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स्मैक ने बिगाड़ दी सेहत, एटीएफ वार्ड में भर्ती हुए मरीज
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सहारनपुर। स्मैक, गांजा, चरस और अफीम जनपद के लोगों की जिंदगी में जहर घोल रहे हैं। एसबीडी जिला अस्पताल में स्थापित एटीएफ (एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी) सेंटर में लगातार मरीज पहुंच रहे हैं। शनिवार की शाम एक साथ छह मरीजों को भर्ती किया गया, जो स्मैक की लत के शिकार बताए गए हैं। यह लोग मंडलायुक्त के माध्यम से भर्ती कराए गए हैं। स्मैक लेने की वजह से इनकी शारीरिक से अधिक मानसिक हालत खराब है।
जनपद में नशीले पदार्थों का काला कारोबार लगातार जोर पकड़ रहा है। हरियाणा और अन्य राज्यों की सीमा से नशीले पदार्थ जैसे स्मैक, चरस, गांजा और अफीम लाई जाती है, जिसके लिए पूरा रैकेट चलता है। मंडलायुक्त लोकेश एम के संज्ञान में आया कि नकुड़ तहसील में यमुना नदी के किनारे के गांव स्मैक प्रभावित हैं, जहां किशोर और नौजवान स्मैक का नशा लेते हैं। तहसील दिवसों व थाना दिवसों के निरीक्षण के दौरान पीड़ित परिवारों के मुखिया द्वारा इस पर कार्रवाई करने की मांग की गई। जनपद की इस समस्या को देखते हुए मंडलायुक्त लोकेश एम के प्रयास से एम्स दिल्ली से एसबीडी जिला अस्पताल में एटीएफ सेंटर स्थापित किया है, जो सात दिसंबर 2021 से संचालित है। अभी तक सैकड़ों मरीज यहां आकर इलाज पा चुके हैं। यहां आठ बेड का वार्ड बना है, जिसमें शनिवार को मिर्जापुर क्षेत्र के एक साथ छह मरीज भर्ती कराए गए हैं। इनकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। चिकित्सकों ने बताया कि बेहतर इलाज की वजह से रविवार को मरीजों की हालत में सुधार आया है।
एटीएफ वार्ड में भर्ती कराए गए मरीजों की काउंसिलिंग के साथ ही हमारे डॉक्टरों द्वारा बेहतर से बेहतर इलाज देने का प्रयास किया गया है। जिसका नतीजा यह हुआ है कि मरीजों की स्थिति में 24 घंटे में ही सुधार नजर आया है। कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा ने भी वार्ड में पहुंचकर मरीजों का हाल जाना है। - डॉ. शिवेंद्र सिंह, नोडल अधिकारी, एटीएफ सेंटर
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जनपद में नशीले पदार्थों का काला कारोबार लगातार जोर पकड़ रहा है। हरियाणा और अन्य राज्यों की सीमा से नशीले पदार्थ जैसे स्मैक, चरस, गांजा और अफीम लाई जाती है, जिसके लिए पूरा रैकेट चलता है। मंडलायुक्त लोकेश एम के संज्ञान में आया कि नकुड़ तहसील में यमुना नदी के किनारे के गांव स्मैक प्रभावित हैं, जहां किशोर और नौजवान स्मैक का नशा लेते हैं। तहसील दिवसों व थाना दिवसों के निरीक्षण के दौरान पीड़ित परिवारों के मुखिया द्वारा इस पर कार्रवाई करने की मांग की गई। जनपद की इस समस्या को देखते हुए मंडलायुक्त लोकेश एम के प्रयास से एम्स दिल्ली से एसबीडी जिला अस्पताल में एटीएफ सेंटर स्थापित किया है, जो सात दिसंबर 2021 से संचालित है। अभी तक सैकड़ों मरीज यहां आकर इलाज पा चुके हैं। यहां आठ बेड का वार्ड बना है, जिसमें शनिवार को मिर्जापुर क्षेत्र के एक साथ छह मरीज भर्ती कराए गए हैं। इनकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। चिकित्सकों ने बताया कि बेहतर इलाज की वजह से रविवार को मरीजों की हालत में सुधार आया है।
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एटीएफ वार्ड में भर्ती कराए गए मरीजों की काउंसिलिंग के साथ ही हमारे डॉक्टरों द्वारा बेहतर से बेहतर इलाज देने का प्रयास किया गया है। जिसका नतीजा यह हुआ है कि मरीजों की स्थिति में 24 घंटे में ही सुधार नजर आया है। कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा ने भी वार्ड में पहुंचकर मरीजों का हाल जाना है। - डॉ. शिवेंद्र सिंह, नोडल अधिकारी, एटीएफ सेंटर
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