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महिलाओं को पुरुषों से कम आंकना बंद करे समाज
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चिलकाना में आयोजित गोष्ठी में शामिल महिलाएं और कांस्टेबल
- फोटो : SAHARANPUR
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चिलकाना (सहारनपुर)। जेंडर समानता तथा महिला हिंसा पर पुलिस कर्मियों के साथ आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को सदैव से पुरुषों के मुकाबले कम आंका जाता है तथा उन पर परिवार से लेकर समाज तक अनेक प्रकार की हिंसा की जाती है। इसे बदलना होगा।
सोमवार को दिशा सामाजिक संगठन द्वारा थाना प्रांगण में महिला कांस्टेबलों के लिए आयोजित विचार गोष्ठी में दिशा संगठन के संयोजक केएन तिवारी ने कहा कि समाज में जेंडर का मतलब महिला को पुरुष की अपेक्षा कम आंकना माना जाता है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन पर होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा को रोका जाना जरूरी है।
एसएसआई रविंद्र सिंह ने कहा कि महिला भी समाज का एक हिस्सा है। उस पर अत्याचार किया जाना निंदनीय है। कानूनी जानकारी के अभाव में भी महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
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महिला कांस्टेबल सोनी यादव ने कहा कि महिलाओं को निर्भीक होकर अपनी समस्याओं को पहले परिजनों के सामने तथा वहां उसका हल नहीं निकलने पर पुलिस के सामने रखना चाहिए। पुलिस उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहेगी।
दिशा संगठन की शाहीन तथा तसनीम ने कहा कि महिलाओं पर गर्भावस्था से लेकर मृत्यु तक अनेक तरह की हिंसा शुरू हो जाती हैं। उनके साथ मारपीट करना, छेड़छाड़ करना, शारीरिक शोषण करना, दहेज के लिए प्रताड़ित करना, भ्रूण हत्या जैसी हिंसा सामने आती हैं। यह हिंसा परिवार से लेकर सामुदायिक स्तर तक होती है। पुलिस प्रशासन को महिलाओं पर होने वाली हिंसा की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वह इस तरह के मामले आने पर उन्हें सहानुभूति पूर्वक हल करा सके। विचार गोष्ठी में महिला कांस्टेबल कोमल, विनीता, शुभम शर्मा, अंजू, शीतल के अलावा दिशा से सुरेशो सैनी, पीराम, रजिया, राज्जो देवी, रामरति आदि ने भी विचार रखे।
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सोमवार को दिशा सामाजिक संगठन द्वारा थाना प्रांगण में महिला कांस्टेबलों के लिए आयोजित विचार गोष्ठी में दिशा संगठन के संयोजक केएन तिवारी ने कहा कि समाज में जेंडर का मतलब महिला को पुरुष की अपेक्षा कम आंकना माना जाता है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन पर होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा को रोका जाना जरूरी है।
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एसएसआई रविंद्र सिंह ने कहा कि महिला भी समाज का एक हिस्सा है। उस पर अत्याचार किया जाना निंदनीय है। कानूनी जानकारी के अभाव में भी महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
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महिला कांस्टेबल सोनी यादव ने कहा कि महिलाओं को निर्भीक होकर अपनी समस्याओं को पहले परिजनों के सामने तथा वहां उसका हल नहीं निकलने पर पुलिस के सामने रखना चाहिए। पुलिस उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहेगी।
दिशा संगठन की शाहीन तथा तसनीम ने कहा कि महिलाओं पर गर्भावस्था से लेकर मृत्यु तक अनेक तरह की हिंसा शुरू हो जाती हैं। उनके साथ मारपीट करना, छेड़छाड़ करना, शारीरिक शोषण करना, दहेज के लिए प्रताड़ित करना, भ्रूण हत्या जैसी हिंसा सामने आती हैं। यह हिंसा परिवार से लेकर सामुदायिक स्तर तक होती है। पुलिस प्रशासन को महिलाओं पर होने वाली हिंसा की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वह इस तरह के मामले आने पर उन्हें सहानुभूति पूर्वक हल करा सके। विचार गोष्ठी में महिला कांस्टेबल कोमल, विनीता, शुभम शर्मा, अंजू, शीतल के अलावा दिशा से सुरेशो सैनी, पीराम, रजिया, राज्जो देवी, रामरति आदि ने भी विचार रखे।

दिशा द्वारा थाने में आयोजित विचार गोष्ठी में बोलते केएन तिवारी- फोटो : SAHARANPUR