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लापरवाही की भेंट चढ़ी परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास योजना
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प्राथमिक विद्यालय बादशाहपुर में बंद पड़ा प्रोजेक्टर
- फोटो : SAHARANPUR
बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। विकास खंड मुजफ्फराबाद के परिषदीय स्कूलों में लाखों रुपये खर्च कर बनाई स्मार्ट क्लास का लाभ अधिकारियों की लापरवाही के चलते बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। ज्यादातर स्कूलों में लगे प्रोजेक्टर तकनीक खराबी से बंद पड़े हैं। अभिभावकों ने इन्हें ठीक करा कर इनके माध्यम से शिक्षण कराने की मांग की।
बीते वर्ष 29 लाख रुपये से ब्लाक के 29 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रोजक्टर लगवाए गए। इनके माध्यम से इनमें अध्य्यनरत साढ़े चार हजार बच्चों को स्मार्ट क्लास की सुविधा मिलनी थी, परंतु वर्तमान में केवल छह स्कूलों में ही ये प्रोजेक्टर चल रहे हैं अन्य में तकनीक खराबी के चलते ये धूंल फांक रहे हैं। ऐसे में सरकार का बेसिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास से शिक्षा देने का सपना परवान नहीं चढ़ रहा है। कई परिषदीय स्कूलों में जा कर जब स्मार्ट क्लास की स्थिति का जायजा लिया तो हालात बदतर नजर आए।
क्षेत्र के आदर्श ग्राम खुशहालीपुर खुर्द के उच्च प्राथमिक व खुशहालीपुर के कलां के प्राथमिक विद्यालय में प्रोजक्टर बंद हैं। इस संबंध में अध्यापकों ने बताया कि सीपीयू खराब पड़ा है, इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी है। गांव राम खेड़ा, रंडौल, रसूलपुर कलां, झिंझौली, कुरडी खेड़ा, बादशाहपुर में भी प्रोजक्टर बंद मिले। पड़ताल में एक बात तो साफ है कि ज्यादातर प्रोजेक्टर तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। जिन विद्यालयों में प्रोजेक्टर लगे हैं, उनके अध्यापकों ने प्रोजेक्टर बंद होने की सूचना अधिकारियों को देने की बात कही।
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बादशाहपुर के ग्रामीण सुधीर सैनी, महिपाल राठौर, सरदार गुरदेव सिंह, रियाजुल हसन, खुशहालीपुर निवासी जिला पंचायत सदस्य बाबुराम राठौर, हर सिंह राठौर, प्रदीप, प्रमेश, सुधीर आदि अभिभावकों ने डीएम से हस्तक्षेप कर परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास को चालु कराने की मांग की है।
बीएसए रामेंद्र कुमार सिंह ने कहा स्कूलों में तकनीकी टीम को भेज कर जांच कराई जाएगी। डीएम आलोक पांडेय ने बताया कि अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। फिर भी यदि ऐसा पाया जाता है तो सक्षम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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बीते वर्ष 29 लाख रुपये से ब्लाक के 29 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रोजक्टर लगवाए गए। इनके माध्यम से इनमें अध्य्यनरत साढ़े चार हजार बच्चों को स्मार्ट क्लास की सुविधा मिलनी थी, परंतु वर्तमान में केवल छह स्कूलों में ही ये प्रोजेक्टर चल रहे हैं अन्य में तकनीक खराबी के चलते ये धूंल फांक रहे हैं। ऐसे में सरकार का बेसिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास से शिक्षा देने का सपना परवान नहीं चढ़ रहा है। कई परिषदीय स्कूलों में जा कर जब स्मार्ट क्लास की स्थिति का जायजा लिया तो हालात बदतर नजर आए।
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क्षेत्र के आदर्श ग्राम खुशहालीपुर खुर्द के उच्च प्राथमिक व खुशहालीपुर के कलां के प्राथमिक विद्यालय में प्रोजक्टर बंद हैं। इस संबंध में अध्यापकों ने बताया कि सीपीयू खराब पड़ा है, इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी है। गांव राम खेड़ा, रंडौल, रसूलपुर कलां, झिंझौली, कुरडी खेड़ा, बादशाहपुर में भी प्रोजक्टर बंद मिले। पड़ताल में एक बात तो साफ है कि ज्यादातर प्रोजेक्टर तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। जिन विद्यालयों में प्रोजेक्टर लगे हैं, उनके अध्यापकों ने प्रोजेक्टर बंद होने की सूचना अधिकारियों को देने की बात कही।
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बादशाहपुर के ग्रामीण सुधीर सैनी, महिपाल राठौर, सरदार गुरदेव सिंह, रियाजुल हसन, खुशहालीपुर निवासी जिला पंचायत सदस्य बाबुराम राठौर, हर सिंह राठौर, प्रदीप, प्रमेश, सुधीर आदि अभिभावकों ने डीएम से हस्तक्षेप कर परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास को चालु कराने की मांग की है।
बीएसए रामेंद्र कुमार सिंह ने कहा स्कूलों में तकनीकी टीम को भेज कर जांच कराई जाएगी। डीएम आलोक पांडेय ने बताया कि अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। फिर भी यदि ऐसा पाया जाता है तो सक्षम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

प्राथमिक स्कूल खुशहालीपुर में बंद पड़ा प्रोजेक्टर- फोटो : SAHARANPUR