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सहारनपुर: गीतकार राजेंद्र राजन का कोरोना से निधन, साहित्य जगत में शोक

Fri, 16 Apr 2021 12:14 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 16 Apr 2021 12:14 AM IST
सार

- राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में बृहस्पतिवार की सुबह ली अंतिम सांस 
-आरटीपीसीआर जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई

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Saharanpur: lyricist Rajendra Rajan dies from Corona, mourning in the literary world
गीतकार राजेंद्र राजन - फोटो : amar ujala

विस्तार

अपने गीतों से खुद को और सहारनपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले गीतकार राजेंद्र राजन (69) नहीं रहे। उन्होंने बृहस्पतिवार तड़के राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में अंतिम सांस ली। उन्हें करीब एक सप्ताह पहले बुखार आया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।

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दो दिन पहले उन्होंने एंटीजन किट से जांच कराई थी, जो नेगेटिव आई। इसके बाद आरटीपीसीआर के लिए नमूना दिया था, जिसकी रिपोर्ट उनके निधन के बाद पॉजिटिव आई। वे अपने पीछे पत्नी विभा, बेटे मनोज और प्रशांत समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से साहित्य प्रेमियों में दुख की लहर है। 
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राजेंद्र राजन मूल रूप से गांव एलम (शामली) के रहने वाले थे। उनका जन्म बीएस शर्मा के घर नौ अगस्त 1952 को हुआ था। उन्होंने बीएससी सहारनपुर के महाराज सिंह कॉलेज से की। कई साल तक स्टार पेपर मिल में सेवारत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद से उनका पूरा जीवन साहित्य को ही समर्पित रहा। गद्य तो राजन ने छात्र जीवन में ही लिखना शुरू कर दिया था, लेकिन उनकी मंचीय गीत यात्रा मेला गुघाल के कवि सम्मेलन से 1976 में शुरू हुई।

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करीब साढे़ चार दशक की गीत यात्रा में राजन ने लालकिला, गीत चांदनी जयपुर और राष्ट्रपति भवन सहित कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के सभी बड़े मंचों पर असंख्य कवि सम्मेलनों में अपने गीत पढ़े। कवि सम्मेलनों के अलावा मुशायरों में भी उन्हें खूब वाह-वाही मिलती रही। निर्भय हाथरसी, कुंवर बेचैन, भारत भूषण, संतोष आनंद, गोपालदास नीरज, शिशुपाल निर्धन, यशपाल जैन, रामरिख मनहर, रमानाथ अवस्थी, विजेंद्र अवस्थी, हरिओम पंवार सहित देश के कई साहित्य मनीषियों से उन्हें निरंतर असीम स्नेह और सराहना मिली।

वर्ष 2009 में अमेरिका के 16 शहरों में राजन ने अपनी गीत यात्रा की और वहां के गीत प्रेमियों को अपने गीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया था। करीब चालीस साल पहले लिखा गया उनका गीत ‘मैं पात पात झर गया, तुम्हें भुलाने के लिए’ काव्य मंचों पर ऐसा चर्चित हुआ, जिसने राजन को देश भर में पहचान दी। वर्ष 1983 में उनका पहला काव्य संकलन ‘पतझर-पतझर सावन-सावन’ प्रकाशित हुआ।

वर्ष 2003 में गीत संग्रह ‘केवल दो गीत लिखे मैंने’ और वर्ष 2015 में दूसरा गीत संग्रह ‘खुश्बू प्यार करती है’ तथा 2017 में ग़जल संग्रह ‘मुझे आसमान देकर’ प्रकशित हुआ। इसके अतिरिक्त देश भर की पत्र-पत्रिकाओं में उनके अनेक गीत व रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।

साहित्यिक पत्रिका ‘शीतलवाणी’ का उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर वर्ष 2019 में एक विशेषांक भी प्रकाशित हुआ। प्रतिष्ठित कवि कुमार विश्वास ने तो उनका चर्चित गीत ‘आने वाले हैं शिकारी मेरे गांव में...अपने स्टूडियो में रिकॉर्ड कर प्रसारित किया था। वर्ष 2008 में ‘स्पर्श’ नाम से भी उनका एक ऑडियो कैसेट आया था।
 
...मौत जब फैसला सुनाती है 
राजेंद्र राजन ने अनेक गीतों की रचना की। इनमें कई गीत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाए। इन्हीं में से एक गीत जिंदगी और मौत पर लिखा। 
- पास आती है भाग जाती है, नींद कुछ यूं मुझे सताती है। 
कोई मतलब नहीं दलीलों का, मौत जब फैसला सुनाती है। 
फलसफा जिंदगी का बस ये है, रेल आती है छूट जाती है। 
रोज मैं इंतजार करता हूं, रोज उम्मीद टूट जाती है। 
हद से हद जिंदगी की हद क्या है, मौत ये राज खोल जाती है। 
तू यकीनन गजल से बेहतर है, जैसा कहता हूं मान जाती है। 
मिलने वाली हरेक ठोकर ही, इक नया रास्ता दिखाती है।

राजन को मिले पुरस्कार 
राजेंद्र राजन को वर्ष 2015 में साहित्य भूषण, हिन्दी-उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी उत्तर प्रदेश द्वारा  साहित्यश्री, महादेवी वर्मा पुरस्कार मुंबई, विद्यापति पुरस्कार खरगौन, सृजन सम्मान-2013 सहारनपुर, श्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर स्मृति पुरस्कार-2002, महाकवि नीरज सम्मान मैनपुरी, गीत ऋषि सम्मान अंडमान, कविवर बुद्धिप्रकाश पारिख पुरस्कार 2008, प्रणाम सम्मान-2014 लखनऊ, विशंभर सहाय प्रेमी पुरस्कार मेरठ-2008, डॉ. सुमेर सिंह शैलेश नामित पुरस्कार-2019 सतना आदि मिले। 

साहित्य प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि 
-शायर डॉ. नवाज देवबंदी का कहना है कि राजेंद्र राजन एक बड़े गीतकार होने के साथ ही एक नेकदिल इंसान भी थे। उनका जाना हिन्दी साहित्य के साथ ही कवि मंचों के लिए अपूर्णनीय क्षति है। 

-सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने राजेंद्र राजन के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनका कहना है कि राजेंद्र राजन ने अपने गीतों के माध्यम से सहारनपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। उनका जाना साहित्य क्षेत्र के साथ ही सहारनपुर के लिए बड़ी क्षति है। 

-नगर विधायक संजय गर्ग का कहना है कि राजेंद्र राजन सहारनपुर के गौरव थे, जिनके चले जाने से सहारनपुर को बड़ा नुकसान हुआ है। 

-साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आजम ने निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उनके अवसान से सहारनपुर में गीत गूंगा हो गया है। वह सामाजिक सरोकारों और प्रेम गीतों के अप्रतिम गीतकार थे। उनके गीत लोगों के अधरों पर दशकों से तैरते है और तैरते रहेंगे।

-गीतकार डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा ने राजन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि गीतों और ग़जलों में शब्द, भाव और व्यंजना के मोती टांकने वाले राजेंद्र राजन का जाना हिंदी जगत की एक बड़ी क्षति है। 

-कवि सुरेश सपन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतकार, राजेंद्र राजन का निधन साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति है। करीब साढे़ चार दशक में उन्होंने काव्य मंचों पर गीत को जिस तरह प्रतिस्थापित किया।

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