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देवबंद: फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना अरशद बोले, इबादत की नहीं होती कोई कीमत
Wed, 21 Apr 2021 01:46 AM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: कपिल kapil
Updated Wed, 21 Apr 2021 01:46 AM IST
सार
पवित्र रमजान माह की तरावीह में रकम तय करके कुरान पाक सुनाना और सुनना जायज नहीं है।
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फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना अरशद
- फोटो : amar ujala
विस्तार
पवित्र रमजान माह की तरावीह में रकम तय करके कुरान पाक सुनाना और सुनना जायज नहीं है। जो हाफिज इस तरह का काम करते हैं, वो गुनाह में शामिल होते हैं। क्योंकि कुरान सुनाना इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
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मंगलवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि तरावीह में कुरान सुनाने के नाम पर पैसे देने और लेने वाला दोनों ही अल्लाह के नजदीक बड़े मुजरिम होते हैं। उनका यह अमल नाजायज है। कुरान सुनाने वाले हाफिज को ईद मनाने के लिए कुछ दिया जा सकता है, लेकिन नीयत में यह न हो कि हाफिज को कुरान सुनाने के नाम पर पैसे या कपड़ा दे रहे हैं। कुरान पाक पढ़ना इबादत है और इबादत की कोई कीमत नहीं होती।
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बता दें कि पवित्र रमजान के महीने में लोग मस्जिदों, घरों और प्रतिष्ठानों पर तरावीह का एहतेमाम करते हैं, जिसमें कुरान पाक सुनाने के लिए हाफिज को बुलाया जाता है। जो सुविधा के मुताबिक, 10, 15 या 28 दिन में कुरान पाक पूरा करता है। कुरान पाक सुनना रमजान का एक बड़ा अहम हिस्सा है।
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