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मनुष्य के मन को शुद्ध करती है श्रीमद्भागवत: सुखेदवाचार्य
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साउथ सिटी में श्रीमद् भागवत कथा का आनंद लेते श्रद्घालु
- फोटो : SAHARANPUR
मनुष्य के मन को शुद्ध करती है श्रीमद्भागवत: सुखेदवाचार्य
सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत, नवकुंडीय यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और गऊ पूजन में कई संत शामिल हुए। कुरुक्षेत्र से आए भागवताचार्य सुुखदेवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत पापों से मुक्ति दिलाने के साथ ही मानव के मन को भी शुद्ध करती है।
साउथ सिटी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक उत्सव में बुधवार को मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र से सुखदेवाचार्य महाराज और तीर्थनगरी शुक्रताल से गुरुदत्त ब्रह्मचारी महाराज एवं हनुमंत धाम से केशवानंद जी के प्रतिनिधि के रूप में केडी शर्मा रहे। इन सभी ने सर्व प्रथम श्रीमद्भागवत को प्रणाम कर पुष्प अर्पित किए। इससे पूर्व प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और आचार्य संजीव शास्त्री ने सभी अतिथियों अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया। सुखदेवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत के अनुसरण से मनुष्य के मन का भय दूर हो जाता और उसकी आत्मा परमात्मा से मिल जाती है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में श्रीमद्भागवत का अनुसरण करना चाहिए।
इस दौरान ज्योतिषाचार्य हरिशंकर गौनियाल, आचार्य संजीव शास्त्री, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, पार्षद ज्योति अग्रवाल, अनिल शर्मा, ओमकार दीक्षित, योगेश कुमार गर्ग, नरेश हरजाई, शांति स्वरूप हरजाई, ओमप्रकाश फुटेला, राजीव वधवा, प्रवीण शर्मा, लोकमणि त्यागी, आरपी जिंदल, नेहा जिंदल, रमन मक्कड़, प्रणव मक्कड़, पवन मक्कड़, हंस चुग, संजय वर्मा, अनिल शर्मा, रिंपल धमीजा, आकृति पाहवा, मानसी चांदना, नीरज ठाकुर, कविता शर्मा, रंजना शर्मा, रीता वधवा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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करते रहें देव और पितरों के कार्य: राघवाचार्य
सहारनपुर। कथा व्यास जगतगुरु अयोध्या वाले राघवाचार्य महाराज ने कहा कि देव और पितरों के कार्यों को समय-समय पर करते रहना चाहिए। श्री वाल्मीकि रामायण में महर्षि वाल्मीकि कहते हैं कि किसी ने मेरे लिए कुछ किया है, तो उसके लिए मैं भी कुछ करूं, यही मेरा भी कोई दायित्व बनता है। यह दायित्व बोध ही सनातन धर्म है। पितरों के कार्य में वाक्य शुद्धि की महत्ता होती है और देवताओं के कार्य में श्रद्धा की महत्ता होती है। इसका मतलब यह है कि अगर आप देवताओं का काम कर रहे हैं और कोई त्रुटि हो जाती है तो भी फल मिलेगा, लेकिन पितरों के कार्यों में वाक्य और कार्य दोनों का महत्व है। वाक्य की अशुद्धि होगी और श्राद्ध करेंगे तो वह श्राद्ध बेकार हो जाएगा। जन्म लेने से पहले और मरने के बाद तक मनुष्य जीवन में संस्कार की महत्ता होती है। जन्म लेने से पहले तीन संस्कार हो जाते हैं। जीवन में कुल 48 प्रकार के संस्कार होते हैं, लेकिन उनमें 16 संस्कार महत्वपूर्ण है। वर्तमान के हालात यह है कि हमें 16 संस्कार भी याद नहीं है। आज सामान्य रूप से लोगों को सिर्फ दो ही संस्कार याद है। एक विवाह संस्कार और दूसरा अंतिम संस्कार। यही कारण है कि आज हम संस्कार हीन होते जा रहे हैं।
धूमधाम से होगा कन्याओं का विवाह: कृष्णात्रेय
सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष अभिषेक कृष्णात्रेय ने कहा कि आठ फरवरी को कार्यक्रम स्थल पर 15 कन्याओं का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया जाएगा। इसके साथ ही बैंडबाजों संग बारातें आएंगी और कन्याओं को घर की जरूरत का सभी सामान दिया जाएगा। इसके लिए प्रभु जी का परिवार की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में देश के कई संत भाग लेंगे।
यज्ञशाला और गाय माता की परिक्रमा
सहारनपुर। कथा स्थल पर नौ कुंडीय यज्ञशाला और गाय माता की पूरे दिन श्रद्धालु परिक्रमा करते रहे। सुबह के समय श्रीमद्भागवत के मूल पाठ में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद यजमान यज्ञ में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्री हनुमान जी की कुटिया में भी मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
