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मौसम की मार, गोभी और मटर का ठंडा बाजार
Thu, 21 Feb 2019 12:23 AM IST
Prag Gupta
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: Prag Gupta
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:23 AM IST
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गोभी का कारोबार ठंडा होने पर परेशानहाल व्यापारी।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में मौसम की मार का असर सब्जी उत्पादक किसानों पर भी पड़ रहा है। खासकर गोभी और मटर उत्पादक किसानों को तो फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इस दशा में सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। वहीं, सब्जी आढ़ती भी इससे आहत नजर आ रहे हैं। गोभी और मटर के दाम में आई गिरावट को मौसम का असर और बाजार में घटी खपत बताया जा रहा है।
आलम यह है कि सहारनपुर की सब्जी मंडी में बीते कई दिन से आ रही गोभी को खरीदने वाले ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं। मंडी में किसान जो गोभी भेज रहे हैं, वह दो दिन तक भी नहीं बिक पा रही है, जिसके चलते सब्जी आढ़ती भी परेशान हैं। उनकी दुकानों के बाहर गोभी और मटर के ढेर लगे हैं।
सब्जी मंडी में फिलहाल गोभी का दाम तीन से चार रुपये प्रति किलो तक चल रहा है, जबकि किसान को दो रुपये प्रति किलो ही इसका दाम मिल पा रहा है। इसमें से किसान को खेत से मंडी तक सब्जी लाने का भाड़ा भी निकालना मुश्किल हो रहा है।
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बाजार में गोभी का दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। गोभी ही नहीं, हरी मटर को लेकर भी यही स्थिति बनी हुई है। मटर का थोक दाम मंडी में 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में 20 रुपये में ढाई किलोग्राम तक हरी मटर बेची जा रही है।
मंडी से रेहडी और अन्य वाहनों से बाजारों में सब्जी बेचने निकलने वाले मटर की बिक्री नहीं होने से परेशान हैं। सब्जी आढ़ती प्रदीप कुमार शर्मा और योगेश कुमार का कहना है कि फरवरी माह में मौसम का मिजाज बदल रहा है, बरसात हुई और ओलावृष्टि भी हुई।
शादियों का सीजन भी नहीं है, जिस कारण गोभी और मटर की अपेक्षित खपत नहीं हो पा रही है। इसी कारण दाम भी कम है। गोभी विक्रेता छोटेलाल का कहना है कि सुबह से दोपहर तक गोभी की दो ढेरियां बेचनी भारी पड़ रही है। मंडी में भी यह हाल है।
वहीं, किसान चतरसेन निवासी देवली, रोबिन जैन निवासी रामपुर मनिहारान और सिसोना निवासी धीर सिंह सैनी का कहना है कि गोभी और मटर की फसल काफी नुकसानदेह साबित हो रही है। गोभी उत्पादन में प्रतिबीघा 7 से 8 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। एक बीघा भूमि में 25 क्विंटल तक गोभी पैदा हो रही है। दो रुपये प्रति किलोग्राम के लिहाज से 25 क्विंटल गोभी करीब 5000 रुपये की होती है, जो लागत मूल्य से भी कम है।
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आलम यह है कि सहारनपुर की सब्जी मंडी में बीते कई दिन से आ रही गोभी को खरीदने वाले ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं। मंडी में किसान जो गोभी भेज रहे हैं, वह दो दिन तक भी नहीं बिक पा रही है, जिसके चलते सब्जी आढ़ती भी परेशान हैं। उनकी दुकानों के बाहर गोभी और मटर के ढेर लगे हैं।
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सब्जी मंडी में फिलहाल गोभी का दाम तीन से चार रुपये प्रति किलो तक चल रहा है, जबकि किसान को दो रुपये प्रति किलो ही इसका दाम मिल पा रहा है। इसमें से किसान को खेत से मंडी तक सब्जी लाने का भाड़ा भी निकालना मुश्किल हो रहा है।
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बाजार में गोभी का दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। गोभी ही नहीं, हरी मटर को लेकर भी यही स्थिति बनी हुई है। मटर का थोक दाम मंडी में 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में 20 रुपये में ढाई किलोग्राम तक हरी मटर बेची जा रही है।
मंडी से रेहडी और अन्य वाहनों से बाजारों में सब्जी बेचने निकलने वाले मटर की बिक्री नहीं होने से परेशान हैं। सब्जी आढ़ती प्रदीप कुमार शर्मा और योगेश कुमार का कहना है कि फरवरी माह में मौसम का मिजाज बदल रहा है, बरसात हुई और ओलावृष्टि भी हुई।
शादियों का सीजन भी नहीं है, जिस कारण गोभी और मटर की अपेक्षित खपत नहीं हो पा रही है। इसी कारण दाम भी कम है। गोभी विक्रेता छोटेलाल का कहना है कि सुबह से दोपहर तक गोभी की दो ढेरियां बेचनी भारी पड़ रही है। मंडी में भी यह हाल है।
वहीं, किसान चतरसेन निवासी देवली, रोबिन जैन निवासी रामपुर मनिहारान और सिसोना निवासी धीर सिंह सैनी का कहना है कि गोभी और मटर की फसल काफी नुकसानदेह साबित हो रही है। गोभी उत्पादन में प्रतिबीघा 7 से 8 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। एक बीघा भूमि में 25 क्विंटल तक गोभी पैदा हो रही है। दो रुपये प्रति किलोग्राम के लिहाज से 25 क्विंटल गोभी करीब 5000 रुपये की होती है, जो लागत मूल्य से भी कम है।