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Saharanpur News: राजस्थान के बबूल पर दिख रही सहारनपुर की कलाकारी
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बबुल की लकड़ी से बनाए गए चम्मच, प्लेट आदि।
सहारनपुर। काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध सहारनपुर का उद्योग नित नए प्रयोग कर रहा है। अभी तक बबूल की लकड़ी से उत्पाद बनाना काफी कठिन था, लेकिन अब जिले में राजस्थान की बबूल की लकड़ी से भी विभिन्न उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिनकी देशी से लेकर विदेशी मार्केट में धूम है। लकड़ी के उत्पाद बनाने के लिए अधिकतर आम और शीशम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। शीशम के लिए कई तरह की मंजूरी लेनी पड़ती है। सहारनपुर में पहले बबूल की लकड़ी से बने उत्पाद राजस्थान से आते थे।
कारण है कि बबूल की लकड़ी सख्त होने के कारण इस पर काम करना बेहद कठिन होता है। इसके अलावा इस पर नक्काशी भी नहीं की जा सकती। बदलती तकनीक ने नए रास्ते भी खोले हैं। सहारनपुर में कई उद्यमी है, जो बबूल की लकड़ी से फोटो फ्रेम से लेकर किचन टूल्स का निर्माण कर रही है। इन उत्पादों की न सिर्फ देशी मार्केट है, बल्कि विदेशों में भी काफी मांग है।
n फोटो फ्रेम, ट्रे, बाउल और थाली व चम्मच भी : बबुल की लकड़ी से फोटो फ्रेम, मिरर फ्रेम तो बन ही रहे हैं। इसके अलावा किचन में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद मसलन थाली, चम्मच, बाउल, बाट समेत अन्य उत्पाद ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। वॉल पैनल में भी बबूल की लकड़ी का ही अधिक इस्तेमाल हो रहा है। इनकी कीमत भी बेहद कम है, जो 100 रुपये से शुरू होकर उत्पाद के मुताबिक लाखों रुपये तक जाती है।
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कारण है कि बबूल की लकड़ी सख्त होने के कारण इस पर काम करना बेहद कठिन होता है। इसके अलावा इस पर नक्काशी भी नहीं की जा सकती। बदलती तकनीक ने नए रास्ते भी खोले हैं। सहारनपुर में कई उद्यमी है, जो बबूल की लकड़ी से फोटो फ्रेम से लेकर किचन टूल्स का निर्माण कर रही है। इन उत्पादों की न सिर्फ देशी मार्केट है, बल्कि विदेशों में भी काफी मांग है।
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n फोटो फ्रेम, ट्रे, बाउल और थाली व चम्मच भी : बबुल की लकड़ी से फोटो फ्रेम, मिरर फ्रेम तो बन ही रहे हैं। इसके अलावा किचन में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद मसलन थाली, चम्मच, बाउल, बाट समेत अन्य उत्पाद ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। वॉल पैनल में भी बबूल की लकड़ी का ही अधिक इस्तेमाल हो रहा है। इनकी कीमत भी बेहद कम है, जो 100 रुपये से शुरू होकर उत्पाद के मुताबिक लाखों रुपये तक जाती है।
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