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भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध सकी बहन
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जिला कारागार में बने काउंटर पर बंदी भाई के लिये राखी लेकर पहुंची बहन
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। इस बार के रक्षा बंधन त्योहार पर जिला कारागार में बंद भाई की कलाई पर बहनें राखी नहीं बांध सकीं और न ही उनसे मुलाकात कर पाईं। कोरोना संक्रमण के चलते लागू की गई बंदिशों के बाद भी कुछ बहनें अपने भाई से मिलने की उम्मीद में जिला जेल पहुंच गईं। मगर यहां उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण उनको जिला कारागार के बाहर बने काउंटर में ही लिफाफे में राखी और तिलक की सामग्री देकर लौटना पड़ा।
जिला कारागार में पहुंचने वाली कुछ बहनों और उनके परिवार की अन्य महिला पूनम, ललिता सहित अन्य इसी उम्मीद में पहुंचीं कि उन्हें जेल में बंदी अपने भाई से मिलवाया जाएगा, लेकिन यहां आकर पता चला कि वे भाई के लिए लिफाफे में राखी ही दे पाएंगी। उनकी भाई से कोई मुलाकात नहीं हो सकेगी। लिफाफा देने के बाद भी ऐसी कई बहनें मायूस भी रहीं। वे राखी भाई की कलाई पर बांधने के बाद ही जाना चाहती हैं।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक विरेश राज शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के कारण बहनों की मुलाकात इस बार नहीं करवाई जा सकी। शासन स्तर से जो गाइड लाइंस मिलीं, उसी के अनुरूप लिफाफों में राखी और तिलक की सामग्री ली गई। उन्होंने बताया लिफाफों के माध्यम से 84 बहनों ने राखी भेजी हैं। वह मानते हैं कि यदि मुलाकात व्यवस्था होती तो राखी लेकर आने वाली बहनों की संख्या भी कहीं अधिक हो सकती थी। एक अगस्त से ही बहनों से राखी के लिफाफे लिए जा रहे थे जो रक्षा बंधन तक लिए गए।
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जिला कारागार में पहुंचने वाली कुछ बहनों और उनके परिवार की अन्य महिला पूनम, ललिता सहित अन्य इसी उम्मीद में पहुंचीं कि उन्हें जेल में बंदी अपने भाई से मिलवाया जाएगा, लेकिन यहां आकर पता चला कि वे भाई के लिए लिफाफे में राखी ही दे पाएंगी। उनकी भाई से कोई मुलाकात नहीं हो सकेगी। लिफाफा देने के बाद भी ऐसी कई बहनें मायूस भी रहीं। वे राखी भाई की कलाई पर बांधने के बाद ही जाना चाहती हैं।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक विरेश राज शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के कारण बहनों की मुलाकात इस बार नहीं करवाई जा सकी। शासन स्तर से जो गाइड लाइंस मिलीं, उसी के अनुरूप लिफाफों में राखी और तिलक की सामग्री ली गई। उन्होंने बताया लिफाफों के माध्यम से 84 बहनों ने राखी भेजी हैं। वह मानते हैं कि यदि मुलाकात व्यवस्था होती तो राखी लेकर आने वाली बहनों की संख्या भी कहीं अधिक हो सकती थी। एक अगस्त से ही बहनों से राखी के लिफाफे लिए जा रहे थे जो रक्षा बंधन तक लिए गए।
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