सोच नहीं सकते। रावण तीन खंड का अधिपति था, अपने युग का सर्वश्रेष्ठ पंडित विद्वान एवं वेदों का ज्ञाता था, उसे अपनी शक्तिबल, बाहुबल, बुद्धिबल एवं ज्ञान का अहंकार था, इसी अहंकार के कारण उसका पतन हुआ।
वहीं, प्रात: काल की मंगल बेला में समाज के कई श्रेष्ठी गण द्वारा प्रभु की पूजा अर्चना एवं अभिषेक शांतिधारा की गई। सभी स्त्री पुरुष केसरिया परिधान धारण किए हुए साक्षात देव लोक के इंद्र, इंद्राणी प्रतीत हो रहे थे।
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पूजा कार्यक्रम में अनिल जैन, नवीन जैन, मनीष जैन, प्रदीप जैन, पंकज जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, नरेश जैन, दिनेश जैन, संदीप जैन, सौरभ जैन, अशोक जैन, मुकेश जैन, नीरज जैन, तरुण जैन, प्रकाम जैन आदि उपस्थित रहे।
चंद्रनगर स्थित जैन मंदिर में महिला साधु सेवा समिति ने 48 दीप की अर्चना कराई। सांगानेर से आए अरुण शास्त्री और चेतन के सानिध्य में संगीतमय वातावरण संपन्न हुआ। इसमें समिति की अध्यक्ष रेणू जैन, अंजू जैन, वीना जैन, पल्लवी जैन का विशेष सहयोग रहा। मंदिर समिति के महामंत्री प्रवीण जैन सराफ, अरुण जैन सराफ, विशाल जैन, प्रमोद, शैलेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा जो मनुष्य अपने धन, वैभव, संपत्ति, पद, प्रतिष्ठान, ज्ञान, रूप, जाति, कुल का अहंकार करता है, उसमें कभी भी मार्दव धर्म पैदा नहीं हो सकता। अहंकार एवं मान कषाय मानव को पतन की ओर अग्रसर कर देती है। अहंकार में पशुता छिपी रहती है, मानवता का अभाव होता है, ऐसे मनुष्यों में दया, करुणा, सत्य, अहिंसा, संवेदनशीलता का अभाव होता है। इस प्रकार के व्यक्ति समाज के कल्याण के विषय में सोच नहीं सकते। रावण तीन खंड का अधिपति था, अपने युग का सर्वश्रेष्ठ पंडित विद्वान एवं वेदों का ज्ञाता था, उसे अपनी शक्तिबल, बाहुबल, बुद्धिबल एवं ज्ञान का अहंकार था, इसी अहंकार के कारण उसका पतन हुआ।
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वहीं, प्रात: काल की मंगल बेला में समाज के कई श्रेष्ठी गण द्वारा प्रभु की पूजा अर्चना एवं अभिषेक शांतिधारा की गई। सभी स्त्री पुरुष केसरिया परिधान धारण किए हुए साक्षात देव लोक के इंद्र, इंद्राणी प्रतीत हो रहे थे।
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पूजा कार्यक्रम में अनिल जैन, नवीन जैन, मनीष जैन, प्रदीप जैन, पंकज जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, नरेश जैन, दिनेश जैन, संदीप जैन, सौरभ जैन, अशोक जैन, मुकेश जैन, नीरज जैन, तरुण जैन, प्रकाम जैन आदि उपस्थित रहे।
चंद्रनगर स्थित जैन मंदिर में महिला साधु सेवा समिति ने 48 दीप की अर्चना कराई। सांगानेर से आए अरुण शास्त्री और चेतन के सानिध्य में संगीतमय वातावरण संपन्न हुआ। इसमें समिति की अध्यक्ष रेणू जैन, अंजू जैन, वीना जैन, पल्लवी जैन का विशेष सहयोग रहा। मंदिर समिति के महामंत्री प्रवीण जैन सराफ, अरुण जैन सराफ, विशाल जैन, प्रमोद, शैलेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।

दशलक्षण पर्व पर चन्द्र नगर जैन पंचायती मन्दिर में पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग- फोटो : SAHARANPUR

दशलक्षण पर्व पर चन्द्र नगर जैन पंचायती मन्दिर में पूजा अर्चना करते जैन समाज के लोग- फोटो : SAHARANPUR