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Saharanpur News: एक सप्ताह में ही दम तोड़ गए रोपे गए पौधे
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सहारनपुर। महानगर सहित जिले भर में 22 जुलाई को पौधरोपण अभियान चलाकर विभिन्न जगहों पर 17 लाख पौधे रोपित किए गए। 34 लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य है। बाकी पौधे 14 और 15 अगस्त को रोपित किए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी दी गई है, जिन जगहों पर पौधे रोपित किए गए थे, उन जगहों की अमर उजाला ने स्थिति देखी तो एक सप्ताह बाद ही देखभाल के अभाव में कहीं पौधे सूख गए तो नदियों किनारे रोपित पौधे बाढ़ में बह गए।
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हिंडन किनारे रोपे गए पौधे पानी में बहे
गागलहेड़ी के गांव हरौड़ा अहतमाल में हिंडन नदी किनारे वन विभाग ने 3200 पौधे, हरौड़ा में 3200 और रसूलपुर पापड़ेकी में 6400 पौधे लगाए थे। हिंडन किनारे लगे अधिकांश पौधे नदी में आई बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। पौधों के ऊपर रेत मिट्टी चढ़ने से यह दब गए। इसी तरह शिक्षण संस्थाओं द्वारा भी हिंडन नदी किनारे बड़ी संख्या में पौधे लगाए थे। जो सूख गए हैं। वन क्षेत्राधिकारी शरद गुप्ता ने बताया कि हिंडन के पानी ने इस बार पौधरोपण को काफी नुकसान पहुंचाया है।
छुट्टा पशुओं ने पहुंचाया पौधों को क्षति
नागल के विकासखंड कार्यालय के बाहर ग्राम प्रधान ने करीब 300 पौधों का रोपित कराए थे। इनमें से आधे से ज्यादा पौधे नष्ट हो चुके हैं। प्रधान प्रतिनिधि शिवम चौधरी ने बताया कि छुट्टा पशुओं ने पौधों को नुकसान पहुंचाया है। डिप्टी रेंजर गजेंद्र सिंह ने बताया कि नागल क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधान को 2200 सौ पौधे दिए गए थे जिनकी देखरेख भी उन्हें ही करनी है। वहीं, तीतरों के ग्राम बरसी में वन विभाग व तहसील प्रशासन के कर्मचारियों ने पौधरोपण कार्यक्रम के तहत 5600 पौधों की सापेक्ष तीन हजार पौधे रोपित किए थे, जिनमें से अधिकांश पौधे देखभाल के अभाव के सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसी स्थित बेहट, बिहारीगढ़, बड़गांव, देवबंद, गंगोह, नानौता, छुटमलपुर सहित कई जगहों पर देखने को मिली है।
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पैरामाउंट से गायब हुए पौधे, डिवाइडर पर लगे मिले
महानगर में नगर निगम की ओर से पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इसके तहत शहर में डिवाइडरों पर पौधे लगाए गए थे। रेलवे रोड के डिवाइडर पर पौधे लगे मिले, लेकिन अन्य जगहों पर पौधे गायब थे। दिल्ली रोड स्थित स्टेट बैंक कॉलोनी, मल्हीपुर रोड स्थित विनोद विहार, पुराना कलसिया मार्ग, पांवधोई और ढमोला नदी किनारे पौधे रोपित किए। पैरामाउंट में पौधे पूरी तरह सूख गए। अन्य जगहों पर भी पौधे दम तोड़ने की कगार पर हैं। इसकी वजह यह है कि सरकारी तंत्र ने पौधे रोपित कर सिर्फ खानापूर्ति की। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी दी होती तो शायद एक सप्ताह में पौधों की दुर्दशा न होती।
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इन विभागों को दी गई थी जिम्मेदारी
जिले में पर्यावरण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, राजस्व विभाग, जिला पंचायत राज विभाग, आवास-विकास परिषद, औद्योगिक विकास विभाग, नगर विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, रेशम विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग को पौधरोपण और देखभाल की जिम्मेदारी गई थी।
