सहारनपुर: अब पुल खुमरान होगा रामेश्वर सेतु, श्री बागेश्वर महादेव के नाम से जाना जाएगा चौक नवाबगंज
सहारनपुर में कार्यकारिणी समिति की बैठक में पुल खुमरान का नाम बदलकर रामेश्वर सेतु और चौक नवाबगंज का नाम बदलकर श्री बागेश्वर महादेव करने का प्रस्ताव रखा गया।
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यूपी के सहारनपुर में कार्यकारिणी समिति की बैठक में उप सभापति भूरा सिंह प्रजापति ने पुल खुमरान का नाम बदलकर रामेश्वर सेतु और पार्षद कंचन धवन ने चौक नवाबगंज का नाम बदलकर श्री बागेश्वर महादेव के नाम करने का प्रस्ताव रखा है। अनिल कुमार ने नगर निगम में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने के पूर्व के प्रस्ताव पर अमल की मांग की।
पुनरीक्षित बजट पर चर्चा को लेकर शनिवार को बुलाई गई नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की बैठक में हंगामा हुआ। एक ओर जहां दीपावली मेले के आयोजन को लेकर महापौर और नगरायुक्त के बीच तीखी बहस हुई, वहीं दूसरी ओर समिति सदस्य पार्षदों ने निगम अधिकारियों पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया। हंगामे के चलते बजट पर चर्चा नहीं हो सकी। इसके लिए 26 नवंबर को पुन: बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। कुछ सदस्यों के द्वारा अपने प्रस्ताव भी रखे।
कार्यकारिणी समिति की बैठक दोपहर तीन बजे महापौर संजीव वालिया के कार्यालय में बुलाई। इसमें महापौर के साथ ही नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, कुछ अधिकारी तथा समिति के सभी 12 सदस्य पहुंचे थे। बैठक शुरू होते ही भाजपा पार्षद आशुतोष सहगल ने गांधी पार्क मैदान में आयोजित दीपावली मेले के आयोजन के लिए निगम बोर्ड से चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी बोर्ड की अनदेखी कर मनमानी कर रहे हैं। इस पर नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह नाराज हो गए। महापौर संजीव वालिया ने नगरायुक्त से पूछा जब मेला तीन दिसंबर तक था तो उसके बाद 12 दिन कैसे बढ़ाए। नगरायुक्त ने कहा कि इसके लिए मंडलायुक्त ने निर्देश दिए थे। इसी बात को लेकर महापौर और नगरायुक्त के बीच तीखी बहस हो गई।
जन समस्याओं के निस्तारण के नाम पर पैसा वसूलने का आरोप
पार्षद अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा ने नगर निगम में जन समस्याओं के निस्तारण के नाम पर पैसा वसूलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा संजीव नामक व्यक्ति से दुकान हस्तांतरित कराने के नाम पर एक अधिकारी द्वारा पांच लाख रुपये की मांग की गई है। मामले में डीएम से शिकायत होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठेकेदारी में लिप्त होने का भी आरोप लगाया। पार्षद शहजाद मलिक ने कार्यकारिणी समिति की बैठक नौ माह बाद बुलाने पर नाराजगी जताई।
उन्होंने सीएलसी के तैनात करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर भी सवाल उठाया। नतीजा यह रहा कि पुनरीक्षित बजट पर चर्चा ही नहीं हो सकी। महापौर ने कार्यकारिणी की बैठक 26 नवंबर को पुन: करने की घोषणा की। इसमें आशुतोष सहगल, अभिषेक उर्फ टिकू अरोड़ा, कंचन धवन, भूरा सिंह प्रजापति, गुलशेर, शहजाद मलिक, नरेश रावत, रमेश छाबड़ा, मनोज जैन, गौरव चौधरी आदि मौजूद रहे।
नगरायुक्त के साथ मेरी कोई बहस नहीं हुई है। बैठकों में इस तरह की स्थिति कई बार बन जाती है जब जोर से बोलना पड़ता है। कुछ बातें उन्होंने कही और कुछ मैने बोली। बाद में स्थिति सामान्य हो गई। - संजीव वालिया, महापौर।