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सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत, नवकुंडीय यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और गऊ पूजन में कई संत शामिल हुए। कुरुक्षेत्र से आए भागवताचार्य सुुखदेवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत पापों से मुक्ति दिलाने के साथ ही मानव के मन को भी शुद्ध करती है।
साउथ सिटी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक उत्सव में बुधवार को मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र से सुखदेवाचार्य महाराज और तीर्थनगरी शुक्रताल से गुरुदत्त ब्रह्मचारी महाराज एवं हनुमंत धाम से केशवानंद जी के प्रतिनिधि के रूप में केडी शर्मा रहे। इन सभी ने सर्व प्रथम श्रीमद्भागवत को प्रणाम कर पुष्प अर्पित किए। इससे पूर्व प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और आचार्य संजीव शास्त्री ने सभी अतिथियों अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया। सुखदेवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत के अनुसरण से मनुष्य के मन का भय दूर हो जाता और उसकी आत्मा परमात्मा से मिल जाती है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में श्रीमद्भागवत का अनुसरण करना चाहिए।
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इस दौरान ज्योतिषाचार्य हरिशंकर गौनियाल, आचार्य संजीव शास्त्री, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, पार्षद ज्योति अग्रवाल, अनिल शर्मा, ओमकार दीक्षित, योगेश कुमार गर्ग, नरेश हरजाई, शांति स्वरूप हरजाई, ओमप्रकाश फुटेला, राजीव वधवा, प्रवीण शर्मा, लोकमणि त्यागी, आरपी जिंदल, नेहा जिंदल, रमन मक्कड़, प्रणव मक्कड़, पवन मक्कड़, हंस चुग, संजय वर्मा, अनिल शर्मा, रिंपल धमीजा, आकृति पाहवा, मानसी चांदना, नीरज ठाकुर, कविता शर्मा, रंजना शर्मा, रीता वधवा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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करते रहें देव और पितरों के कार्य: राघवाचार्य
सहारनपुर। कथा व्यास जगतगुरु अयोध्या वाले राघवाचार्य महाराज ने कहा कि देव और पितरों के कार्यों को समय-समय पर करते रहना चाहिए। श्री वाल्मीकि रामायण में महर्षि वाल्मीकि कहते हैं कि किसी ने मेरे लिए कुछ किया है, तो उसके लिए मैं भी कुछ करूं, यही मेरा भी कोई दायित्व बनता है। यह दायित्व बोध ही सनातन धर्म है। पितरों के कार्य में वाक्य शुद्धि की महत्ता होती है और देवताओं के कार्य में श्रद्धा की महत्ता होती है। इसका मतलब यह है कि अगर आप देवताओं का काम कर रहे हैं और कोई त्रुटि हो जाती है तो भी फल मिलेगा, लेकिन पितरों के कार्यों में वाक्य और कार्य दोनों का महत्व है। वाक्य की अशुद्धि होगी और श्राद्ध करेंगे तो वह श्राद्ध बेकार हो जाएगा। जन्म लेने से पहले और मरने के बाद तक मनुष्य जीवन में संस्कार की महत्ता होती है। जन्म लेने से पहले तीन संस्कार हो जाते हैं। जीवन में कुल 48 प्रकार के संस्कार होते हैं, लेकिन उनमें 16 संस्कार महत्वपूर्ण है। वर्तमान के हालात यह है कि हमें 16 संस्कार भी याद नहीं है। आज सामान्य रूप से लोगों को सिर्फ दो ही संस्कार याद है। एक विवाह संस्कार और दूसरा अंतिम संस्कार। यही कारण है कि आज हम संस्कार हीन होते जा रहे हैं।
धूमधाम से होगा कन्याओं का विवाह: कृष्णात्रेय
सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष अभिषेक कृष्णात्रेय ने कहा कि आठ फरवरी को कार्यक्रम स्थल पर 15 कन्याओं का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया जाएगा। इसके साथ ही बैंडबाजों संग बारातें आएंगी और कन्याओं को घर की जरूरत का सभी सामान दिया जाएगा। इसके लिए प्रभु जी का परिवार की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में देश के कई संत भाग लेंगे।
यज्ञशाला और गाय माता की परिक्रमा
सहारनपुर। कथा स्थल पर नौ कुंडीय यज्ञशाला और गाय माता की पूरे दिन श्रद्धालु परिक्रमा करते रहे। सुबह के समय श्रीमद्भागवत के मूल पाठ में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद यजमान यज्ञ में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्री हनुमान जी की कुटिया में भी मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।

साउथ सिटी में श्रीमद् भागवत कथा करते स्वामी राघावाचार्य- फोटो : SAHARANPUR