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ई-लाइब्रेरी में मिलेंगे स्मार्ट कंप्यूटर और 80 साल पुराना साहित्य
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नगर निगम में तैयार हो रही स्मार्ट लाइब्रेरी
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित किए जा रहे पुस्तकालय में एक ओर जहां ऑनलाइन किताबें पढ़ने के लिए स्मार्ट कंप्यूटर लगाए गए हैं। वहीं इसमें 80 साल तक पुराना साहित्य भी मौजूद रहेगा। इन दिनों ई-लाइब्रेरी को अंतिम रूप देने का कार्य चल रहा है।
लाइब्रेरी की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी। तभी से किताबें रखने के लिए अलमारी और फर्नीचर रखा हुआ है, लेकिन पूरी व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चलने की वजह से लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे थे। स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर के चयन के बाद स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने उक्त लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए योजना से एक करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने के लिए कई माह से कार्य चल रहा है। लाइब्रेरी के भवन की मरम्मत के साथ ही फर्श की जगह टाइल्स, नया दरवाजा, गेट पर सीढ़ियां और दीवारों को चमकदार बनाया गया है। लाइब्रेरी में नया फर्नीचर डाला गया है, जिसमें अब गद्दे वाली 50 कुर्सियां रखी गई हैं। आठ कंप्यूटर लगाने के लिए टेबल अलग से आई है। एसी लगाए गए हैं, जिससे गर्मियों के दिन में भी पाठक बिना किसी परेशानी के ध्यान लगाकर पढ़ाई कर सकें। खास बात यह है कि इसमें 2002 से रखा पुराना साहित्य भी उपलब्ध रहेगा। जिसमें 80 साल तक पुरानी किताबें शामिल हैं। साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आजम ने बताया कि लाइब्रेरी में 1935 और 1940 तक की किताबें उपलब्ध हैं, जिनको व्यवस्थित तरीके से अलमारियों में रखवाया जा रहा है। आठ स्मार्ट कंप्यूटर आए हैं, जो बड़ी एलईडी स्क्रीन के हैं। इन स्क्रीन के जरिए पाठक ऑनलाइन भी पढ़ाई कर सकेंगे।
ई-लाइब्रेरी में नई और पुरानी किताबें तो रहेंगी ही, साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई की भी व्यवस्था की जा रही है, जिसके लिए आठ कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं। यह जनपद की सबसे बेहतरीन और आधुनिक सुविधाओं वाली लाइब्रेरी होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की भी सुविधा रहेगी।
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ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त/सीईओ स्मार्ट सिटी सहारनपुर।
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लाइब्रेरी की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी। तभी से किताबें रखने के लिए अलमारी और फर्नीचर रखा हुआ है, लेकिन पूरी व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चलने की वजह से लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे थे। स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर के चयन के बाद स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने उक्त लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए योजना से एक करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने के लिए कई माह से कार्य चल रहा है। लाइब्रेरी के भवन की मरम्मत के साथ ही फर्श की जगह टाइल्स, नया दरवाजा, गेट पर सीढ़ियां और दीवारों को चमकदार बनाया गया है। लाइब्रेरी में नया फर्नीचर डाला गया है, जिसमें अब गद्दे वाली 50 कुर्सियां रखी गई हैं। आठ कंप्यूटर लगाने के लिए टेबल अलग से आई है। एसी लगाए गए हैं, जिससे गर्मियों के दिन में भी पाठक बिना किसी परेशानी के ध्यान लगाकर पढ़ाई कर सकें। खास बात यह है कि इसमें 2002 से रखा पुराना साहित्य भी उपलब्ध रहेगा। जिसमें 80 साल तक पुरानी किताबें शामिल हैं। साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आजम ने बताया कि लाइब्रेरी में 1935 और 1940 तक की किताबें उपलब्ध हैं, जिनको व्यवस्थित तरीके से अलमारियों में रखवाया जा रहा है। आठ स्मार्ट कंप्यूटर आए हैं, जो बड़ी एलईडी स्क्रीन के हैं। इन स्क्रीन के जरिए पाठक ऑनलाइन भी पढ़ाई कर सकेंगे।
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ई-लाइब्रेरी में नई और पुरानी किताबें तो रहेंगी ही, साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई की भी व्यवस्था की जा रही है, जिसके लिए आठ कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं। यह जनपद की सबसे बेहतरीन और आधुनिक सुविधाओं वाली लाइब्रेरी होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की भी सुविधा रहेगी।
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ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त/सीईओ स्मार्ट सिटी सहारनपुर।

नगर निगम में तैयार हो रही स्मार्ट लाइब्रेरी- फोटो : SAHARANPUR