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Saharanpur News: नगर निगम में पांच घंटे तक गरजे सफाईकर्मी, अपर नगर आयुक्त से नोकझोंक
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नगर निगम में धरना देते सफाईकर्मी।
- सफाई व्यवस्था के निजीकरण का कर रहे विरोध, धरना शुरू, दो दिन बाद हड़ताल की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी के विरोध में सफाईकर्मियों ने शुक्रवार को नगर निगम में पांच घंटे तक धरना दिया। टेंट उखड़वा दिए जाने को लेकर सफाईकर्मियों की अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। मांग न माने जाने पर हड़ताल करने की चेतावनी दी।
नगर निगम के 70 वार्डों में से नगर निगम के 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इसके विरोध में सफाईकर्मी कई दिन से अधिकारियों से मिलकर अपनी असहमति जता रहे हैं। शुक्रवार से धरना प्रस्तावित था। इसके लिए पुरानी बिल्डिंग के बरामदे में के बाहर टेंट लगाया गया था, जिसे नगर निगम अधिकारियों ने प्रात: आठ बजे ही उखड़वा दिया। जैसे ही सफाईकर्मियों को इसकी जानकारी मिली वे नौ बजे से नगर निगम पहुंचना शुरू हो गए।
उन्हें बताया गया कि टेंट अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव द्वारा उखड़वाया गया है। इसके बाद सफाईकर्मियों ने प्रदीप यादव का घेराव कर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं की अपर नगर आयुक्त के साथ तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद सफाईकर्मियों ने दोबारा टेंट लगाकर महापौर डॉ. अजय कुमार और नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोपहर दो बजे तक धरना दिया।
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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ वह मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनको धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कर्मचारी संगठनों ने तीन दिन तक धरना देने का निर्णय लिया है। कर्मचारी प्रतिदिन सफाई कार्य करने के बाद धरने में शामिल होंगे। तीन दिन में मांग नहीं माने जाने पर हड़ताल की चेतावनी दी है। धरने में सोनी आजाद, धीरज आजाद, अशोक तेश्वर, लक्ष्मण सिंह, रोमी भगत, दीपक, विकास, राहुल बहौत, बृजमोहन चिनालिया, विनोद घावरी आदि रहे।
-- यह है मामला
नगर निगम कुल 70 वार्डों में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने जा रहा है। खास बात यह है कि अभी तक 58 वार्डों की सफाई का सालाना खर्च 41 करोड़ है, जो निजी हाथों में जाने के बाद 78 करोड़ हो जाएगा। यानी करीब दोगुना। साथ ही ठेका कंपनी सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के ही वाहन इस्तेमाल करेगी। दो हजार अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती करने की बात कही जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी के विरोध में सफाईकर्मियों ने शुक्रवार को नगर निगम में पांच घंटे तक धरना दिया। टेंट उखड़वा दिए जाने को लेकर सफाईकर्मियों की अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। मांग न माने जाने पर हड़ताल करने की चेतावनी दी।
नगर निगम के 70 वार्डों में से नगर निगम के 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इसके विरोध में सफाईकर्मी कई दिन से अधिकारियों से मिलकर अपनी असहमति जता रहे हैं। शुक्रवार से धरना प्रस्तावित था। इसके लिए पुरानी बिल्डिंग के बरामदे में के बाहर टेंट लगाया गया था, जिसे नगर निगम अधिकारियों ने प्रात: आठ बजे ही उखड़वा दिया। जैसे ही सफाईकर्मियों को इसकी जानकारी मिली वे नौ बजे से नगर निगम पहुंचना शुरू हो गए।
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उन्हें बताया गया कि टेंट अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव द्वारा उखड़वाया गया है। इसके बाद सफाईकर्मियों ने प्रदीप यादव का घेराव कर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं की अपर नगर आयुक्त के साथ तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद सफाईकर्मियों ने दोबारा टेंट लगाकर महापौर डॉ. अजय कुमार और नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोपहर दो बजे तक धरना दिया।
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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ वह मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनको धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कर्मचारी संगठनों ने तीन दिन तक धरना देने का निर्णय लिया है। कर्मचारी प्रतिदिन सफाई कार्य करने के बाद धरने में शामिल होंगे। तीन दिन में मांग नहीं माने जाने पर हड़ताल की चेतावनी दी है। धरने में सोनी आजाद, धीरज आजाद, अशोक तेश्वर, लक्ष्मण सिंह, रोमी भगत, दीपक, विकास, राहुल बहौत, बृजमोहन चिनालिया, विनोद घावरी आदि रहे।
नगर निगम कुल 70 वार्डों में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने जा रहा है। खास बात यह है कि अभी तक 58 वार्डों की सफाई का सालाना खर्च 41 करोड़ है, जो निजी हाथों में जाने के बाद 78 करोड़ हो जाएगा। यानी करीब दोगुना। साथ ही ठेका कंपनी सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के ही वाहन इस्तेमाल करेगी। दो हजार अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती करने की बात कही जा रही है।