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सहारनपुर नगर निगम : भाजपा और बसपा में सीधा मुकाबला रहा

Thu, 04 May 2023 10:20 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Thu, 04 May 2023 10:20 PM IST
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Saharanpur Municipal Corporation: Direct contest between BJP and BSP
देवबंद के इस्लामिया डिग्री कॉलेज में पोलिंग बूथ पर वोट डालने को कतार में खड़ी बुर्कानसी महिला म
सहारनपुर। नगर निगम महापौर के पद हुए चुनाव में भाजपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ। दलित-मुस्लिम समीकरण के चलते बसपा के पक्ष में मुस्लिमों और दलितों का ध्रुवीकरण देखने को मिला। सपा प्रत्याशी अपने समाज की वोटों को अपने पक्ष में कराने में सफल नहीं हो सके, जिस कारण वो मेयर सीट के मुकाबले को त्रिकोणीय नहीं बना सके। मतदान होने के बाद प्रत्याशी पड़े वोटरों की गुणाभाग में लगे हैं। अब सबकी निगाहें 13 मई को खुलने वाले परिणाम पर लगी है।
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महापौर की सीट के लिए भाजपा ने डॉ अजय कुमार, बसपा ने पूर्व विधायक इमरान मसूद की भाभी खतीजा मसूद, सपा ने विधायक आशु मलिक के भाई नूर हसन मलिक, कांग्रेस ने प्रदीप वर्मा एडवोकेट, आप ने सहदेव सिंह को चुनाव में उतारा। तीन निर्दलीय समेत आठ प्रत्याशी चुनावी रण में हैं। बृहस्पतिवार को हुए मतदान में मुख्य मुकाबला भाजपा के डॉ. अजय कुमार और बसपा की खतीजा मसूद के बीच देखने को मिला। सपा के नूर हसन मलिक मुकाबले को त्रिकोणीय नहीं बना सके। हिंदु बाहुल्य क्षेत्रो में खूब कमल खिला। हिंदू वोटरों का विभाजन नहीं हुआ।
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मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण के चलते मुस्लिम क्षेत्रों में बसपा का हाथी जमकर मदमस्त चाल में चला। दलितों का अधिकांश वोट भी बसपा को मिला। महानगर के 32 बाहरी गांवों में दलित वाेटर बसपा के साथ खड़े दिखाई दिए। हां, पुराने शहर में भाजपा दलित वोटरों में सेंध लगाने में सफल रही। भाजपा ने 13 वार्ड में मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े किए है, जिनका लाभ भाजपा को मिल सकता है। इन वार्ड में कुछ मुस्लिम वोट भी भाजपा के पक्ष में गया है। सपा प्रत्याशी नूर हसन अपनी बिरादरी के सभी वोट अपने पक्ष में करने में विफल दिखाई दिए। कांग्रेस के प्रदीप वर्मा पार्टी भी अपनी बड़ी उपस्थिति दर्ज कराते दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस के परंपरागत वोट के अलावा अन्य वोट उन्हें मिलता नजर नहीं आया। मुस्लिम क्षेत्रो में मतदान प्रतिशत हिंदू क्षेत्रों से अधिक रहा है, जिससे बसपा और भाजपा प्रत्याशियों के समर्थक मिले वोटरों की गुणाभाग में जुटे है। मुस्लिम क्षेत्रों में पुलिस की सख्ताई ज्यादा रही। कई लोगों को पहचान पत्र सही नहीं होने पर वापस लौटाया गया।
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