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सहारनपुर की आयशा मस्जिद: पांच वक्त की अजान में बाधा न डाले पुलिस-प्रशासन, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Tue, 06 Oct 2026 08:53 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Tue, 06 Oct 2026 08:53 PM IST
सार

Saharanpur News: जिला पुलिस व प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण की शिकायत बताते हुए आयशा मस्जिद में पांव वक्त की अजान पर रोक लगा दी थी। तीन महीने पहले आसपास के लोग हाईकोर्ट पहुंच गए। अब हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पांच वक्त की अजान में बाधा नहीं डाली जा सकती।

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Saharanpur’s Ayesha Mosque: District administration cannot obstruct the five daily calls to prayer
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : adobestock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में पांचों वक्त अजान के अधिकार में पुलिस और जिला प्रशासन को अनावश्यक हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अजान के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही किया जा सकता है। नियमों का पालन करने का आश्वासन देने पर प्रशासन अजान में बाधा नहीं डालेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शहनवाज खान और पांच अन्य की ओर से दाखिल याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।
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याचिकाकर्ताओं ने आयशा मस्जिद में दिन में पांच बार अजान देने और इसके लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति से संबंधित न्यायिक आदेशों के बावजूद अधिकारी उन्हें अजान के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करने दे रहे हैं।
 
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राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को अजान देने से नहीं रोका जा रहा है। प्रतिबंध केवल लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है। ध्वनि प्रदूषण नियमों में लाउडस्पीकर के लिए अनुमन्य ध्वनि स्तर तथा उसके इस्तेमाल की समय सीमा निर्धारित है, जिसका पालन करना आवश्यक है।
राज्य ने 2020 में अफजल अंसारी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अजान इस्लाम का अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा हो सकती है, लेकिन लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक उपकरण से अजान देना धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं माना गया है।
 
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अदालत ने उस फैसले में यह भी स्पष्ट किया था कि ध्वनि विस्तारक उपकरणों का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों तथा ध्वनि प्रदूषण नियमों के अधीन है। रात दस बजे से सुबह छह बजे तक इनके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं ने नियमों और पूर्व के न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन नहीं करने का आश्वासन दिया। 
 

कोर्ट ने उन्हें अपने हस्ताक्षरयुक्त नोटरीकृत हलफनामे के साथ आवेदन दाखिल करने को कहा। इसके बाद पुलिस और जिला प्रशासन को पांचों वक्त अजान में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, नियमों या हलफनामे में दिए आश्वासन का उल्लंघन होने पर अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता रहेगी।
 

80 साल पुरानी मस्जिद, अजान के लिए तीन महीने चली कानूनी लड़ाई
गागलहेड़ी में पठेड़ गांव स्थित आयशा मस्जिद के करीब 80 वर्ष पुरानी होने का दावा है। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से इस मस्जिद में नमाज अदा होती आ रही है। कुछ महीने पहले मस्जिद से पांच वक्त की अजान को लेकर रोक लगाए जाने के बाद मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया। अजान जारी रखने की मांग को लेकर मस्जिद से जुड़े लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता शहनवाज खान ने बताया कि करीब तीन माह पहले पुलिस ने पांच वक्त की अजान पर रोक लगवा दी थी। पुलिस का कहना था कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर शिकायत हुई थी। प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जुलाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। करीब तीन महीने तक मामले में कानूनी प्रक्रिया चली। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने राहत मिली है। 
 

शहनवाज खान ने बताया कि मस्जिद में पांच वक्त की नमाज और अजान को लेकर वह न्यायालय के निर्देशों का पालन करेंगे। साथ ही आदेश की प्रति संबंधित शासन और प्रशासनिक अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मस्जिद के इमाम उमेर ने बताया कि आयशा मस्जिद गांव की पुरानी मस्जिदों में शामिल है। इसका इतिहास करीब 80 वर्ष पुराना है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार आगे ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन किया जाएगा।

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