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होगी कार्रवाई
पौधों की देखभाल के निर्देश दिए गए थे, जहां बाढ़ के पानी पौधे बह गए, उसमें तो कुछ नहीं किया जा सकता। वह प्राकृतिक आपदा है, लेकिन जहां पर लापरवाही की वजह से पौधे सूखे हैं। इसको लेकर संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-- -- -- विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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हिंडन किनारे रोपे गए पौधे पानी में बहे
गागलहेड़ी के गांव हरौड़ा अहतमाल में हिंडन नदी किनारे वन विभाग ने 3200 पौधे, हरौड़ा में 3200 और रसूलपुर पापड़ेकी में 6400 पौधे लगाए थे। हिंडन किनारे लगे अधिकांश पौधे नदी में आई बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। पौधों के ऊपर रेत मिट्टी चढ़ने से यह दब गए। इसी तरह शिक्षण संस्थाओं द्वारा भी हिंडन नदी किनारे बड़ी संख्या में पौधे लगाए थे। जो सूख गए हैं। वन क्षेत्राधिकारी शरद गुप्ता ने बताया कि हिंडन के पानी ने इस बार पौधरोपण को काफी नुकसान पहुंचाया है।
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छुट्टा पशुओं ने पहुंचाया पौधों को क्षति
नागल के विकासखंड कार्यालय के बाहर ग्राम प्रधान ने करीब 300 पौधों का रोपित कराए थे। इनमें से आधे से ज्यादा पौधे नष्ट हो चुके हैं। प्रधान प्रतिनिधि शिवम चौधरी ने बताया कि छुट्टा पशुओं ने पौधों को नुकसान पहुंचाया है। डिप्टी रेंजर गजेंद्र सिंह ने बताया कि नागल क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधान को 2200 सौ पौधे दिए गए थे जिनकी देखरेख भी उन्हें ही करनी है। वहीं, तीतरों के ग्राम बरसी में वन विभाग व तहसील प्रशासन के कर्मचारियों ने पौधरोपण कार्यक्रम के तहत 5600 पौधों की सापेक्ष तीन हजार पौधे रोपित किए थे, जिनमें से अधिकांश पौधे देखभाल के अभाव के सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसी स्थित बेहट, बिहारीगढ़, बड़गांव, देवबंद, गंगोह, नानौता, छुटमलपुर सहित कई जगहों पर देखने को मिली है।
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पैरामाउंट से गायब हुए पौधे, डिवाइडर पर लगे मिले
महानगर में नगर निगम की ओर से पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इसके तहत शहर में डिवाइडरों पर पौधे लगाए गए थे। रेलवे रोड के डिवाइडर पर पौधे लगे मिले, लेकिन अन्य जगहों पर पौधे गायब थे। दिल्ली रोड स्थित स्टेट बैंक कॉलोनी, मल्हीपुर रोड स्थित विनोद विहार, पुराना कलसिया मार्ग, पांवधोई और ढमोला नदी किनारे पौधे रोपित किए। पैरामाउंट में पौधे पूरी तरह सूख गए। अन्य जगहों पर भी पौधे दम तोड़ने की कगार पर हैं। इसकी वजह यह है कि सरकारी तंत्र ने पौधे रोपित कर सिर्फ खानापूर्ति की। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी दी होती तो शायद एक सप्ताह में पौधों की दुर्दशा न होती।
इन विभागों को दी गई थी जिम्मेदारी
जिले में पर्यावरण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, राजस्व विभाग, जिला पंचायत राज विभाग, आवास-विकास परिषद, औद्योगिक विकास विभाग, नगर विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, रेशम विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग को पौधरोपण और देखभाल की जिम्मेदारी गई थी।
होगी कार्रवाई
पौधों की देखभाल के निर्देश दिए गए थे, जहां बाढ़ के पानी पौधे बह गए, उसमें तो कुछ नहीं किया जा सकता। वह प्राकृतिक आपदा है, लेकिन जहां पर लापरवाही की वजह से पौधे सूखे हैं। इसको लेकर संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।