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सहारनपुर दंगा: मृतकों और घायलों के मेडिकल प्रमाण पत्रों को लेकर कोर्ट में हुई बहस, ये बोले दोनों पक्ष के वकील

Wed, 21 Jan 2026 08:47 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Wed, 21 Jan 2026 08:47 PM IST
सार

Court News: साल 2014 गुरुद्वारे की जमीन को लेकर सहारनपुर में सांप्रदायिक दंगा हो गया था। तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि 21 लोग घायल हुए थे। 100 से अधिक दुकानों में आग लगा दी गई थी। 

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Saharanpur riots: Debate in court regarding medical certificates of dead and injured
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

सहारनपुर जिले में वर्ष 2014 में हुए दंगे के मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता की ओर से दिए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। उन्होंने मामले में गवाहों और साक्ष्यों की गवाही को अहम बताया, जबकि बचाव पक्ष ने प्रार्थना पत्र का विरोध किया।

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अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामले में सरकार ने आरोपी के ऊपर एनएसए लगाया था। हाईकोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि विवेचक ने पत्रावली में घायल और मृतकों के मेडिकल भी पुष्ट नहीं किए हैं। कहा कि मामले में विवेचक ने लापरवाही बरती है। सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी ने अपनी दलील में कहा कि विवेचक की ओर से डॉक्टर्स का मेडिकल, वादी का मेडिकल, दंगे में घायल आरएएफ जवानों के मेडिकल सर्टिफिकेट, तत्कालीन एसडीएम आदि की गवाही नहीं हुई है।
 

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उन्होंने मामले को सिद्ध करने के लिए इनकी गवाही और साक्ष्यों को जरूरी बताया। इस दलील पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनावर सिद्दीकी ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मामले को काफी समय हो चुका है। पहले ही तीन गवाहों की अनुमति अदालत से मिल चुकी है। 
 
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बता दें कि जिले में गुरुद्वारे की जमीन को लेकर दंगा फैल गया था। सहारनपुर में हुए दंगे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। 21 लोग घायल हो गए थे। इनमें एक सिपाही और होमगार्ड समेत 11 लोगों को गोली लगी थी। दंगाइयों ने शहर में 100 से अधिक दुकानों और वाहनों में आग लगा दी थी। हालात पर काबू पाने के लिए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के छह थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया था।
 
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